टीकमगढ़ में लापरवाही के आरोप पर हुई थी कार्रवाई, डिवीजन बेंच ने निलंबन आदेश को गलत मानने से किया इनकार
टीकमगढ़। मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने टीकमगढ़ जिले के सहकारिता विभाग में पदस्थ डिप्टी रजिस्ट्रार एसपी कौशिक को राहत देने से इनकार करते हुए उनकी अपील खारिज कर दी है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के टीकमगढ़ प्रवास के दौरान कामकाज में लापरवाही और अनियमितताओं का मामला सामने आने के बाद कौशिक को निलंबित किया गया था। इस कार्रवाई को चुनौती देते हुए उन्होंने न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था।
जस्टिस विवेक रूसिया और जस्टिस बीपी शर्मा की डिवीजन बेंच ने मामले की सुनवाई करते हुए स्पष्ट किया कि मुख्यमंत्री राज्य के मुखिया के रूप में जनता के प्रति जवाबदेह होते हैं। मुख्यमंत्री के निर्देश पर सक्षम प्राधिकारी द्वारा जारी निलंबन आदेश को केवल इस आधार पर गलत नहीं ठहराया जा सकता।
जानकारी के अनुसार, एसपी कौशिक के खिलाफ 24 अगस्त 2026 को निलंबन आदेश जारी किया गया था। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के टीकमगढ़ दौरे के दौरान सहकारिता विभाग से जुड़ी अनियमितताएं और कार्यप्रणाली संबंधी शिकायतें सामने आई थीं। इन मामलों को संज्ञान में लेते हुए मुख्यमंत्री ने डिप्टी रजिस्ट्रार को निलंबित करने के निर्देश दिए थे।
निलंबन आदेश के खिलाफ कौशिक ने पहले हाईकोर्ट की सिंगल बेंच में याचिका दायर की थी, लेकिन वहां से राहत नहीं मिलने पर उन्होंने डिवीजन बेंच के समक्ष अपील प्रस्तुत की। हालांकि, डिवीजन बेंच ने भी उनकी अपील खारिज कर दी। इस फैसले के बाद निलंबन आदेश को चुनौती देने की उनकी कोशिश को हाईकोर्ट से राहत नहीं मिल सकी।
न्यायालय की टिप्पणी से यह स्पष्ट हुआ कि प्रशासनिक कार्रवाई के मामले में मुख्यमंत्री की जवाबदेही और सक्षम प्राधिकारी की भूमिका महत्वपूर्ण है।













































