
Book Launch: प्रगतिशील लेखक संघ के 14वें राज्य सम्मेलन में साहित्यकारों ने की कविताओं की सराहना, जनसरोकारों और सामाजिक संवेदनाओं को मिला महत्व
Book Launch: मध्यप्रदेश के इंदौर में प्रगतिशील लेखक संघ के 14वें राज्य स्तरीय साहित्यिक सम्मेलन के दौरान वरिष्ठ कवि लेखक सोमेश्वर सिंह के कविता संग्रह ‘चलो कहीं और चलें’ का गरिमामय वातावरण में लोकार्पण किया गया। सम्मेलन में प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों से आए साहित्यकारों, कवियों और लेखकों ने हिस्सा लिया। इस अवसर पर कविता, समाज, जनसरोकार और समकालीन साहित्य की भूमिका पर विचार-विमर्श हुआ। सोमेश्वर सिंह की रचनाओं को सामाजिक परिस्थितियों, जनजीवन की पीड़ा और व्यवस्था से जुड़े सवालों को सामने रखने वाला बताया गया।
Book Launch: लोकार्पण समारोह में वरिष्ठ कवि कुमार अंबुज, प्रगतिशील लेखक संघ के पदाधिकारी तथा अनेक साहित्यकार उपस्थित रहे। कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने कहा कि साहित्य केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं है, बल्कि समाज की वास्तविक परिस्थितियों को समझने और उन पर सवाल उठाने का प्रभावी साधन भी है। कविता आम आदमी के अनुभवों, संघर्षों और संवेदनाओं को अभिव्यक्ति देती है। ऐसे में सोमेश्वर सिंह का कविता संग्रह समकालीन सामाजिक जीवन के विभिन्न पहलुओं पर विचार करने का अवसर प्रदान करता है।
Book Launch: सेवानिवृत्त विभागाध्यक्ष डॉ. लहरी सिंह ने कविता संग्रह पर अपनी बात रखते हुए कहा कि सोमेश्वर सिंह की कविताओं में समाज की पीड़ा और संघर्षों को अभिव्यक्त करने का प्रयास दिखाई देता है। उन्होंने रचनाओं को जनजीवन की वास्तविक संवेदनाओं से जुड़ा बताया। वहीं, सेवाराम त्रिपाठी ने कविताओं में मार्क्सवादी चिंतन, जीवन के यथार्थ, सामाजिक विषमताओं और मानवीय संवेदनाओं के समन्वय की चर्चा की। उनके अनुसार, यह संग्रह केवल कविताओं का संकलन नहीं, बल्कि अपने समय और समाज से संवाद करने का माध्यम है।
Book Launch: वरिष्ठ पत्रकार राजेंद्र शर्मा ने कहा कि सोमेश्वर सिंह की रचनाएं ईमानदार आदमी की छटपटाहट को बयां करती हैं। उनकी कविताएं सत्ता और व्यवस्था के सामने आईना रखने का काम करती हैं। वक्ताओं के अनुसार, साहित्य की सार्थकता इसी में है कि वह समाज के सामने मौजूद चुनौतियों को रेखांकित करे और लोगों को सोचने के लिए प्रेरित करे। कविताओं में व्यक्त सामाजिक सरोकारों को इसी दृष्टि से महत्वपूर्ण माना गया।
Book Launch: आकाशवाणी के पूर्व निदेशक राजीव शुक्ला ने कहा कि अच्छी कविताएं स्थापित धारणाओं को चुनौती देती हैं और श्रोताओं के भीतर प्रश्न पैदा करती हैं। जबलपुर के चंचला बाई कॉलेज की प्रोफेसर संजुल शर्मा ने भी सोमेश्वर सिंह की रचनाओं की सराहना करते हुए कहा कि कविता कठिन विधा होने के बावजूद उनकी कविताओं में धार, मार और दुलार का प्रभाव दिखाई देता है। साहित्यकारों ने रचनाओं की भाषा, संवेदना और सामाजिक दृष्टि पर अपने विचार साझा किए।
Book Launch: समारोह में कवयित्री पूजा दुबे को महादेवी वर्मा स्मृति सम्मान से सम्मानित किया गया। सम्मान प्राप्त करने के बाद उन्होंने सोमेश्वर सिंह की कविता और जनसरोकारों के प्रति प्रतिबद्धता का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि उनकी रचनाएं जनचेतना की संवाहक हैं और समाज को दिशा देने का प्रयास करती हैं। कार्यक्रम में प्रदेशभर से आए लेखकों, कवियों और साहित्यप्रेमियों ने कविता पाठ किया तथा समकालीन साहित्य की चुनौतियों पर चर्चा की।

Book Launch: इंदौर में आयोजित यह साहित्यिक सम्मेलन रचनात्मक अभिव्यक्ति, वैचारिक संवाद और सामाजिक सरोकारों को केंद्र में रखने वाला आयोजन रहा। कविता संग्रह ‘चलो कहीं और चलें’ के लोकार्पण के माध्यम से साहित्य और समाज के आपसी संबंधों पर चर्चा हुई। सम्मेलन में उपस्थित साहित्यकारों ने इस बात पर जोर दिया कि साहित्य को आमजन के जीवन, उनके संघर्षों और बदलती सामाजिक परिस्थितियों से जुड़े रहना चाहिए।
संपर्क सूत्र – 9893572905










































