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सीधी-मऊगंज सीमा पर करंट की चपेट में आई मादा हाथी की मौत, रात तक सीधी के जंगल में था हाथियों का जोड़ा.

डेढ़ बजे पहाड़ पार कर मलकपुर पहुंचा
गलत सूचना पर बिजली चालू कराने के आरोप से उठे गंभीर सवाल

सीधी-मऊगंज सीमा पर करंट से मादा हाथी की मौत

सीधी। एपी शर्मा ,सीधी-मऊगंज सीमा से लगे मलकपुर क्षेत्र में शनिवार तड़के करंट की चपेट में आने से एक मादा हाथी की मौत हो गई। बताया जा रहा है कि हाथियों का जोड़ा शुक्रवार रात तक सीधी जिले के कमर्जी वन परिक्षेत्र अंतर्गत जंगल में विचरण कर रहा था। रात करीब 1:30 बजे दोनों हाथी पहाड़ पार कर मऊगंज की ओर पहुंचे, जहां मलकपुर के पास मादा हाथी बिजली के तार की चपेट में आ गई। करंट लगने से उसकी मौके पर ही मौत हो गई। घटना की सूचना मिलते ही वन विभाग का अमला मौके पर पहुंचा और क्षेत्र की घेराबंदी कर जांच शुरू की।

प्रारंभिक जानकारी के अनुसार हाथियों की लगातार आवाजाही को देखते हुए क्षेत्र में रात के समय बिजली आपूर्ति बंद रखने की व्यवस्था की गई थी। आरोप है कि बीट गार्ड द्वारा हाथियों की लोकेशन सीधी क्षेत्र में बताए जाने के बाद बिजली आपूर्ति चालू करवा दी गई। इसी दौरान हाथियों के मऊगंज की ओर बढ़ने और मलकपुर पहुंचने की बात सामने आ रही है। यदि यह तथ्य जांच में सही पाया जाता है तो वन विभाग की निगरानी व्यवस्था और विभागीय समन्वय पर गंभीर सवाल खड़े होंगे। जब हाथियों का जोड़ा लगातार सीधी-मऊगंज सीमा क्षेत्र में विचरण कर रहा था और उनकी मौजूदगी को लेकर विभाग सतर्क था, तब विद्युत आपूर्ति चालू करने से पहले उनकी ताजा लोकेशन की पुष्टि क्यों नहीं की गई मलकपुर में मादा हाथी की मौत के बाद यह सवाल वन विभाग और बिजली विभाग दोनों की कार्यप्रणाली को कठघरे में खड़ा कर रहा है।

हाथियों की जानकारी के बावजूद चूक

बताया जा रहा है कि दोनों हाथी पिछले कई महीनों से सीधी, मऊगंज और रीवा जिले के जंगलों में लगातार विचरण कर रहे थे। हाल के दिनों में उनकी मौजूदगी को लेकर वन विभाग द्वारा सतर्कता भी बरती जा रही थी और कुछ क्षेत्रों में रात के समय बिजली आपूर्ति बंद रखने के निर्देश दिए गए थे। ऐसे में मलकपुर में बिजली लाइन की चपेट में आकर हाथी की मौत ने निगरानी और विद्युत सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

जांच में तय होगी जिम्मेदारी

वन विभाग के अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर कार्रवाई शुरू कर दी है। हाथी के शव का पोस्टमार्टम कराया जा रहा है, जिसके बाद मौत के वास्तविक कारण और घटना की परिस्थितियां अधिक स्पष्ट होंगी। जांच में यह भी देखा जाना जरूरी है कि हाथियों की वास्तविक लोकेशन क्या थी, बिजली आपूर्ति किसके निर्देश पर चालू की गई और वन विभाग तथा बिजली विभाग के बीच सूचना के आदान-प्रदान में कहीं चूक तो नहीं हुई। मादा हाथी की मौत के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि जिस क्षेत्र में हाथियों की लगातार आवाजाही की जानकारी थी, वहां वन्यजीवों को विद्युत तारों से सुरक्षित रखने के लिए पर्याप्त इंतजाम क्यों नहीं किए गए।

लोकेशन गलत बताई या निगरानी में हुई चूक

हाथियों की गतिविधियों पर नजर रखने वाली व्यवस्था पर अब सवाल उठ रहे हैं। आरोप है कि बीट स्तर से हाथियों की लोकेशन सीधी क्षेत्र में बताए जाने के बाद बिजली आपूर्ति चालू कराई गई, जबकि इसके कुछ ही समय बाद हाथियों के मऊगंज की ओर पहुंचने की जानकारी सामने आई। यदि जांच में यह आरोप सही पाया जाता है तो यह महज संयोग नहीं बल्कि गंभीर विभागीय चूक का मामला माना जा सकता है।

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