
विंध्यभूमि.दिल्ली.जनगणना 2027 के जनसंख्या गणना चरण के लिए तैयार प्रश्नावली में धर्म, जन्मतिथि और जन्मस्थान से जुड़े सवाल शामिल हैं. द हिंदू की रिपोर्ट के मुताबिक, इनमें व्यक्ति के माता-पिता की जन्मतिथि और जन्मस्थान की जानकारी गांव के स्तर तक मांगी गई है. यह जानकारी लद्दाख और तीन अन्य राज्यों के बर्फीले इलाकों में जारी की गई प्रश्नावली में शामिल है.
प्रश्नावली में माता-पिता के धर्म और जन्मस्थान की जानकारी मांगे जाने से इस बात को लेकर चिंता पैदा हुई है कि इस डेटा का इस्तेमाल अल्पसंख्यक धार्मिक समूहों और प्रवासियों की पहचान करने के लिए किया जा सकता है.
यह चिंता ऐसे समय में बढ़ी है जब सत्तारूढ़ सरकार पर ‘अवैध प्रवासियों’ को हटाने के नाम पर मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) में भेदभावपूर्ण और सांप्रदायिक रवैया अपनाने के आरोप लगे हैं.
द हिंदू के मुताबिक, प्रश्नावली में कुल 40 सवाल हैं, जो 2011 की जनगणना में पूछे गए सवालों से 13 अधिक हैं. इनमें से ज्यादातर नए सवाल व्यक्ति और उसके परिवार से जुड़ी जानकारी मांगते हैं. इनमें उत्तरदाता के माता-पिता के नाम और विवरण, राष्ट्रीयता, स्थायी निवास का पता और डिजिटल साक्षरता जैसी जानकारियां शामिल हैं.
यह पहली बार है जब जनगणना के दौरान जाति की भी गणना की जाएगी. अनुसूचित जाति (एससी) और अनुसूचित जनजाति (एसटी) समुदायों से संबंधित लोगों को पहले से तय सूची में से अपनी जाति चुननी होगी, जबकि अन्य लोग अपनी जाति का विवरण खुद दर्ज कर सकेंगे. प्रश्नावली में लोगों को ‘जाति घोषित नहीं करना चाहते’ और ‘कोई जाति नहीं’ विकल्प चुनने की भी अनुमति दी गई है.
2011 की सामाजिक-आर्थिक और जाति जनगणना (एसईसीसी) में इस्तेमाल किए गए खुले विकल्प वाले तरीके की डेटा में असंगतता की आशंका को लेकर आलोचना हुई थी. 2011 में जातियों की कोई मानकीकृत सूची नहीं होने के कारण 46 लाख से अधिक अलग-अलग जाति के नाम दर्ज किए गए थे. बाद में कई स्रोतों ने इस डेटा को अविश्वसनीय बताया था.
क्या नए सवाल जोड़े गए हैं?
देश के बाकी हिस्सों से पहले बर्फीले इलाकों में जारी की गई जनगणना 2027 की प्रश्नावली में उत्तरदाता के पति या पत्नी, कोविड-19 टीकाकरण, बैंक खातों की संख्या, स्थायी पता, पासपोर्ट और ड्राइविंग लाइसेंस, मोबाइल नंबर, वोटर आईडी कार्ड और आधार से जुड़ी जानकारी मांगी गई है. उत्तरदाताओं से यह भी पूछा जाएगा कि उन्होंने कोविड-19 का टीका भारत में लगवाया था या विदेश में.
द हिंदू की रिपोर्ट के मुताबिक, इनमें से कुछ सवाल 2019 में राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर (एनपीआर) के लिए किए गए अभ्यास में मांगी गई जानकारी से मिलते-जुलते हैं. एनपीआर को आखिरी बार 2015 में अपडेट किया गया था. इसके बाद इसे जनगणना के साथ अपडेट नहीं किया गया. विपक्ष ने आशंका जताई थी कि एनपीआर का इस्तेमाल आगे चलकर राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (एनआरसी) तैयार करने के लिए किया जा सकता है.
