
विंध्यभूमि भोपाल। मध्य प्रदेश में प्रशासनिक स्तर पर लेत-लतीफी और लालफीताशाही को जड़ से खत्म करने के लिए राज्य सरकार ने एक बड़ा और ऐतिहासिक कदम उठाया है। प्रदेश में ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ (Ease of Doing Business) कानून को पूरी तरह लागू कर दिया गया है। इस नए कानून के तहत अब सरकारी दफ्तरों में फाइलों को अटकाने और लटकाने वाले अफसरों की मनमानी पर पूरी तरह से शिकंजा कस दिया गया है। सरकार ने साफ कर दिया है कि अगर किसी अधिकारी ने बिना किसी ठोस वजह के किसी फाइल को दबाया, तो उस देरी का हर्जाना उसकी जेब से वसूला जाएगा और जुर्माने की राशि सीधे उसकी सैलरी से काटी जाएगी।
प्रशासनिक सुधार की दिशा में बड़ा कदम
मध्य प्रदेश सरकार का यह फैसला राज्य में व्यापारिक माहौल को बेहतर बनाने और आम नागरिकों को त्वरित सरकारी सेवाएं देने की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम माना जा रहा है। अक्सर यह देखा जाता है कि निवेशक और आम जनता सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटते रहते हैं, लेकिन अधिकारियों की लापरवाही के कारण फाइलें हफ्तों और महीनों तक टेबल पर धूल खाती रहती हैं। इस नई व्यवस्था से न केवल काम में पारदर्शिता आएगी, बल्कि अधिकारियों में तय समय सीमा के भीतर काम पूरा करने की जिम्मेदारी भी बढ़ेगी।
डिजिटल ट्रैकिंग से पकड़ी जाएगी देरी
इस कानून को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए सरकार एक पारदर्शी डिजिटल ट्रैकिंग सिस्टम का सहारा ले रही है। हर सरकारी विभाग में आने वाली फाइल का एक डिजिटल रिकॉर्ड होगा, जिससे यह आसानी से पता लगाया जा सकेगा कि कौन सी फाइल किस अधिकारी की टेबल पर कितने दिनों से पेंडिंग है। यदि कोई अधिकारी निर्धारित समय सीमा (Deadline) के भीतर फाइल पर निर्णय नहीं लेता है या उसे आगे नहीं बढ़ाता है, तो सिस्टम स्वतः ही इसकी रिपोर्ट दर्ज कर लेगा।
सीधे वेतन से कटेगी जुर्माने की राशि
नए कानून की सबसे खास और सख्त बात यह है कि इसमें पेनाल्टी का प्रावधान बेहद कड़ा रखा गया है। देरी के लिए जिम्मेदार पाए जाने वाले अधिकारी या कर्मचारी पर प्रतिदिन के हिसाब से जुर्माना लगाया जाएगा। यह जुर्माना कोई कागजी कार्रवाई नहीं होगी, बल्कि इसे सीधे संबंधित अधिकारी के मासिक वेतन (Salary) से काटा जाएगा। सरकार का मानना है कि जब लापरवाही का सीधा असर जेब पर पड़ेगा, तभी कार्यप्रणाली में सुधार आएगा और जवाबदेही तय होगी।
‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ को मिलेगा बढ़ावा
इस कानून के लागू होने से मध्य प्रदेश में उद्योगों और स्टार्टअप्स के लिए सिंगल विंडो सिस्टम को असल मायनों में मजबूती मिलेगी। नए बिजनेस शुरू करने के लिए जरूरी अनुमतियां (Permissions) और क्लीयरेंस अब बिना किसी रुकावट के समय पर मिल सकेंगे। इससे देश-विदेश के बड़े निवेशक मध्य प्रदेश की ओर आकर्षित होंगे, जिससे राज्य में रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और आर्थिक विकास को गति मिलेगी।
जनता को भी मिलेगी बड़ी राहत
यह कानून सिर्फ उद्योगपतियों या व्यापारियों के लिए ही नहीं, बल्कि आम नागरिकों के लिए भी बेहद फायदेमंद साबित होगा। राशन कार्ड, मूल निवासी प्रमाण पत्र, जाति प्रमाण पत्र, भूमि नामांतरण और बिजली कनेक्शन जैसे रोजमर्रा के काम भी इसी कानून के दायरे में आएंगे। अब आम जनता को अपने जायज कामों के लिए बाबुओं और अफसरों के चक्कर काटने या रिश्वत देने की जरूरत नहीं पड़ेगी।
सरकार के इस सख्त रुख से प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मच गया है। मुख्यमंत्री ने साफ संदेश दे दिया है कि जनता और विकास से जुड़े कामों में किसी भी स्तर पर ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी। जो अफसर समय पर काम नहीं कर सकते, उन्हें इसका खामियाजा भुगतने के लिए तैयार रहना होगा।





























