
एनआई एक्ट की धारा 138 में योगेश कुमार शुक्ला दोषी करार, प्रतिकर नहीं देने पर भुगतनी होगी 6 माह की अतिरिक्त सजा
छिंदवाड़ा। चेक के माध्यम से लेन-देन कर भुगतान से मुकरना एक व्यक्ति को महंगा पड़ गया। चेक अनादरण के मामले में न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी की अदालत ने अभियुक्त योगेश कुमार शुक्ला को दोषी ठहराते हुए छह माह के साधारण कारावास की सजा सुनाई है। इसके साथ ही न्यायालय ने परिवादी को तीन लाख रुपये प्रतिकर के रूप में अदा करने का आदेश दिया है। निर्धारित प्रतिकर राशि जमा नहीं करने पर अभियुक्त को छह माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।
विश्वास के आधार पर दिए थे 2 लाख रुपये: प्रकरण क्रमांक SCNIA No. 414/2023 के अनुसार, श्रीराम लाइफ इंश्योरेंस छिंदवाड़ा के एरिया मैनेजर एवं लोकेशन हेड राजेंद्र कुमार अग्रवाल ने आपसी परिचय और विश्वास के आधार पर योगेश कुमार शुक्ला निवासी गुलाबरा, बंटी इलेक्ट्रॉनिक, स्टेडियम कॉम्प्लेक्स, घास बाजार, छिंदवाड़ा को दो लाख रुपये उधार दिए थे। राशि लौटाने के लिए अभियुक्त ने भारतीय स्टेट बैंक की छिंदवाड़ा शाखा का दो लाख रुपये का चेक क्रमांक 781363, दिनांक 8 जून 2023 को दिया था।
खाते में राशि नहीं होने से बाउंस हुआ चेक
परिवादी ने जब भुगतान के लिए चेक बैंक में प्रस्तुत किया तो 9 जून 2023 को खाते में पर्याप्त राशि नहीं होने के कारण बैंक ने चेक अनादरित कर वापस कर दिया। इसके बाद परिवादी ने अपने अधिवक्ता के माध्यम से अभियुक्त को वैधानिक मांग सूचना पत्र भेजकर 15 दिनों के भीतर भुगतान करने की मांग की। नोटिस मिलने के बावजूद निर्धारित समय में राशि का भुगतान नहीं किया गया।
अदालत में पेश किए गए बैंक दस्तावेज और साक्ष्य
भुगतान नहीं होने पर राजेंद्र कुमार अग्रवाल ने न्यायालय में परक्राम्य लिखत अधिनियम की धारा 138 के तहत परिवाद दायर किया। सुनवाई के दौरान परिवादी के बयान, बैंक के मूल दस्तावेज और अन्य साक्ष्यों का परीक्षण किया गया। बैंक अधिकारी की गवाही से भी चेक खाते में पर्याप्त राशि नहीं होने के कारण बाउंस होने की पुष्टि हुई। न्यायालय ने उपलब्ध साक्ष्यों और दोनों पक्षों की दलीलों के आधार पर अभियुक्त को दोषी पाया।
छह माह की जेल, तीन लाख रुपये प्रतिकर
न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी की अदालत ने योगेश कुमार शुक्ला को छह माह के साधारण कारावास से दंडित किया। साथ ही परिवादी राजेंद्र कुमार अग्रवाल को तीन लाख रुपये प्रतिकर देने का आदेश दिया। प्रतिकर की राशि अदा नहीं करने पर छह माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।
अधिवक्ता ने की प्रभावी पैरवी
इस प्रकरण में परिवादी राजेंद्र कुमार अग्रवाल की ओर से अधिवक्ता कमलेश गढ़वाल ने पैरवी की। उन्होंने न्यायालय के समक्ष कानूनी तर्कों और दस्तावेजी साक्ष्यों को प्रस्तुत किया। चेक अनादरण के इस मामले में आए फैसले को वित्तीय लेन-देन में चेक जारी करने के बाद भुगतान की जिम्मेदारी से मुकरने वालों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।













































