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विंध्य विकास प्राधिकरण में पद की जंग, छह महीने में विकास की जगह विवाद सुर्खियों में

विंध्य विकास प्राधिकरण में पद की जंग, छह महीने में विकास की जगह विवाद सुर्खियों में

सीएम मोहन यादव और भाजपा प्रदेशाध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने अध्यक्ष-उपाध्यक्ष को दी सख्त हिदायत, मिलकर काम नहीं किया तो जा सकती है कुर्सी

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भोपाल। विंध्य क्षेत्र के विकास को गति देने के उद्देश्य से गठित विंध्य विकास प्राधिकरण इन दिनों विकास कार्यों के बजाय आपसी विवादों को लेकर चर्चा में है। गठन के करीब छह महीने बाद भी क्षेत्र के विकास का ठोस रोडमैप सामने नहीं आया है, जबकि अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के बीच अधिकारों तथा प्रशासनिक नियुक्तियों को लेकर खींचतान लगातार बढ़ती रही। मामला सार्वजनिक होने के बाद अब मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और भाजपा प्रदेशाध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने हस्तक्षेप करते हुए दोनों पदाधिकारियों को कड़ी नसीहत दी है।

नेतृत्व ने स्पष्ट कर दिया है कि प्राधिकरण का गठन विंध्य क्षेत्र के विकास के लिए किया गया है, न कि पद और प्रतिष्ठा की लड़ाई के लिए। यदि अध्यक्ष और उपाध्यक्ष आपसी समन्वय बनाकर काम नहीं करते हैं तो उन्हें पद से हटाने पर भी विचार किया जा सकता है।

विवाद के बीच अध्यक्ष पंचूलाल प्रजापति और उपाध्यक्ष डॉ. अजय सिंह पटेल को भोपाल बुलाया गया। गुरुवार को प्रदेश भाजपा कार्यालय में दोपहर 12:30 से 1:30 बजे तक प्रदेशाध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने दोनों नेताओं से चर्चा की। इस दौरान विवाद की वजहों, सार्वजनिक बयानों और 17 अक्टूबर को वायरल हुए ऑडियो को लेकर नाराजगी जताई गई।

बैठक में अध्यक्ष पंचूलाल प्रजापति ने स्वीकार किया कि उपाध्यक्ष डॉ. अजय सिंह पटेल ने उनसे कभी अपमानजनक शब्दों का इस्तेमाल नहीं किया था। उन्हें इस संबंध में जानकारी किसी तीसरे व्यक्ति से मिली थी। इस पर प्रदेशाध्यक्ष ने उन्हें समझाइश देते हुए कहा कि राजनीतिक अनुभव रखने वाले नेताओं को बिना पुष्टि किए किसी की बातों पर भरोसा कर आरोप नहीं लगाना चाहिए।

ऑडियो सार्वजनिक होने पर भी नेतृत्व ने नाराजगी जाहिर की। साथ ही उपाध्यक्ष के पद और उनकी भूमिका को लेकर की गई टिप्पणियों को अनुचित बताया। दोनों नेताओं को आपसी मतभेद समाप्त कर विकास कार्यों पर ध्यान केंद्रित करने के निर्देश दिए गए।

सीएम ने भी दिखाई सख्ती, पद से हटाने के संकेत

इससे पहले बुधवार शाम मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने भी दोनों पदाधिकारियों से मुलाकात कर उन्हें समझाइश दी थी। सूत्रों के अनुसार मुख्यमंत्री ने अध्यक्ष पंचूलाल प्रजापति से कहा कि उन्हें विंध्य के विकास की जिम्मेदारी सौंपकर अध्यक्ष बनाया गया है। यदि पदाधिकारी आपस में ही तालमेल नहीं बना पाएंगे तो उन्हें पद पर बनाए रखने का औचित्य नहीं रह जाएगा। मुख्यमंत्री ने भविष्य में इस तरह के विवाद दोबारा सामने आने पर कार्रवाई के संकेत भी दिए।

सीईओ की नियुक्ति बनी विवाद की पहली वजह

प्राधिकरण में विवाद की शुरुआत मुख्य कार्यपालन अधिकारी (सीईओ) की नियुक्ति को लेकर हुई थी। अध्यक्ष पंचूलाल प्रजापति ने केडी साकेत को सीईओ नियुक्त कराया था। इस निर्णय पर दोनों उपाध्यक्षों ने आपत्ति जताते हुए पद पर क्लास-वन अधिकारी की नियुक्ति की मांग की थी। विरोध के बाद वीके अहिरवार को सीईओ बनाया गया। इसी घटनाक्रम के बाद अध्यक्ष और उपाध्यक्षों के बीच मतभेद और गहरे होते चले गए।

छह महीने बाद भी विकास का इंतजार

राज्य सरकार ने अप्रैल 2026 में विंध्य विकास प्राधिकरण में नियुक्तियां की थीं। पूर्व विधायक पंचूलाल प्रजापति को अध्यक्ष और रीवा भाजपा के पूर्व जिलाध्यक्ष डॉ. अजय सिंह पटेल सहित सतना के एक अन्य नेता को उपाध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। लेकिन नियुक्तियों के करीब छह महीने बाद भी प्राधिकरण की उपलब्धियों से ज्यादा आपसी विवाद सुर्खियों में हैं।

प्राधिकरण को कार्यालय भवन उपलब्ध कराने में भी करीब चार महीने का समय लग गया। आखिरकार 8 अगस्त को अस्थायी कार्यालय की व्यवस्था की गई। इसके बावजूद विंध्य क्षेत्र के विकास को लेकर अब तक कोई बड़ी ठोस पहल सामने नहीं आई है। ऐसे में अब नेतृत्व की सख्ती के बाद प्राधिकरण के पदाधिकारियों के सामने अपनी कार्यशैली सुधारने और विकास का स्पष्ट रोडमैप तैयार करने की चुनौती है।

विवाद खत्म करने का दावा, मिलकर करेंगे विकास

बैठक के बाद अध्यक्ष पंचूलाल प्रजापति ने कहा कि वरिष्ठ नेताओं ने दोनों पक्षों की बात सुनी और मार्गदर्शन दिया है। मुख्यमंत्री तथा प्रदेशाध्यक्ष के निर्देशों के अनुसार अब सभी मिलकर विंध्य क्षेत्र के विकास के लिए काम करेंगे।

वहीं उपाध्यक्ष डॉ. अजय सिंह पटेल ने भी अध्यक्ष के साथ किसी प्रकार का मतभेद या विवाद होने से इनकार किया। उन्होंने कहा कि सभी वरिष्ठ नेताओं के मार्गदर्शन में मुख्यमंत्री के निर्देशों के अनुसार क्षेत्र के विकास और जनता की भलाई के लिए काम करेंगे। उन्होंने विकास का रोडमैप तैयार कर आगे बढ़ने की बात कही।

अब देखना होगा कि नेतृत्व की इस सख्त चेतावनी के बाद विंध्य विकास प्राधिकरण विवादों से बाहर निकलकर वास्तव में विकास की दिशा में कितना आगे बढ़ पाता है।

 

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