लखनऊ: उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर राजनीतिक दलों की तैयारियां तेज हो गई हैं। ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन के प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने संकेत दिया है कि उनकी पार्टी इस बार उत्तर प्रदेश में अकेले चुनाव लड़ने के बजाय गठबंधन के विकल्प पर विचार कर रही है। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि अभी किसी गठबंधन को अंतिम रूप नहीं दिया गया है।
ओवैसी ने एक साक्षात्कार में कहा कि वह अकेले चुनाव नहीं लड़ना चाहते और गठबंधन के साथ चुनाव मैदान में उतरने की इच्छा रखते हैं। उन्होंने संकेत दिया कि इस संबंध में अन्य राजनीतिक दलों के साथ बातचीत चल रही है और आने वाले समय में स्थिति स्पष्ट हो सकती है।
इससे पहले जुलाई 2026 में सहारनपुर की एक जनसभा में भी ओवैसी ने कहा था कि उनकी पार्टी उत्तर प्रदेश में गठबंधन के लिए तैयार है। उन्होंने चुनाव में भाजपा को रोकने के उद्देश्य से गठबंधन की संभावना की बात कही थी।
ओवैसी ने समाजवादी पार्टी और उसके नेतृत्व पर भी निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले कई चुनावों में अपनी हार के लिए समाजवादी पार्टी ने एआईएमआईएम को जिम्मेदार ठहराया, जबकि पार्टी को अपनी रणनीति और प्रदर्शन की समीक्षा करनी चाहिए।
गठबंधन को लेकर एआईएमआईएम की गतिविधियां ऐसे समय तेज हुई हैं, जब पार्टी ने उत्तर प्रदेश में अपना जनसंपर्क अभियान बढ़ाया है। सितंबर की शुरुआत में पार्टी ने बताया था कि ओवैसी 20 सितंबर से प्रदेश के अलग-अलग जिलों का दौरा करेंगे। पार्टी की ओर से यह भी कहा गया था कि चुनाव में किन सीटों पर प्रत्याशी उतारे जाएंगे, इसकी घोषणा बाद में की जाएगी।
उत्तर प्रदेश में एआईएमआईएम और अन्य दलों के बीच संभावित राजनीतिक तालमेल को लेकर चर्चा पहले भी होती रही है। जून 2026 में कुछ रिपोर्टों में चंद्रशेखर आजाद की आजाद समाज पार्टी और एआईएमआईएम के साथ संभावित समीकरणों की राजनीतिक चर्चा सामने आई थी, हालांकि इसे अंतिम गठबंधन के रूप में घोषित नहीं किया गया था।
ओवैसी ने उत्तर प्रदेश में मुस्लिम समुदाय से जुड़े मुद्दों, वक्फ कानून और कानून-व्यवस्था को लेकर भी सरकार पर आरोप लगाए हैं। उनके इन आरोपों पर संबंधित पक्षों की अलग-अलग प्रतिक्रियाएं रही हैं। इसलिए इन दावों को ओवैसी के राजनीतिक बयान के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
फिलहाल 2027 के विधानसभा चुनाव के लिए एआईएमआईएम ने गठबंधन को लेकर अपनी इच्छा जरूर जाहिर की है, लेकिन किन दलों के साथ और कितनी सीटों पर समझौता होगा, इस पर अंतिम घोषणा का इंतजार है।













































