मध्यप्रदेश में खाद की खरीदारी का बदला ट्रेंड, यूरिया की बिक्री में 42 हजार टन की कमी
एनपीके की बिक्री 64 फीसदी घटी, डीएपी और टीएसपी की मांग में हुई बढ़ोतरी; ई-टोकन व्यवस्था को माना जा रहा अहम वजह

भोपाल। मध्यप्रदेश में रबी सीजन के दौरान किसानों के खाद खरीदने के तौर-तरीकों में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। पिछले साल की तुलना में इस बार खाद का अग्रिम भंडारण करने की होड़ कम नजर आ रही है। कृषि विभाग के 28 अक्टूबर तक के आंकड़ों के मुताबिक, प्रदेश में यूरिया की बिक्री में करीब 42 हजार टन की गिरावट दर्ज की गई है। वहीं एनपीके की बिक्री में लगभग 64 प्रतिशत की कमी आई है। इसके विपरीत डीएपी और टीएसपी की मांग में बढ़ोतरी हुई है।
आंकड़ों के अनुसार, इस वर्ष 1 से 28 अक्टूबर के बीच प्रदेश में 2.40 लाख टन यूरिया की बिक्री हुई, जबकि पिछले साल इसी अवधि में 2.82 लाख टन यूरिया बिका था। इस तरह बिक्री में करीब 15 प्रतिशत की कमी आई है। एनपीके की बिक्री भी 80 हजार टन से घटकर लगभग 29 हजार टन रह गई। इसके अलावा सिंगल सुपर फॉस्फेट की बिक्री में भी करीब 48 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है।
दूसरी ओर डीएपी और टीएसपी की संयुक्त बिक्री 1.11 लाख टन से बढ़कर 1.41 लाख टन पहुंच गई। पोटाश की बिक्री में भी 79 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। खाद की अलग-अलग किस्मों की बिक्री में आया यह अंतर किसानों की बदलती पसंद और खरीदारी के तरीके को दर्शाता है।
ई-टोकन व्यवस्था से कम हुई अतिरिक्त खरीदारी
कृषि विभाग की उप संचालक सुमन प्रसाद के मुताबिक, प्रदेश में खाद की उपलब्धता पर्याप्त है और आपूर्ति में कोई कमी नहीं है। ई-टोकन व्यवस्था के माध्यम से खाद वितरण होने से कालाबाजारी पर नियंत्रण लगाने में मदद मिली है। साथ ही किसानों को लंबी कतारों से भी राहत मिली है।
पहले खाद की किल्लत होने की आशंका के चलते किसान जरूरत से अधिक खाद खरीदकर जमा कर लेते थे। कई बार एक बोरी की आवश्यकता होने पर भी चार बोरी तक खरीदने की प्रवृत्ति देखी जाती थी। अब ई-टोकन के माध्यम से जरूरत के अनुसार खाद मिलने से अतिरिक्त खरीदारी में कमी आई है। विभाग का मानना है कि बिक्री में गिरावट को खाद की कमी या मांग घटने का सीधा संकेत नहीं माना जाना चाहिए।
प्रदेश में 3.98 लाख टन खाद का स्टॉक शेष
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, प्रदेश में प्रमुख उर्वरकों की कुल उपलब्धता 8.14 लाख टन रही। इसमें से 28 अक्टूबर तक 4.16 लाख टन खाद की बिक्री हो चुकी थी, जबकि 3.98 लाख टन खाद स्टॉक में शेष थी। चालू रबी सीजन के लिए प्रमुख उर्वरकों की अनुमानित आवश्यकता 17.43 लाख टन बताई गई है।
चूंकि रबी सीजन अभी जारी है, इसलिए आने वाले दिनों में खाद की मांग और बढ़ सकती है। ऐसे में किसानों को समय पर खाद उपलब्ध कराने के लिए आपूर्ति और वितरण व्यवस्था पर लगातार निगरानी रखना जरूरी होगा।
सिंगरौली में 70 और उमरिया में 69 फीसदी घटी यूरिया बिक्री
प्रदेश में यूरिया की बिक्री का जिलेवार आंकड़ा भी काफी दिलचस्प है। नरसिंहपुर में पिछले साल की तुलना में यूरिया की बिक्री 54 प्रतिशत और छिंदवाड़ा में 47 प्रतिशत बढ़ी है। कटनी में 37 प्रतिशत, राजगढ़ में 24 प्रतिशत और उज्जैन में 21 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई।
वहीं दूसरी ओर झाबुआ में यूरिया की बिक्री 78 प्रतिशत, सिंगरौली में 70 प्रतिशत, उमरिया में 69 प्रतिशत और नीमच में 67 प्रतिशत घट गई। इससे स्पष्ट है कि प्रदेश के सभी जिलों में खाद की खरीदारी का रुझान एक जैसा नहीं है।
राजधानी भोपाल में यूरिया की बिक्री 4,213 टन से बढ़कर 5,022 टन पहुंच गई। हालांकि, डीएपी की बिक्री 2,821 टन से घटकर 2,707 टन रह गई। डीएपी, टीएसपी और एनपीके की संयुक्त बिक्री भी 3,443 टन से घटकर 2,750 टन दर्ज की गई।
कुल मिलाकर इस रबी सीजन में खाद की बिक्री के आंकड़े किसानों की बदलती खरीदारी की प्रवृत्ति को सामने ला रहे हैं। अब देखना होगा कि ई-टोकन व्यवस्था और जरूरत के अनुसार खाद खरीदने का यह रुझान पूरे सीजन में कितना प्रभावी रहता है।















































