
Churhat News: नगर परिषद चुरहट की डीजल खरीदी पर सवाल, स्थानीय पंप छोड़ 24 किमी दूर से खरीद क्यों?
जनरेटर के नाम पर हर माह डीजल खरीदी का दावा, जबकि सूत्रों के मुताबिक लंबे समय से कबाड़ में पड़ा है जनरेटर; कलेक्टर और एसडीएम से रिकॉर्ड की जांच की मांग
चुरहट, सीधी। नगर परिषद चुरहट की डीजल खरीदी व्यवस्था को लेकर सवाल उठने लगे हैं। उपलब्ध दस्तावेज में रामपुर नैकिन स्थित कंधवार फिलिंग स्टेशन से नगर परिषद से संबंधित डीजल खरीदी का विवरण दर्ज होने की बात सामने आई है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि जब चुरहट में ही पेट्रोल पंप उपलब्ध हैं, तो नगर परिषद द्वारा लगभग 24 किलोमीटर दूर रामपुर नैकिन से डीजल क्यों खरीदा जा रहा है? इस व्यवस्था के पीछे की वजह जानने के लिए संबंधित अभिलेखों की जांच जरूरी मानी जा रही है।

Churhat News: सामने आई पर्चियों के विवरण के अनुसार, वर्ष 2026 की अलग-अलग तारीखों में लगभग 24 लीटर डीजल की खरीदी और करीब 101.15 रुपये प्रति लीटर की दर दर्ज दिखाई देती है। तीन प्रविष्टियों के आधार पर प्रत्येक खरीदी की राशि लगभग 3,034.50 रुपये बताई जा रही है। हालांकि, इन प्रविष्टियों के आधार पर वास्तविक भुगतान, खरीदे गए डीजल की मात्रा और उसके उपयोग की पुष्टि नगर परिषद के मूल रिकॉर्ड से किया जाना आवश्यक है।
Churhat News: जनरेटर के नाम पर डीजल खरीदी, लेकिन संचालन की स्थिति क्या है?
मामले में सबसे महत्वपूर्ण सवाल नगर परिषद में मौजूद जनरेटर की स्थिति को लेकर उठ रहा है। सूत्रों का दावा है कि परिसर में इनवर्टर की व्यवस्था होने के बावजूद जनरेटर संचालन के नाम पर नियमित रूप से डीजल खरीदा जा रहा है, जबकि संबंधित जनरेटर लंबे समय से उपयोग में नहीं है और कथित तौर पर कबाड़ की स्थिति में पड़ा है। हालांकि, जनरेटर की वास्तविक स्थिति और डीजल के उपयोग की स्वतंत्र पुष्टि होना अभी बाकी है।

यदि जनरेटर लंबे समय से बंद है, तो उसके नाम पर खरीदे जा रहे डीजल का उपयोग कहां हो रहा है? वहीं, यदि जनरेटर का संचालन किया जा रहा है, तो उसके चलने के घंटे, डीजल की खपत और रखरखाव का विवरण संबंधित रजिस्टरों में दर्ज होना चाहिए। इन सवालों का जवाब रिकॉर्ड की जांच से ही सामने आ सकता है।
Churhat News: बिल से लेकर डीजल की खपत तक हो मिलान
मामले की निष्पक्ष जांच के लिए नगर परिषद के पिछले एक से दो वर्षों के डीजल खरीदी और भुगतान संबंधी अभिलेखों की जांच आवश्यक है। प्रत्येक बिल का संबंधित वाहन या जनरेटर की लॉगबुक, डीजल स्टॉक रजिस्टर और वास्तविक खपत से मिलान कराया जाना चाहिए। इससे यह स्पष्ट हो सकेगा कि खरीदा गया डीजल किस कार्य में उपयोग हुआ और उसका रिकॉर्ड नियमानुसार संधारित किया गया या नहीं।
इसके अलावा, रामपुर नैकिन स्थित पेट्रोल पंप से खरीदी किए जाने के पीछे कोई अधिकृत निर्णय, अनुबंध अथवा स्वीकृति है या नहीं, इसकी भी जांच की जानी चाहिए। डीजल आपूर्ति के लिए निर्धारित प्रक्रिया, भुगतान की मंजूरी और संबंधित अधिकारियों की भूमिका की पड़ताल भी जरूरी है।
Churhat News: कलेक्टर और एसडीएम से जांच कराने की मांग
नगर परिषद के सार्वजनिक धन से होने वाली खरीदी में पारदर्शिता सुनिश्चित करना प्रशासन की जिम्मेदारी है। ऐसे में कलेक्टर सीधी और एसडीएम चुरहट से मांग की जा रही है कि मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए। जांच के दौरान पेट्रोल पंप की बिक्री पर्चियों, नगर परिषद के भुगतान अभिलेखों, डीजल स्टॉक रजिस्टर, जनरेटर लॉगबुक और संबंधित वाहनों के रिकॉर्ड का आपस में मिलान कराया जाए।
यदि जांच में डीजल खरीदी और उसके वास्तविक उपयोग के रिकॉर्ड में गंभीर अंतर मिलता है अथवा सरकारी राशि के दुरुपयोग की पुष्टि होती है, तो नियमानुसार जिम्मेदार अधिकारी-कर्मचारियों के विरुद्ध कार्रवाई की जानी चाहिए।
Churhat News: जांच के बाद ही स्पष्ट होगी वास्तविक स्थिति
फिलहाल उपलब्ध दस्तावेज और सूत्रों के दावों के आधार पर डीजल खरीदी की व्यवस्था को लेकर सवाल उठ रहे हैं, लेकिन इन्हें अपने आप में वित्तीय अनियमितता का प्रमाण नहीं माना जा सकता। वास्तविक स्थिति अधिकृत अभिलेखों और निष्पक्ष जांच के बाद ही स्पष्ट होगी। संबंधित नगर परिषद अधिकारियों एवं जनप्रतिनिधियों का पक्ष सामने आने पर उसे भी समाचार में शामिल किया जाना चाहिए।









































