नई व्यवस्था में अनिवार्य ईपीएफओ कवरेज की मासिक वेतन सीमा 15 हजार से बढ़ाकर 25 हजार रुपये करने का प्रस्ताव मंजूर किया गया है।

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) से जुड़े महत्वपूर्ण प्रस्ताव को मंजूरी दी गई है। सरकार ने अनिवार्य ईपीएफओ कवरेज के लिए मासिक वेतन सीमा को 15 हजार रुपये से बढ़ाकर 25 हजार रुपये करने का फैसला किया है। सरकार के अनुमान के मुताबिक, इस बदलाव से 51 लाख से अधिक अतिरिक्त कर्मचारी अनिवार्य ईपीएफओ कवरेज के दायरे में आ सकते हैं।
कैबिनेट के फैसले की जानकारी केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने दी। सरकार के अनुसार, वेतन सीमा में बदलाव का उद्देश्य बदलती आय, बढ़ते वेतन और संगठित रोजगार के विस्तार को ध्यान में रखते हुए कर्मचारियों को सामाजिक सुरक्षा के दायरे में लाना है।
15 हजार से बढ़कर 25 हजार रुपये हुई सीमा
मौजूदा व्यवस्था में 15 हजार रुपये तक मासिक वेतन पाने वाले कर्मचारियों के लिए अनिवार्य ईपीएफओ कवरेज की सीमा लागू थी। अब इसे बढ़ाकर 25 हजार रुपये किया जा रहा है। इससे 15 हजार से 25 हजार रुपये तक मासिक वेतन पाने वाले कर्मचारियों का एक बड़ा वर्ग सामाजिक सुरक्षा व्यवस्था के दायरे में आ सकेगा।
इस बदलाव का सीधा असर उन कर्मचारियों पर पड़ेगा, जो मौजूदा वेतन सीमा से अधिक आय होने के कारण अनिवार्य भविष्य निधि व्यवस्था में शामिल नहीं हो पाते थे।
भविष्य निधि और पेंशन जैसी सुविधाओं का मिलेगा दायरा
नई व्यवस्था के तहत पात्र कर्मचारियों को भविष्य निधि बचत के साथ कर्मचारी पेंशन योजना और कर्मचारी जमा लिंक्ड बीमा योजना जैसी सामाजिक सुरक्षा व्यवस्थाओं का लाभ मिल सकेगा। हालांकि इन योजनाओं के लाभ संबंधित नियमों और पात्रता शर्तों के आधार पर ही मिलेंगे।
सरकार का कहना है कि ईपीएफओ के दायरे में अधिक कर्मचारियों के आने से औपचारिक रोजगार को बढ़ावा मिल सकता है। इसके अलावा नौकरी बदलने की स्थिति में सामाजिक सुरक्षा से जुड़े लाभों को आगे जारी रखने में भी मदद मिल सकती है।
लंबे समय से बदलाव की थी जरूरत
ईपीएफओ की वेतन सीमा लंबे समय से चर्चा में रही है। वर्ष 2004 से 2014 के बीच इसमें कोई बदलाव नहीं हुआ था। सितंबर 2014 में इसे बढ़ाकर 15 हजार रुपये किया गया था। इसके बाद बीते वर्षों में वेतन और आय के स्तर में बदलाव आया है।
सरकार ने इसी बदलती आर्थिक और रोजगार परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए नई वेतन सीमा तय करने का फैसला किया है। कई क्षेत्रों में न्यूनतम मजदूरी भी मौजूदा सीमा के आसपास पहुंचने के कारण वेतन सीमा में बदलाव की आवश्यकता बताई गई है।
सरकार पर बढ़ेगा वित्तीय भार
नई व्यवस्था लागू होने के बाद सरकार के बजटीय खर्च में भी वृद्धि होगी। प्रस्ताव के तहत सरकार का अनुमानित वार्षिक खर्च करीब 11,339 करोड़ रुपये रहने की बात कही गई है। मौजूदा व्यवस्था में यह राशि करीब 10,250 करोड़ रुपये वार्षिक बताई गई है।
पांच वर्षों की अवधि में कुल अनुमानित खर्च करीब 56,696 करोड़ रुपये रहने का अनुमान है।
ईपीएफओ के करोड़ों सदस्य
ईपीएफओ से जुड़े आंकड़ों के मुताबिक करीब 7.98 करोड़ सदस्य लगभग 7.68 लाख योगदान करने वाले प्रतिष्ठानों के माध्यम से योगदान कर रहे हैं। वहीं कर्मचारी पेंशन योजना के तहत करीब 82 लाख पेंशनभोगी पेंशन का लाभ प्राप्त कर रहे हैं।
सरकार का कहना है कि नई वेतन सीमा के जरिए सामाजिक सुरक्षा व्यवस्था का दायरा और बढ़ेगा तथा अधिक कर्मचारियों को भविष्य निधि, पेंशन और बीमा जैसी सुविधाओं से जोड़ा जा सकेगा।
सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव के अनुसार, नई व्यवस्था को 17 सितंबर 2026, विश्वकर्मा दिवस पर लागू किए जाने की योजना है।










































