
विंध्यभूमि/भोपाल। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) अब मध्य प्रदेश में नई पीढ़ी के युवाओं के बीच अपनी पहुंच बढ़ाने की तैयारी में है। जेन-जी और जेन-अल्फा को केंद्र में रखते हुए संघ ने प्रदेश के प्रमुख शहरों में युवा संवाद कार्यक्रम आयोजित करने की रणनीति बनाई है। इसी कड़ी में 20 सितंबर को भोपाल में संघ के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबले युवाओं से सीधे संवाद करेंगे। इसके अलावा इंदौर, जबलपुर और ग्वालियर में भी संघ के वरिष्ठ पदाधिकारियों के स्तर पर इसी तरह के कार्यक्रम आयोजित किए जाने की तैयारी है।
संघ की इस पहल को नई पीढ़ी के साथ सीधे संवाद स्थापित करने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है। डिजिटल दौर में युवाओं की सोच, सामाजिक सरोकार और संवाद के तरीके तेजी से बदल रहे हैं। सोशल मीडिया, इंटरनेट और तकनीक के साथ बड़ी हो रही जेन-जी और जेन-अल्फा की प्राथमिकताएं पिछली पीढ़ियों से अलग हैं। ऐसे में संघ अब युवाओं के बीच सीधे पहुंचकर उनके विचार और सवाल समझने पर जोर दे रहा है।
नई पीढ़ी के बीच संवाद बढ़ाने की रणनीति
अब तक आरएसएस की गतिविधियों का बड़ा हिस्सा संगठन विस्तार, सामाजिक संपर्क, सेवा कार्यों और विभिन्न सामाजिक क्षेत्रों में सक्रियता के इर्द-गिर्द रहा है। हालांकि, नई पीढ़ी की बदलती सोच और डिजिटल प्लेटफॉर्म पर उसकी बढ़ती सक्रियता को देखते हुए युवा संवाद को भी प्राथमिकता दी जा रही है।
संघ की योजना केवल युवाओं तक अपने विचार पहुंचाने तक सीमित नहीं है। संवाद कार्यक्रमों के माध्यम से युवाओं की राय, सवाल, शिकायतें और उनके अनुभवों को समझने की कोशिश भी की जाएगी। शिक्षा, रोजगार, तकनीक, सामाजिक बदलाव और भविष्य से जुड़े मुद्दे युवाओं के साथ चर्चा का हिस्सा बन सकते हैं।
भोपाल में दत्तात्रेय होसबले करेंगे संवाद
मध्य प्रदेश में इस अभियान की शुरुआत भोपाल से होने जा रही है। 20 सितंबर को सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबले युवाओं के साथ संवाद करेंगे। इसके बाद इंदौर, जबलपुर और ग्वालियर में भी संघ के वरिष्ठ पदाधिकारियों के स्तर पर युवा संवाद कार्यक्रम आयोजित करने की तैयारी है।
प्रदेश के इन चार प्रमुख शहरों में अलग-अलग क्षेत्रों से जुड़े युवाओं को संवाद कार्यक्रमों से जोड़ने की योजना है। इसमें शिक्षा, रोजगार, तकनीक, सामाजिक क्षेत्र और अन्य क्षेत्रों से जुड़े युवाओं की भागीदारी पर जोर दिया जा सकता है।
केवल भाषण नहीं, युवाओं के सवाल भी सुने जाएंगे
युवा संवाद कार्यक्रमों की सबसे महत्वपूर्ण बात यह मानी जा रही है कि इसमें संघ के पदाधिकारी केवल अपना पक्ष रखने के बजाय युवाओं की बात सुनने पर भी जोर देंगे। युवाओं की मौजूदा चुनौतियों और उनके नजरिए को समझना इस पहल का अहम हिस्सा होगा।
युवाओं से यह जानने की कोशिश की जा सकती है कि वे शिक्षा और रोजगार के क्षेत्र में किन समस्याओं का सामना कर रहे हैं। तकनीक और सोशल मीडिया ने उनके जीवन को किस तरह प्रभावित किया है और सामाजिक बदलावों को लेकर उनकी क्या सोच है, इन विषयों पर भी बातचीत की संभावना है।
संघ से जुड़े लोगों का मानना है कि नई पीढ़ी के साथ प्रभावी संपर्क के लिए सिर्फ विचार रखना पर्याप्त नहीं है। यह समझना भी जरूरी है कि युवा किन मुद्दों को प्राथमिकता देते हैं और वर्तमान सामाजिक एवं राजनीतिक परिस्थितियों को किस नजरिए से देखते हैं।
दिल्ली के घटनाक्रम के बाद संवाद पर जोर
दिल्ली में जेन-जी से जुड़े प्रदर्शन के बाद युवाओं के बीच संवाद बढ़ाने की पहल को गति मिलने की बात सामने आई है। दिल्ली, मुंबई और नागपुर सहित विभिन्न शहरों में संवाद कार्यक्रमों के बाद अब इस अभियान को देश के अन्य हिस्सों तक ले जाने की योजना बताई जा रही है।
संघ से जुड़े सूत्रों के मुताबिक आने वाले समय में देश के करीब 150 से 200 शहरों में युवाओं के बीच संवाद कार्यक्रम आयोजित करने की योजना है। मध्य प्रदेश को भी इसी व्यापक अभियान का हिस्सा बनाया गया है।
युवाओं की राय से तय हो सकती है आगे की दिशा
संघ की इस पहल का एक उद्देश्य नई पीढ़ी के साथ सामाजिक संपर्क को मजबूत करना भी माना जा रहा है। युवाओं की शिकायतों, सुझावों और प्राथमिकताओं को समझकर भविष्य के कार्यक्रमों की दिशा तय करने में मदद मिल सकती है।
मध्य प्रदेश के भोपाल, इंदौर, जबलपुर और ग्वालियर में प्रस्तावित कार्यक्रम इस लिहाज से महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं। खास तौर पर भोपाल में दत्तात्रेय होसबले की मौजूदगी से कार्यक्रम को संगठन की प्राथमिकता से जोड़कर देखा जा रहा है।
अब देखना होगा कि इन युवा संवाद कार्यक्रमों में जेन-जी और जेन-अल्फा की ओर से किस तरह के सवाल सामने आते हैं और संघ उनकी चिंताओं एवं सुझावों को अपनी आगामी सामाजिक गतिविधियों में किस तरह शामिल करता है।






















