
विंध्यभूमि/सिंगरौली। सिंगरौली जिले के चितरंगी क्षेत्र के एक गांव में निजी तौर पर एक महिला पर अपवित्रता का मामला सामने आया है। ग्राम बसही निवासी 35 साल की महिला पर एआरएमपी डॉक्टर पर इलाज का गंभीर आरोप है। महिला के अनुसार बुखार और शरीर में जलन की शिकायत होने पर इलाज के लिए वह गांव में ही डॉक्टर के पास गई थी। आरोप है कि इलाज के दौरान उसके दो इंजेक्शन और कुछ ग्रेड दिए गए हैं।
महिला का कहना है कि इलाज के बाद खास तौर पर बुखार में राहत महसूस हुई, लेकिन इसके बाद उसके शरीर में आराम मिलना शुरू हो गया। महिला को इंजेक्शन और इंजेक्शन देने के बाद उसके शरीर में सूजन आ गई, नाक के अंदर सूजन जैसी समस्या हो गई और पेट में दर्द भी शुरू हो गया। एक महिला पर धीरे-धीरे बढ़ी परेशानी, एक डॉक्टर के पास दर्ज कराई शिकायत का आरोप।
कंपनी में शामिल होने का आरोप
महिला का आरोप है कि जब इलाज के बाद उसकी तबीयत खराब हो गई और वह फिल्म डॉक्टर के पास गई तो कथित तौर पर उसे वहां से भगा दिया गया। इसके बाद महिला ने अपने पति के साथ चितरंगी थाने पर केस की शिकायत पुलिस से की।
शिकायत के बाद पुलिस ने मामले पर मुहर लगाने के बाद महिला का मेडिकल परीक्षण करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। पुलिस के अनुसार मेडिकल रिपोर्ट और जांच के दौरान सामने आने वाले दोषियों के आधार पर वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।
मेडिकल रिपोर्ट से स्पष्ट होगी स्थिति
महिला द्वारा लगाए गए आरोप लॉज फाइल और उसके बयानों पर आधारित हैं। डॉक्टर के सहयोगियों की स्वतंत्र पुष्टि अभी तक नहीं हुई है। महिला की कमजोरी का असली कारण क्या है, यह मेडिकल जांच और रिपोर्ट के बाद सामने आया है।
पुलिस की जांच में यह भी महत्वपूर्ण होगा कि महिला को कौन-कौन सी ब्लीडिंग दी गई, किसे इंजेक्शन लगाया गया और उपचार के बाद स्वास्थ्य संबंधी शास्त्रीय सूत्र का उनके साथ कोई संबंध है या नहीं। इन सभी दस्तावेजों की जांच के बाद ही मामले की वास्तविक स्थिति सामने आएगी।
ग्रामीण क्षेत्र में निजी उपचार प्रश्न
घटना के बाद ग्रामीण क्षेत्र में निजी तौर पर इलाज करने वाले लोगों की योग्यता, रजिस्टर और स्वास्थ्य विभाग की निगरानी को लेकर सवाल उठते हैं। रीटेल का कहना है कि क्षेत्र में बड़ी संख्या में लोग सामान्य बीमारी वाले होते हैं और स्थानीय स्तर पर ही उपचारात्मक दवाएँ बनाई जाती हैं। ऐसे में उपचार करने वाले व्यक्ति की योग्यता और वैधानिक प्रमाण की जानकारी मरीज की सुरक्षा के लिए अत्यंत आवश्यक है।
समीक्षा में कहा गया है कि यदि किसी व्यक्ति विशेष द्वारा निर्धारित योग्यता या आवश्यकता के बिना किसी मरीज का इलाज किया जा रहा है तो स्वास्थ्य विभाग को ऐसे मामलों की नियमित जांच करानी चाहिए। विशेष रूप से इंजेक्शन और अन्य इलेक्ट्रॉनिक्स प्लांट के उपयोग पर लेज़र डिवीजन पर निगरानी रखना आवश्यक है, ताकि किसी भी मरीज की जान जोखिम में न पड़े।
स्वास्थ्य विभाग की निगरानी पर भी प्रश्न
चितरंगी क्षेत्र में इस मामले को लेकर स्वास्थ्य विभाग की निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल उठाए गए हैं। पुनर्वितरण का कहना है कि निजी स्तर पर संचालित होटलों और ग्रामीण क्षेत्रों में चिकित्सा सेवा लोगों को समय-समय पर प्रदान की जानी चाहिए।
यदि संबंधित व्यक्ति के पास उपचार के लिए योग्यता और पंजीकरण आवश्यक है तो उसकी पुष्टि भी जांच के दौरान होनी चाहिए। साथ ही यदि किसी मामले का उल्लंघन पाया जाता है तो उचित कार्रवाई की जानी चाहिए। इससे न सिर्फ भर्ती की सुरक्षा सुनिश्चित होगी, बल्कि ग्रामीण क्षेत्र में चिकित्सा व्यवस्था को लेकर लोगों का भरोसा भी मजबूत होगा।
जांच के बाद सामने आई सच्चाई
अल्ट्रासाउंड पुलिस द्वारा महिला की शिकायत के आधार पर मेडिकल परीक्षण और मामले की जांच जारी है। महिला की ओर से दिए गए सहयोगियों की पुष्टि मेडिकल रिपोर्ट, पुलिस जांच और अन्य उपलब्ध साक्ष्य के आधार पर हो सकती है।
अब देखिए मेडिकल रिपोर्ट में क्या तथ्य सामने आए हैं और पुलिस जांच में क्या निष्कर्ष निकाला गया है। साथ ही यह भी महत्वपूर्ण होगा कि स्वास्थ्य विभाग ग्रामीण क्षेत्र में निजी तौर पर उपचार करने वाले लोगों की योग्यता और पंजीकरण की जांच के लिए क्या कदम उठाता है। यदि जांच में किसी भी तरह का खिलाफ या आपराधिक उल्लंघन सामने आता है तो संबंधित व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई की उम्मीद की जाती है।






















