
विंध्यभूमि,सीधी/मझौली। सीधी जिले के मझौली क्षेत्र में आंगनवाड़ी सहायिका की नियुक्ति को लेकर कथित रिश्वत मांगने का मामला सामने आया है। मामले को गंभीरता से लेते हुए कलेक्टर विकास मिश्रा ने बाल विकास परियोजना मझौली की पर्यवेक्षक एवं प्रभारी परियोजना अधिकारी ज्योति विश्वकर्मा को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है।
मामला आंगनवाड़ी केंद्र पांड क्रमांक-01 में सहायिका पद की नियुक्ति से जुड़ा बताया जा रहा है। आवेदिका किरण बैगा ने शिकायत दर्ज कराते हुए आरोप लगाया था कि नियुक्ति के बदले उनसे एक लाख रुपये रिश्वत की मांग की जा रही है। शिकायत में रिश्वत की मांग व्यक्तिगत रूप से और फोन के माध्यम से किए जाने का आरोप लगाया गया था।
शिकायत सामने आने के बाद प्रशासन की ओर से मामले की जांच कराई गई। जांच के दौरान नियुक्ति प्रक्रिया में एक माह से अधिक समय तक विलंब किए जाने की बात सामने आई। इसके अलावा रिश्वत मांगने से संबंधित तीन ऑडियो रिकॉर्डिंग भी जांच के दौरान सामने आईं, जिन्हें महत्वपूर्ण साक्ष्य माना गया।
जांच रिपोर्ट के आधार पर कलेक्टर ने संबंधित अधिकारी के कृत्य को मध्यप्रदेश सिविल सेवा (आचरण) नियम, 1965 के विपरीत और गंभीर कदाचार की श्रेणी में माना। इसके बाद मध्यप्रदेश सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियम, 1966 के नियम-9 के तहत निलंबन की कार्रवाई की गई।
निलंबन अवधि के दौरान ज्योति विश्वकर्मा का मुख्यालय कार्यालय परियोजना अधिकारी, बाल विकास परियोजना रामपुर नैकिन क्रमांक-01, जिला सीधी निर्धारित किया गया है। उन्हें नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ता भी प्रदान किया जाएगा।
प्रशासन की कार्रवाई से मचा हड़कंप
आंगनवाड़ी सहायिका की नियुक्ति में रिश्वत मांगने के आरोप पर हुई इस कार्रवाई को प्रशासन की ओर से भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त संदेश के रूप में देखा जा रहा है। मामले में सामने आए ऑडियो और जांच रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई किए जाने से विभागीय स्तर पर भी हलचल बढ़ गई है।
अब देखने वाली बात होगी कि इस मामले की आगे की जांच में और क्या तथ्य सामने आते हैं और नियुक्ति प्रक्रिया को लेकर प्रशासन की ओर से आगे क्या कदम उठाए जाते हैं।













































