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पेंशन-अनुकंपा नौकरी को मुआवजे से घटाया तो देना होगा ज्यादा पैसा,हाईकोर्ट का बड़ा फैसला…

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विंध्यभूमि,मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय की एकल पीठ ने सडक़ दुर्घटना मुआवजा मामले में महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए स्पष्ट किया है कि मृतक कर्मचारी के आश्रित को मिली अनुकंपा नियुक्ति और पत्नी को मिलने वाली पारिवारिक पेंशन को दुर्घटना मुआवजे की राशि से घटाया नहीं जा सकता। न्यायमूर्ति अमित सेठ की पीठ ने मुरैना के चतुर्थ अतिरिक्त मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण के वर्ष 2012 के आदेश को संशोधित करते हुए मुआवजे की राशि 6.60 लाख रुपये से बढ़ाकर 17,96,627 रुपये कर दी। इससे पीडि़त परिवार को 11,36,627 रुपये अतिरिक्त मिलेंगे।

सडक़ हादसे में हुई थी कृषि अधिकारी की मौत

मामला राजमाता विजयाराजे सिंधिया कृषि विश्वविद्यालय, ग्वालियर में पदस्थ कृषि विस्तार अधिकारी अतिबल सिंह से जुड़ा है। 21 फरवरी 2009 को अतिबल सिंह उत्तर प्रदेश के शाहाबाद से कार से लौट रहे थे। मुरैना जिले में एबी रोड पर रामपुरा गांव के पास तेज रफ्तार ट्रैक्टर ने उनकी कार को टक्कर मार दी। हादसे में गंभीर रूप से घायल अतिबल सिंह को पहले मुरैना और ग्वालियर में उपचार दिया गया। बाद में उन्हें एम्स दिल्ली के ट्रॉमा सेंटर में भर्ती कराया गया, जहां 27 फरवरी 2009 को इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। मृतक का मासिक वेतन करीब 18,981 रुपये था। मुरैना के क्लेम ट्रिब्यूनल ने मुआवजा तय करते समय मृतक के एक बेटे को मिली अनुकंपा नियुक्ति और पत्नी को मिल रही पारिवारिक पेंशन को भी ध्यान में रखा। इसके चलते मुआवजे की राशि घटाकर केवल 6.60 लाख रुपये निर्धारित की गई थी। इस आदेश के खिलाफ मृतक की पत्नी अन्नपूर्णा और उनके बेटों ने उच्च न्यायालय में अपील दायर की थी।

सेवा लाभ को मुआवजे से नहीं जोड़ा जा सकता

उच्च न्यायालय ने सुनवाई के दौरान कहा कि अनुकंपा नियुक्ति और पारिवारिक पेंशन कर्मचारी की सेवा शर्तों के तहत मिलने वाले लाभ हैं। इनका दुर्घटना के लिए जिम्मेदार पक्ष की ओर से दिए जाने वाले मुआवजे से कोई संबंध नहीं है। इसलिए इन लाभों को मोटर दुर्घटना मुआवजे की राशि से घटाया नहीं जा सकता। पीठ ने शीर्ष अदालत के बीरेंद्र मामले का भी संदर्भ दिया और कहा कि आश्रित बेटे के बालिग या कमाने वाले होने के आधार पर भी उन्हें हर स्थिति में क्लेम के अधिकार से बाहर नहीं किया जा सकता। हादसे के समय अतिबल सिंह की उम्र 59 वर्ष थी। अदालत ने उनकी आय की गणना में 15 प्रतिशत भविष्य की संभावनाएं जोड़ीं और नौ का गुणांक लागू किया।

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