
विंध्यभूमि/सीधी| भारतीय अक्षय ऊर्जा दिवस के अवसर पर प्रधानमंत्री कॉलेज ऑफ एक्सीलेंस, संजय गांधी स्मृति शासकीय स्नातकोत्तर स्वशासी महाविद्यालय, सीधी में ऊर्जा संरक्षण और अक्षय ऊर्जा के प्रति जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से विविध कार्यक्रम आयोजित किए गए। कार्यक्रम में विद्यार्थियों को अक्षय ऊर्जा के महत्व, उसके विभिन्न स्रोतों तथा ऊर्जा संरक्षण की आवश्यकता से अवगत कराया गया।
कार्यक्रम का विषय परिचय डॉ. बृजेश सिंह चौहान ने कराया। इस दौरान ‘प्राचीन ग्रंथों में अक्षय ऊर्जा से संबंधित उपबंध’ विषय पर विशेषज्ञों ने अपने विचार व्यक्त किए। डॉ. उमाकांत साहू, सहायक प्राध्यापक रसायन विज्ञान, ने अक्षय ऊर्जा के विभिन्न स्रोतों की जानकारी देते हुए कहा कि वर्तमान समय में अक्षय ऊर्जा पर गंभीरता से विचार करना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि यदि समय रहते ऊर्जा संरक्षण और वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों के प्रति जागरूकता नहीं बढ़ाई गई तो भविष्य में गंभीर ऊर्जा संकट का सामना करना पड़ सकता है।
डॉ. सत्य प्रकाश शुक्ला ने कहा कि अक्षय ऊर्जा हम सभी की महत्वपूर्ण पूंजी है। इसे सहेजना, संरक्षित करना और इसका विवेकपूर्ण उपयोग करना हम सभी की जिम्मेदारी है।
कार्यक्रम के दौरान भारतीय ऋषि-मुनियों द्वारा अक्षय ऊर्जा के उत्पादन एवं संरक्षण की अवधारणा पर केंद्रित लघु चलचित्र एवं चित्र प्रदर्शनी भी आयोजित की गई। इसके माध्यम से विद्यार्थियों को भारतीय ज्ञान परंपरा में प्रकृति, ऊर्जा और संसाधनों के संरक्षण से जुड़े विचारों की जानकारी दी गई।
विद्यार्थियों की रचनात्मक सहभागिता के लिए ‘भारतीय ज्ञान परंपरा एवं अक्षय ऊर्जा’ विषय पर निबंध प्रतियोगिता आयोजित की गई। प्रतियोगिता में विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। प्रतिभागी विद्यार्थियों को प्रमाण-पत्र प्रदान किए गए।

महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. के.एस. नेताम ने कहा कि वर्तमान समय में ऊर्जा संरक्षण और स्वच्छ ऊर्जा के प्रति जागरूकता अत्यंत आवश्यक है। विद्यार्थियों को अक्षय ऊर्जा के महत्व से जोड़ना भविष्य के लिए जिम्मेदार और पर्यावरण-संवेदनशील समाज के निर्माण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
कार्यक्रम के अंत में शिक्षकों एवं विद्यार्थियों ने ऊर्जा संरक्षण तथा अक्षय ऊर्जा के विवेकपूर्ण उपयोग का संकल्प लिया। कार्यक्रम के माध्यम से विद्यार्थियों को ऊर्जा के संयमित उपयोग, संरक्षण तथा अक्षय ऊर्जा स्रोतों को अपनाने के लिए प्रेरित किया गया। महाविद्यालय की इस पहल को भारतीय ज्ञान परंपरा और आधुनिक ऊर्जा संरक्षण की अवधारणाओं के समन्वय की दिशा में महत्वपूर्ण प्रयास बताया गया।
कार्यक्रम का आभार प्रदर्शन डॉ. विद्याचरण द्विवेदी ने किया। इस अवसर पर डॉ. राममिलन प्रजापति, डॉ. गंगा देवी बैरागी, डॉ. उमेश कुमार विश्वकर्मा, डॉ. आकांक्षा मिश्रा, डॉ. विभा कुशवाहा, डॉ. रश्मि शर्मा, डॉ. विदुषी मिश्रा, डॉ. शांति पटेल सहित महाविद्यालय के प्राध्यापक एवं बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।





























