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सड़क तोड़ी, नियम भी तोड़े; अब 50 लाख का हिसाब देना होगा

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विंध्यभूमि सिंगरौली:– पुलिस लाइन के पास बैढ़न-तैलाई-मकरोहर सड़क मार्ग पर सीवरेज निर्माण के बाद सड़क क्षतिग्रस्त होने के मामले में नगर निगम प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। कलेक्टर श्री गौरव बैनल के निर्देश पर नगर निगम आयुक्त श्रीमती सविता प्रधान ने निर्माण एजेंसी मैसर्स एनवायर्ड प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड, कानपुर को कारण बताओ नोटिस जारी कर तीन दिवस के भीतर स्पष्टीकरण मांगा है। निगम प्रशासन ने करीब 50 लाख रुपये की क्षतिपूर्ति वसूली की कार्रवाई के संकेत दिए हैं।

अमृत 1.0 परियोजना के तहत सीवरेज पाइपलाइन डालने के बाद सड़क की परतवार बहाली और समतलीकरण निर्धारित तकनीकी मापदंडों के अनुरूप नहीं किए जाने का मामला सामने आया है। इसके चलते सड़क मार्ग क्षतिग्रस्त हो गया और आमजन की सुरक्षा पर भी खतरा उत्पन्न हुआ।

निगम प्रशासन के अनुसार उक्त सड़क मध्यप्रदेश रोड डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन (एमपीआरडीसी) के स्वामित्व में है। सड़क पर रोड क्रासिंग का कार्य संबंधित विभाग से पूर्व अनुमति लिए बिना किए जाने तथा निर्माण में गुणवत्ता संबंधी कमियां पाए जाने को गंभीरता से लिया गया है। निगम ने इसे अनुबंध की सामान्य शर्तों और निर्धारित तकनीकी नियमों का उल्लंघन माना है।

निगरानी व्यवस्था पर भी उठे सवाल

मामले में नगर निगम के कार्यपालन यंत्री संतोष पाण्डेय को भी कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। नोटिस में कहा गया है कि संबंधित निर्माण एजेंसी द्वारा एमपीआरडीसी की सड़क को क्रास करते समय आवश्यक अनुमति नहीं ली गई, जबकि कार्यपालन यंत्री द्वारा निर्माण कार्य का समुचित पर्यवेक्षण नहीं किया गया। साथ ही नियुक्त सहायक यंत्री और उपयंत्री पर अपेक्षित नियंत्रण नहीं रखने के कारण एजेंसी द्वारा मनमाने ढंग से कार्य किए जाने की स्थिति बनी।

इसी क्रम में प्रभारी सहायक यंत्री इंद्रवेश यादव, प्रभारी सहायक यंत्री अमिताभ यादव तथा उपयंत्री जितेंद्र कुमार को भी कारण बताओ नोटिस जारी किए गए हैं। सभी संबंधित अधिकारियों से तीन दिवस के भीतर जवाब मांगा गया है संतोषजनक जवाब नहीं मिला तो होगी कड़ी कार्रवाई निगम प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि निर्माण एजेंसी और संबंधित अधिकारियों से प्राप्त स्पष्टीकरण का परीक्षण किया जाएगा। यदि जवाब संतोषजनक नहीं पाया गया तो अनुबंध के प्रावधानों के तहत क्षतिपूर्ति राशि की वसूली के साथ अन्य नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। निर्माण एजेंसी के विरुद्ध आपराधिक प्रकरण दर्ज कराने की कार्रवाई भी की जा सकती है सड़क क्षतिग्रस्त होने से जहां सरकारी संपत्ति को आर्थिक नुकसान पहुंचने का अनुमान है, वहीं मार्ग से गुजरने वाले लोगों की सुरक्षा को लेकर भी सवाल खड़े हुए हैं अब देखना होगा कि जांच और स्पष्टीकरण की प्रक्रिया के बाद जिम्मेदारों पर निगम प्रशासन कितनी सख्ती से कार्रवाई करता है।

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