एमपी हाईकोर्ट में बढ़ेगी न्यायाधीशों की संख्या, सात अधिवक्ताओं के नामों की सिफारिश
सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम की मंजूरी के बाद नियुक्ति प्रक्रिया आगे बढ़ेगी, 53 स्वीकृत पदों में से 45 पद भरने की उम्मीद

भोपाल। मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय में न्यायाधीशों की कमी दूर करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में सात अधिवक्ताओं को न्यायाधीश नियुक्त करने की सिफारिश को मंजूरी दी है। इन नियुक्तियों की प्रक्रिया पूरी होने के बाद हाईकोर्ट में कार्यरत न्यायाधीशों की संख्या बढ़कर 45 हो जाएगी। इससे न्यायालय के कामकाज को गति मिलने और लंबित मामलों की सुनवाई में तेजी आने की उम्मीद जताई जा रही है।
कॉलेजियम की इस अनुशंसा को न्यायिक व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में अहम माना जा रहा है। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में बड़ी संख्या में दीवानी, आपराधिक और अन्य कानूनी मामले लंबित हैं। न्यायाधीशों के रिक्त पदों के कारण अदालतों पर काम का दबाव बना रहता है। ऐसे में सात नए न्यायाधीशों की नियुक्ति होने से सुनवाई और मामलों के निस्तारण की प्रक्रिया को कुछ राहत मिल सकती है।
53 स्वीकृत पदों में से आठ रह जाएंगे रिक्त
मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय में न्यायाधीशों के कुल 53 पद स्वीकृत हैं। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, वर्तमान में 38 न्यायाधीश कार्यरत हैं, जबकि 15 पद रिक्त हैं। सात नए न्यायाधीशों की नियुक्ति होने पर कार्यरत न्यायाधीशों की संख्या बढ़कर 45 हो जाएगी। इसके बाद भी स्वीकृत पदों के मुकाबले आठ पद खाली रहेंगे।
न्यायाधीशों की संख्या में यह वृद्धि ऐसे समय में महत्वपूर्ण है, जब अदालतों में लंबित मुकदमों का निपटारा न्यायिक व्यवस्था के सामने बड़ी चुनौती बना हुआ है। पर्याप्त संख्या में न्यायाधीश उपलब्ध होने से मामलों की नियमित सुनवाई, सूचीबद्ध प्रकरणों पर विचार और निर्णय प्रक्रिया को बेहतर बनाने में मदद मिल सकती है। हालांकि, लंबित मामलों में वास्तविक कमी कितनी आएगी, यह नियुक्तियों के बाद न्यायालय की कार्यप्रणाली और मामलों के निस्तारण की गति पर निर्भर करेगा।
सात अधिवक्ताओं के नामों पर लगी मुहर
सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम की अनुशंसा में मध्य प्रदेश के अलग-अलग शहरों से जुड़े अधिवक्ताओं के नाम शामिल हैं। इनमें इंदौर के डॉ. विवेक शरण, ग्वालियर के राजेश कुमार शुक्ला और इंदौर की भक्ति व्यास शामिल हैं। इसके अलावा जबलपुर से कनक गहरवार उर्फ कनक लता सिंह, श्रेयस पंडित और अविनाश जरगर के नामों की सिफारिश की गई है। सातवें नाम के रूप में नई दिल्ली के मृणाल एलकर उर्फ मृणाल मजुमदार को न्यायाधीश नियुक्त करने की अनुशंसा की गई है।
इन नामों को मंजूरी मिलने के बाद अब नियुक्ति से संबंधित आगे की औपचारिक प्रक्रिया पूरी की जानी है। कॉलेजियम की सिफारिश के बाद केंद्र सरकार के स्तर पर आवश्यक परीक्षण और प्रशासनिक प्रक्रियाएं पूरी होंगी। इसके बाद नियुक्ति की औपचारिक अधिसूचना जारी होने पर संबंधित अधिवक्ता न्यायाधीश पद की शपथ लेकर कार्यभार संभाल सकेंगे।
नियुक्तियों के बाद न्यायिक व्यवस्था को मिलेगी मजबूती
हाईकोर्ट में न्यायाधीशों की संख्या बढ़ने से न्यायिक कार्यों के बेहतर संचालन की संभावना है। न्यायाधीशों की उपलब्धता बढ़ने पर विभिन्न श्रेणियों के मामलों की सुनवाई के लिए अधिक क्षमता विकसित हो सकती है। इससे पक्षकारों को अपने मामलों की सुनवाई के लिए इंतजार कम होने की उम्मीद भी रहेगी।
हालांकि, केवल रिक्त पदों को भरना ही लंबित मामलों की समस्या का पूर्ण समाधान नहीं है। मामलों की संख्या, सुनवाई की नियमितता, न्यायिक प्रक्रिया में लगने वाला समय और अन्य प्रशासनिक व्यवस्थाएं भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। इसके बावजूद सात नए न्यायाधीशों की नियुक्ति की सिफारिश मध्य प्रदेश की न्यायिक व्यवस्था के लिए अहम कदम मानी जा रही है। अब सभी की नजरें नियुक्ति संबंधी औपचारिक अधिसूचना और नए न्यायाधीशों के कार्यभार संभालने पर रहेंगी।














































