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कानपुर बाढ़ पीड़ितों को एक्सपायरी कफ सिरप देने का आरोप, यूपी स्वास्थ्य विभाग ने नकारा

कानपुर में बाढ़ पीड़ितों को बांटी गई कफ सिरप की बोतल

नई दिल्ली: उत्तर प्रदेश के कानपुर जिले में बाढ़ पीड़ितों के बीच राज्य स्वास्थ्य विभाग की ओर से बांटी गई कफ सिरप की बोतलों को लेकर राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है. इन बोतलों पर जुलाई 2026 की एक्सपायरी डेट दर्ज है. कुछ स्थानीय लोगों ने दावा किया है कि परिवार के सदस्यों को यह सिरप देने के बाद उन्हें बुखार और जी मिचलाने जैसी शिकायतें हुईं.

इंडिया टुडे की एक रिपोर्ट के मुताबिक, 7 सितंबर को उत्तर प्रदेश स्वास्थ्य विभाग की एक टीम ने कानपुर के मायापुरम इलाके में कम से कम 20 परिवारों को कफ सिरप की बोतलें बांटी थीं. बाढ़ पीड़ितों की मदद के लिए राज्य सरकार की ओर से चलाए जा रहे अभियान के तहत ये दवाएं बांटी गई थीं. पांडु नदी में आई बाढ़ से कानपुर और कानपुर देहात के कुछ इलाकों में करीब 40,000 लोग प्रभावित हुए हैं.

स्थानीय निवासी मीना बी ने समाचार चैनलों से बातचीत में कहा, ‘मैंने अपने बेटे को कफ सिरप दिया तो कुछ ही समय बाद उसे बुखार हो गया और उसने पेचिश की शिकायत की. जब हम उसे डॉक्टर के पास ले गए, तब हमें पता चला कि उसे दी गई दवा की एक्सपायरी डेट निकल चुकी थी.’

मीना बी ने कहा, ’24 घंटे बाद स्वास्थ्य विभाग की वही टीम वापस आई और 100 रुपये के बदले कफ सिरप की बोतल वापस मांगने लगी. अगर मेरे बच्चे को कुछ हो जाता तो इन पैसों का क्या फायदा होता?’

मायापुरम के लोगों को बांटी गई दवा 50 मिलीलीटर की बोतल में थी. इस पर ‘Trimethoprim and Sulphamethoxazole Oral Suspension IP’ लिखा था और उत्तर प्रदेश सरकार का लेबल लगा था. इसे उत्तराखंड के रुद्रपुर स्थित मैक्सकेम फार्मास्यूटिकल्स प्राइवेट लिमिटेड ने बनाया था.

बोतल के पीछे लगे लेबल के मुताबिक, दवा का निर्माण अगस्त 2024 में हुआ था, जबकि इसकी एक्सपायरी डेट जुलाई 2026 दर्ज थी.

एक अन्य स्थानीय महिला नानकी ने पत्रकारों से कहा, ‘जब से यह दवा बांटी गई है, मुझे बुखार है. मुझे नहीं पता कि क्या हुआ, लेकिन मेरा पोता भी बुखार से पीड़ित है.’

हालांकि, कानपुर के मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) हरि दत्त नेमी ने स्वास्थ्य विभाग द्वारा यह कफ सिरप बांटे जाने के आरोपों से इनकार किया है. कानपुर में मीडिया से बातचीत में उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य विभाग के ड्रग वेयरहाउस की जांच के दौरान यह पुष्टि हुई कि संबंधित दवा जुलाई 2025 में विभाग के स्टॉक का हिस्सा थी और मांग के आधार पर इसे कुछ सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों के जरिए वितरित किया गया था.

हालांकि, नेमी ने कहा कि हाल में वितरित की गई दवा उनके मौजूदा स्टॉक का हिस्सा नहीं है और संबंधित बैच नंबर भी वर्तमान स्टॉक में मौजूद नहीं है.

नेमी ने स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों द्वारा कफ सिरप की बोतल वापस लेने के बदले पैसे देने के आरोप से भी इनकार किया. द वायर ने मीना बी और नानकी के आरोपों के संबंध में सीएमओ हरि दत्त नेमी से संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन उनके फोन का जवाब नहीं मिला.

कांग्रेस ने भाजपा पर साधा निशाना

इस बीच कांग्रेस ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी पर निशाना साधा और कथित तौर पर ‘जानलेवा सिरप’ बांटे जाने का आरोप लगाया.

कांग्रेस के आधिकारिक एक्स हैंडल से कहा गया, ‘यह पहली बार नहीं है जब ऐसा हुआ है. इससे पहले अवैध कोडीन वाली कफ सिरप भी इसी सरकार की नाक के नीचे बेची जा रही थी और पूरा सिस्टम सो रहा था.’
दिसंबर 2025 में उत्तर प्रदेश पुलिस ने कथित 1,000 करोड़ रुपये के अवैध कोडीन आधारित कफ सिरप घोटाले के सिलसिले में कई जगहों पर छापेमारी की थी.

कांग्रेस प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत ने इससे पहले आरोप लगाया था कि इस मामले के मुख्य आरोपी शुभम जायसवाल के जनता दल (यूनाइटेड) के राष्ट्रीय महासचिव और सत्तारूढ़ गठबंधन के सहयोगी धनंजय सिंह से करीबी संबंध हैं.

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