
तेहरान। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच होर्मुज़ जलडमरूमध्य के पास एक ईरानी वाणिज्यिक जहाज को निशाना बनाए जाने की घटना सामने आई है। ईरानी अधिकारियों के मुताबिक, हमले में एक व्यक्ति की मौत हो गई, जबकि तीन अन्य घायल हुए हैं। इस घटना के बाद क्षेत्र में तनाव और वैश्विक तेल एवं गैस आपूर्ति को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं।
ईरानी सरकारी टेलीविजन के अनुसार, केशम शहर के गवर्नर अमीर तैमूरी ने बताया कि रविवार सुबह करीब 5 बजे हेंगाम और केशम द्वीपों के बीच एक वाणिज्यिक जहाज पर हमला हुआ। हमले में एक व्यक्ति की मौत हुई और तीन लोग घायल हुए। हालांकि, अधिकारियों ने फिलहाल हमले के स्रोत को लेकर कोई स्पष्ट जानकारी नहीं दी है।
यूनाइटेड किंगडम मैरीटाइम ट्रेड ऑपरेशन्स ने भी घटना की पुष्टि करते हुए बताया कि जलडमरूमध्य से गुजर रहे एक जहाज पर प्रक्षेप्य से हमला किया गया। संगठन ने घटना से जुड़ी अन्य विस्तृत जानकारी साझा नहीं की है। अमेरिकी सेना की ओर से भी तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई।
केशम द्वीप के आसपास कई धमाकों की खबर
होर्मुज़ जलडमरूमध्य के सबसे बड़े द्वीप केशम के आसपास रातभर कई धमाकों की आवाजें सुनाई देने की खबर है। रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण इस समुद्री मार्ग पर तनाव ऐसे समय में बढ़ा है, जब ईरान और खाड़ी देशों के बीच ओमान में बातचीत प्रस्तावित है।
होर्मुज़ जलडमरूमध्य दुनिया में तेल और गैस की आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग माना जाता है। ऐसे में यहां किसी भी तरह की सैन्य गतिविधि या जहाजों की आवाजाही में रुकावट का असर अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार पर पड़ सकता है।
ईरान-अमेरिका टकराव में होर्मुज़ बना बड़ा मुद्दा
ईरान और अमेरिका के बीच पिछले छह महीनों से जारी टकराव में होर्मुज़ जलडमरूमध्य का नियंत्रण प्रमुख विवादों में शामिल हो गया है। 28 फरवरी को अमेरिका और इजराइल की ओर से किए गए हमलों के बाद ईरान ने इस समुद्री मार्ग पर अपनी गतिविधियां बढ़ा दी थीं।
ईरान सुरक्षा और संप्रभुता से जुड़ी चिंताओं का हवाला देते हुए जहाजों को जलडमरूमध्य से गुजरने से पहले अनुमति लेने की व्यवस्था लागू करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। इसके साथ ही जहाजों से सेवा शुल्क लिए जाने के विकल्प पर भी विचार किया जा रहा है।
इन परिस्थितियों के बीच होर्मुज़ जलडमरूमध्य में किसी जहाज पर हमला क्षेत्रीय तनाव को और बढ़ा सकता है। साथ ही, दुनिया की तेल और गैस आपूर्ति पर इसके संभावित प्रभाव को लेकर भी चिंता बढ़ गई है।











































