
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच हुई अहम द्विपक्षीय बातचीत के बीच भारत-चीन सीमा को लेकर महत्वपूर्ण जानकारी सामने आई है। रक्षा मंत्रालय के अनुसार, वर्ष 2025 में वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) के उत्तरी हिस्सों में चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) की तैनाती में उल्लेखनीय कमी दर्ज की गई है। हालांकि, भारत इसे सीमा पर खतरा पूरी तरह समाप्त होने के संकेत के रूप में नहीं देख रहा है।
रक्षा मंत्रालय के मुताबिक, LAC और चीन के पारंपरिक प्रशिक्षण क्षेत्रों में अब भी कंबाइंड आर्म्स ब्रिगेड स्तर की करीब 10 चीनी सैन्य टुकड़ियां मौजूद हैं। ऐसे में चीन की ओर से सैनिकों की संख्या कम किए जाने के बावजूद सीमा पर उसकी सैन्य क्षमता बनी हुई है। भारत ने इसी को ध्यान में रखते हुए LAC के सभी प्रमुख क्षेत्रों में अपनी सैन्य तैयारियों और निगरानी को मजबूत बनाए रखा है।
सैन्य तैनाती में कमी के साथ बढ़ा संवाद
चीन की सैन्य तैनाती में कमी ऐसे समय में सामने आई है, जब दोनों देशों के बीच राजनीतिक, कूटनीतिक और सैन्य स्तर पर बातचीत भी आगे बढ़ी है। वर्ष 2025 में भारत और चीन के बीच सीमा मामलों को लेकर परामर्श एवं समन्वय तंत्र की 33वीं और 34वीं बैठक मार्च तथा जुलाई में हुई। इसके अलावा दोनों देशों के विशेष प्रतिनिधियों के बीच सीमा विवाद को लेकर बातचीत भी दोबारा शुरू हुई।
दिसंबर 2024 और अगस्त 2025 में हुई विशेष प्रतिनिधि स्तर की वार्ताओं के जरिए सीमा मुद्दे पर राजनीतिक संवाद को भी आगे बढ़ाया गया। इससे सीमा विवाद केवल सैन्य अधिकारियों के बीच बातचीत तक सीमित नहीं रहा, बल्कि दोनों देशों के राजनीतिक स्तर पर भी चर्चा का सिलसिला जारी रहा।
मोदी की चीन यात्रा के बाद रिश्तों में नई हलचल
अगस्त 2025 में शंघाई सहयोग संगठन के शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की चीन यात्रा को भारत-चीन संबंधों में स्थिरता की दिशा में अहम कदम माना गया। इसके बाद दोनों देशों के बीच सैन्य संवाद भी जारी रहा। अक्टूबर 2025 में पूर्वी लद्दाख में कोर कमांडर स्तर की 23वीं बैठक हुई। सीमा के अलग-अलग क्षेत्रों में दोनों देशों के सैनिकों के बीच होने वाली बैठकें भी अपेक्षाकृत शांतिपूर्ण माहौल में जारी रहीं।
हालांकि, सीमा पर तनाव में कमी के बावजूद भारत अपनी सैन्य तैयारी को कमजोर करने के पक्ष में नहीं है। गलवान घाटी की घटना के बाद भारत ने LAC पर सैनिकों की तैनाती, सड़क और अन्य सैन्य ढांचे तथा निगरानी व्यवस्था को काफी मजबूत किया है।
चीन की सेना कम होना भारत के लिए राहत, लेकिन चौकसी में कमी नहीं
LAC पर चीनी सैनिकों की संख्या में कमी को निश्चित रूप से तनाव घटने के संकेत के तौर पर देखा जा सकता है, लेकिन भारत इसे स्थायी बदलाव मानकर अपनी सुरक्षा व्यवस्था में ढील नहीं देना चाहता। भारत की रणनीति सीमा पर मजबूत सैन्य स्थिति बनाए रखने के साथ-साथ चीन के साथ राजनीतिक और कूटनीतिक संवाद को आगे बढ़ाने की है।
यही वजह है कि एक ओर सीमा पर भारतीय सेना की पर्याप्त मौजूदगी बनी हुई है, वहीं दूसरी ओर दोनों देशों के बीच बातचीत का रास्ता भी खुला रखा गया है। भारत का रुख स्पष्ट है कि सीमा पर शांति और स्थिरता जरूरी है, लेकिन सुरक्षा तैयारियों से कोई समझौता नहीं किया जाएगा।
मोदी-जिनपिंग की 50 मिनट से ज्यादा चली बातचीत अहम
इसी बीच ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच 50 मिनट से अधिक समय तक द्विपक्षीय बातचीत हुई। इस मुलाकात को दोनों देशों के संबंधों के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
बैठक के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने भारत और चीन के बीच द्विपक्षीय सहयोग से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की। वहीं शी जिनपिंग ने दोनों देशों के संबंधों को रणनीतिक और दीर्घकालिक दृष्टिकोण से देखने तथा साझा विकास के लिए मिलकर काम करने पर जोर दिया।
भारत और चीन दोनों ही वैश्विक स्तर पर प्रभावशाली देश हैं। ऐसे में बदलते अंतरराष्ट्रीय समीकरणों के बीच दोनों देशों के बीच संबंधों में स्थिरता का महत्व और बढ़ जाता है।
सीमा पर शांति के साथ सुरक्षा भी प्राथमिकता
भारत के लिए सीमा पर तनाव कम होना महत्वपूर्ण है, लेकिन इसका मतलब चीन पर पूरी तरह भरोसा करके सैन्य तैयारी कम करना नहीं है। नई दिल्ली की नीति फिलहाल प्रतिस्पर्धा और सहयोग दोनों को संतुलित रखने की दिखाई देती है।
यदि LAC पर चीन की सैन्य तैनाती में कमी आगे भी बनी रहती है और सीमा पर उसका व्यवहार शांतिपूर्ण रहता है, तो दोनों देशों के बीच आर्थिक तथा रणनीतिक संबंधों को आगे बढ़ाने की संभावनाएं मजबूत हो सकती हैं। लेकिन भारत के लिए वास्तविक भरोसे का आधार केवल बातचीत या बयानों को नहीं, बल्कि सीमा पर चीन के व्यवहार को माना जाएगा।
फिलहाल स्थिति यही है कि चीन ने LAC के कुछ हिस्सों में अपनी सैन्य मौजूदगी कम की है, लेकिन भारत ने अपनी चौकसी और सैन्य तैयारी में कोई ढील नहीं दी है। बातचीत के रास्ते खुले हैं, लेकिन सीमा सुरक्षा भारत की प्राथमिकता बनी हुई है।











