प्रश्नावली में हिंदू धर्म, इस्लाम, ईसाई धर्म, सिख धर्म, बौद्ध धर्म और जैन धर्म के अलावा अन्य धर्मों को दर्ज करने के लिए ‘अन्य धर्म’ नाम से एक अलग विकल्प भी दिया गया है. द हिंदू के मुताबिक, भारत के बाहर जन्मे लोगों के मामले में उनके माता-पिता का जन्मस्थान भी दर्ज किया जा सकेगा.
अलग-अलग चरणों में होगी गणना
जनगणना के दूसरे चरण के लिए स्व-गणना की प्रक्रिया लद्दाख और जम्मू-कश्मीर, उत्तराखंड तथा हिमाचल प्रदेश के कुछ हिस्सों में शुरू हो चुकी है. हालांकि, घर-घर जाकर गणना 1 सितंबर से 30 सितंबर, 2026 के बीच की जाएगी. देश के बाकी हिस्सों में दूसरा चरण फरवरी 2027 में होगा.
यह पहली बार है जब जनसंख्या जनगणना के तहत जाति की गणना के साथ-साथ बड़ी संख्या में जनसांख्यिकीय, पारिवारिक और पहचान से जुड़ी जानकारियां भी एकत्र की जाएंगी.
विपक्ष ने उठाए सवाल
कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने एक्स पर एक पोस्ट में जनगणना 2027 में जाति से जुड़े सवालों के लिए खुले विकल्प वाले तरीके के इस्तेमाल की आलोचना की. उन्होंने 2021 में सुप्रीम कोर्ट में दाखिल एक हलफनामे का हवाला दिया, जिसमें डेटा को अधिक सटीक तरीके से जुटाने के लिए ड्रॉप-डाउन सूची के इस्तेमाल की सिफारिश की गई थी.
उन्होंने एक्स पर लिखा, ‘अब सवाल यह है कि जनगणना 2027 में वह ड्रॉप-डाउन मेन्यू क्यों नहीं है, जिसकी सिफारिश मोदी सरकार ने सितंबर 2021 में सुप्रीम कोर्ट में दाखिल अपने हलफनामे में की थी? बिहार और तेलंगाना में जाति सर्वेक्षण से पहले ऐसी सूची तैयार भी की गई थी. कांग्रेस अध्यक्ष ने 5 मई, 2025 को प्रधानमंत्री को लिखे अपने पत्र में भी ऐसी सूची का सुझाव दिया था.’
उन्होंने आगे कहा, ‘निष्कर्ष स्पष्ट है: मोदी सरकार जाति जनगणना को महज विफल करना चाहती है. प्रधानमंत्री ने 30 अप्रैल, 2025 को पूरी तरह यू-टर्न लेते हुए घोषणा की थी कि जाति जनगणना होगी, जबकि इससे पहले वह इसे ‘अर्बन नक्सल’ विचार बताते थे. अब उन्होंने अपने पहले यू-टर्न पर भी एक और यू-टर्न ले लिया है और बिना ऐसा कहे जाति जनगणना के विचार को दफना दिया है. वह यू-टर्न उस्ताद हैं.’
बुधवार (19 अगस्त) को एक अन्य पोस्ट में रमेश ने आरोप लगाया कि जनगणना 2027 में जाति से जुड़े सवाल पूछने की प्रक्रिया ‘जानबूझकर त्रुटिपूर्ण’ रखी गई है. उन्होंने कहा कि माता-पिता की जन्मतिथि और जन्मस्थान से जुड़े सवाल पहले कभी नहीं पूछे गए हैं.
रमेश ने कहा, ‘जनगणना गोपनीय होती है. स्पष्ट है कि जनगणना 2027 का कोई और गहरा और नापाक उद्देश्य है.’






















