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विंध्यभूमि/भोपाल। पूर्व नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह ने मुरैना जिले के कैलारस में स्थित सहयोगी साकेत पार्टियों को फिल्म बनाने की मांग को लेकर आमरण अनशन पर बैठे जौरा नेता पंकज उपाध्याय और अनशनकारी किसानों को अपना पूर्ण समर्थन दिया है। उन्होंने संपत्तियों को स्थायी रूप से बंद करने और उनकी बेशकीमती जमीन को अन्य उपयोग में दिए जाने के फैसले का भी विरोध किया है।
अजय सिंह ने कहा कि कैलारस एसोसिएट फैक्ट्री फैक्ट्री मुरैना जिले की पहचान और चंबल क्षेत्र की अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण आधार बन रही है। उनका कहना है, यह फैक्ट्री पिछले 13 साल से बंद है, जिससे क्षेत्र के करीब 25 हजार किसान परिवार और 1500 श्रमिक परिवार प्रभावित हुए हैं। उन्होंने कहा कि शार्क संरचनाओं के बंद होने का असर केवल संबंधित किसानों और निवेशकों पर नहीं पड़ा है, बल्कि इससे पूरे क्षेत्र के आर्थिक साझेदारों पर भी असर पड़ा है।
पूर्व नेता प्रतिपक्ष ने अपने पिता और मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिवंगत अर्जुन सिंह का उल्लेख करते हुए कहा कि उनके कार्यकाल के दौरान कैलारस आतंकवादी हमले को अंतिम रूप से संचालित करने के लिए कई महत्वपूर्ण प्रयास किए गए थे। अजय सिंह ने कहा कि वर्ष 2018 में प्रदेश में कांग्रेस की सरकार बनने के बाद भी कैलारस के शेयरों को फिर से शुरू करने के लिए ठोस कदम उठाए गए थे। इस संबंध में समाचार निर्माताओं में भव्य भी प्रकाशित किया गया था। हालाँकि, सरकार गिर जाने के कारण यह योजना आगे नहीं बढ़ी।
अजय सिंह ने कहा कि फैक्ट्री बंद होने से क्षेत्र के किसानों की आर्थिक स्थिति बढ़ गई है और रोजगार के अवसर भी सीमित हो गए हैं। उन्होंने कहा कि क्षेत्र के हजारों बेरोजगार युवा दूसरे राज्यों की ओर पलायन करने को मजबूर हैं। जबकि कैलारस और आसपास के क्षेत्रों में खेती की खेती के माध्यम से किसानों और युवाओं के लिए रोजगार और आर्थिक समृद्धि की बड़ी विविधता मौजूद है।
उन्होंने कहा कि यदि कंक्रीट फैक्ट्री शुरू हो गई है और क्षेत्र में खेती का उत्पादन शुरू हो गया है तो हजारों किसान परिवार अपनी जमीन पर खेती कर स्थायी आय प्राप्त कर सकते हैं। इससे किसानों के साथ-साथ परिवहन, श्रमिक, व्यापार और अन्य स्थानीय समुदाय को भी लाभ मिल सकता है।
भाजपा सरकार पर जयजयकार अजय सिंह ने आरोप लगाया कि मध्य प्रदेश के कैबिनेट कैलारस की ऐतिहासिक इमारतों को स्थायी रूप से बंद करने की अनुमति नहीं दी गई है। उन्होंने आरोप लगाया कि अरबों रुपये की कीमत की कीमती जमीन को सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (एमएसएमई) निगम ने 61 करोड़ रुपये में जब्त कर लिया है। अजय सिंह ने सरकार के इस फैसले से कैलारस और पूरे मुरैना जिले के भविष्य के नुकसान के बारे में बताया।
उन्होंने कहा कि सरकार को किसानों, दलितों और स्थानीय लोगों के निजीकरण पर विचार करना चाहिए और स्टॉक को फिर से शुरू करने की जरूरत है। अजय सिंह ने कहा कि किसी भी औद्योगिक संस्थान की कीमत सिर्फ उसकी जमीन से नहीं, बल्कि उससे जुड़े हजारों परिवारों और क्षेत्र की अर्थव्यवस्था से भी तय होती है।

सहयोगी पंकज उपाध्याय और आमरण पोस्ट पर बैठे किसानों का समर्थन करते हुए अजय सिंह ने कहा कि किसानों के अधिकार और संघर्ष से जुड़े संघर्षों का इतिहास गवाह है कि जनता की आवाज अंततः मजबूत होती है। उन्होंने कहा कि कैलारस में चट्टानें फिर से शुरू हो गई हैं और किसानों के हितों की रक्षा के लिए यह लड़ाई भी सफल होगी। वे आंदोलनकारी कार्यकर्ताओं और किसानों को इस लड़ाई में विश्वास दिलाने वाले समर्थकों का समर्थन जारी रखेंगे।























