
Bhopal News। UPI भुगतान को लेकर सामने आई शुल्क संबंधी चर्चाओं ने एक बार फिर सियासी बहस को तेज कर दिया है। मध्यप्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने इस मुद्दे को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया है कि डिजिटल भुगतान करने वाले आम लोगों पर आर्थिक बोझ डालने की तैयारी की जा रही है।
Bhopal News,पटवारी ने दावा किया कि ₹2,000 से अधिक के UPI लेनदेन पर 0.5 प्रतिशत तक शुल्क लगाने की योजना पर विचार किया जा रहा है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि यदि कोई व्यक्ति ₹5,000 का भुगतान करता है तो प्रस्तावित दर के हिसाब से ₹25 और ₹10,000 के भुगतान पर ₹50 अतिरिक्त देने पड़ सकते हैं।
Bhopal News,कांग्रेस नेता ने कहा कि UPI को देश में डिजिटल भुगतान का आसान, तेज और बिना अतिरिक्त शुल्क वाला माध्यम बनाकर बढ़ावा दिया गया था। ऐसे में शुल्क लगाए जाने की किसी भी संभावना से आम उपभोक्ताओं और छोटे कारोबारियों पर अतिरिक्त वित्तीय दबाव पड़ सकता है।
पटवारी ने भाजपा सरकार पर लगाया आरोप
Bhopal News,सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए जीतू पटवारी ने केंद्र की भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार लगातार आम जनता पर आर्थिक बोझ बढ़ाने वाली नीतियां ला रही है। पटवारी ने इसे जनता से वसूली की दिशा में उठाया जाने वाला कदम बताते हुए सरकार की नीयत पर सवाल खड़े किए।
फिलहाल शुल्क लागू नहीं
Bhopal News,हालांकि, इस पूरे मामले में सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि ₹2,000 से अधिक के प्रत्येक UPI भुगतान पर 0.5 प्रतिशत शुल्क फिलहाल लागू नहीं किया गया है।14 सितंबर को केंद्र सरकार की ओर से जारी अधिसूचना में ₹2,000 तक के UPI लेनदेन पर बैंक अथवा भुगतान सेवा प्रदाता द्वारा शुल्क लगाए जाने पर रोक को स्पष्ट किया गया है। वहीं, ₹2,000 से अधिक के लेनदेन को लेकर शुल्क की संभावना पर चर्चा जरूर है, लेकिन इसकी अंतिम दर और लागू करने की पूरी व्यवस्था अभी तय नहीं हुई है।
UPI शुल्क की चर्चा क्यों?
Bhopal News,देश में UPI लेनदेन लगातार बढ़ने के साथ भुगतान प्रणाली के संचालन, तकनीकी ढांचे और उससे जुड़ी लागत को लेकर भी बहस होती रही है। फिलहाल सामान्य बैंक खातों से किए जाने वाले UPI भुगतान पर ग्राहकों से MDR यानी Merchant Discount Rate नहीं लिया जाता। डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने लंबे समय से UPI को कम लागत अथवा शुल्क-मुक्त माध्यम बनाए रखने की नीति अपनाई है।
ऐसे में ₹2,000 से अधिक के भुगतान पर संभावित शुल्क की चर्चा ने राजनीतिक माहौल गर्म कर दिया है। हालांकि, जब तक सरकार की ओर से अंतिम निर्णय और स्पष्ट शुल्क संरचना सामने नहीं आती, तब तक इसे लागू नियम मानना सही नहीं होगा।











































