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School Safety: विद्यालयीन समय में रेत वाहनों की नो-एंट्री की मांग, पांच हजार छात्र-छात्राओं की सुरक्षा को लेकर प्राचार्यों ने कलेक्टर को दिया आवेदन

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School Safety:सीधी। जिले के गोतरा, भदौरा, धुआंडोल और महखोर क्षेत्र में संचालित रेत खदानों से निकलने वाले वाहनों की तेज रफ्तार आवाजाही अब स्कूली विद्यार्थियों की सुरक्षा को लेकर चिंता का विषय बनती जा रही है। विद्यालयों के संचालन और छुट्टी के समय सड़कों पर बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं की मौजूदगी को देखते हुए क्षेत्र के विभिन्न विद्यालयों के प्राचार्यों ने कलेक्टर से हस्तक्षेप की मांग की है। प्राचार्यों ने संयुक्त रूप से आवेदन प्रस्तुत कर महखोर से गोतरा के बीच विद्यालयीन समय में रेत वाहनों की आवाजाही पर नो-एंट्री लागू करने का अनुरोध किया है, ताकि संभावित सड़क दुर्घटनाओं को रोका जा सके।

 

School Safety: रेत खदानों से निकलने वाले वाहन बढ़ा रहे चिंता

 

कलेक्टर को दिए गए आवेदन में उल्लेख किया गया है कि वर्तमान शैक्षणिक सत्र 2026-27 में अक्टूबर माह से क्षेत्र में रेत खदानों का संचालन किया जा रहा है। इन खदानों से निकलने वाले वाहन गोतरा, शंकरपुर, भदौरा, धुआंडोल और महखोर सहित आसपास के गांवों से होकर गुजरते हैं। आवेदन के अनुसार, इन वाहनों की तेज रफ्तार के कारण सड़क पर आवागमन करने वाले विद्यार्थियों की सुरक्षा को लेकर चिंता बनी हुई है। ग्रामीण क्षेत्रों में कई स्थानों पर स्कूली बच्चों को इन्हीं सड़कों का उपयोग करना पड़ता है, जिससे भारी वाहनों और बच्चों की आवाजाही एक ही समय पर होने से दुर्घटना की आशंका बढ़ जाती है।

 

School Safety: प्रतिदिन लगभग पांच हजार विद्यार्थी करते हैं आवागमन

School Safety:प्राचार्यों ने अपने आवेदन में बताया है कि संबंधित मार्ग से लगभग पांच हजार छात्र-छात्राएं आवागमन करते हैं। सुबह विद्यालय पहुंचने के समय और दोपहर में छुट्टी होने के दौरान सड़क पर विद्यार्थियों की संख्या अधिक रहती है। ऐसे में यदि रेत से लदे वाहन तेज गति से गुजरते हैं तो बच्चों के लिए सुरक्षित सड़क पार करना और मार्ग से निकलना चुनौतीपूर्ण हो सकता है। विद्यालयीन समय में भारी वाहनों की निर्बाध आवाजाही किसी गंभीर हादसे का कारण बन सकती है। इसी आशंका को देखते हुए प्राचार्यों ने प्रशासन से समय रहते आवश्यक कदम उठाने की मांग की है।

 

School Safety: सुबह 9 से 10:30 और दोपहर 3 से 4:30 बजे तक नो-एंट्री का प्रस्ताव

 

आवेदन में विद्यालयों के समय को ध्यान में रखते हुए दोपहर और सुबह के व्यस्त समय में रेत वाहनों की आवाजाही नियंत्रित करने का सुझाव दिया गया है। प्राचार्यों ने सुबह 9 बजे से 10:30 बजे तक तथा दोपहर 3 बजे से शाम 4:30 बजे तक नो-एंट्री व्यवस्था लागू करने का अनुरोध किया है। उनका मानना है कि इन निर्धारित समयावधियों में भारी वाहनों को रोकने से विद्यार्थियों को सड़क पर सुरक्षित आवागमन का अवसर मिलेगा। साथ ही विद्यालयों के आसपास यातायात का दबाव कम करने और संभावित दुर्घटनाओं की आशंका घटाने में भी मदद मिल सकती है।

 

School Safety: अप्रिय घटना से पहले कार्रवाई की अपील

 

प्राचार्यों ने आवेदन में स्पष्ट किया है कि विद्यार्थियों की सुरक्षा के मामले में किसी अप्रिय घटना का इंतजार नहीं किया जाना चाहिए। यदि प्रशासन समय रहते रेत वाहनों की आवाजाही के लिए निर्धारित समय तय कर दे और उसका प्रभावी पालन सुनिश्चित कराए, तो बच्चों की सुरक्षा के लिए एक महत्वपूर्ण कदम उठाया जा सकता है। इस संबंध में कलेक्टर से अनुरोध किया गया है कि महखोर से गोतरा के बीच विद्यालयीन समय में रेत वाहनों पर नो-एंट्री लागू करने के लिए संबंधित विभागों को आवश्यक निर्देश दिए जाएं।

 

School Safety: दस विद्यालयों के प्राचार्यों ने उठाई आवाज

 

इस आवेदन पर क्षेत्र के दस विद्यालयों के प्राचार्यों ने अपनी सहमति और हस्ताक्षर के माध्यम से विद्यार्थियों की सुरक्षा का मुद्दा उठाया है। इनमें शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय भदौरा, गुरुकुल पब्लिक हाई स्कूल भदौरा, रॉयल फोर्ड हाई स्कूल धुआंडोल, हंसवाहिनी विद्या मंदिर हाई स्कूल भदौरा, द होमलाइक स्कूल महखोर, सरस्वती शिशु मंदिर महखोर, सरस्वती शिशु मंदिर गोतरा, ब्राइट फ्यूचर स्कूल गोतरा, शासकीय हाई स्कूल गोतरा तथा शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय महखोर शामिल हैं।

 

विभिन्न विद्यालयों के प्राचार्यों की ओर से एक साथ उठाई गई यह मांग विद्यार्थियों की सुरक्षा से जुड़े मुद्दे की गंभीरता को सामने लाती है। अब देखना होगा कि जिला प्रशासन इस आवेदन पर क्या कदम उठाता है और विद्यालयीन समय में रेत वाहनों की आवाजाही को नियंत्रित करने के लिए क्या व्यवस्था बनाई जाती है। क्षेत्र के अभिभावकों और विद्यालय प्रबंधन की अपेक्षा है कि बच्चों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए इस दिशा में शीघ्र निर्णय लिया जाए।

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