भारतीय पेशेवरों के लिए अहम खबर, नए एच-1बी मामलों में प्रवेश प्रतिबंध और कंपनियों की जांच को लेकर निगरानी बढ़ाने का फैसला

अमेरिका में एच-1बी वीजा को लेकर ट्रंप प्रशासन ने सख्ती जारी रखते हुए 1 लाख डॉलर भुगतान से जुड़ी व्यवस्था को अगले 12 महीनों के लिए बढ़ा दिया है। 18 सितंबर 2026 को जारी राष्ट्रपति की घोषणा के अनुसार, कुछ एच-1बी मामलों में अमेरिका में प्रवेश के लिए संबंधित आवेदन के साथ 1 लाख डॉलर का भुगतान जरूरी रहेगा। यह व्यवस्था 21 सितंबर 2026 से प्रभावी होकर अगले एक साल तक लागू रहने वाली है।
इसके साथ ही प्रशासन ने एच-1बी कार्यक्रम की निगरानी और जांच को मजबूत करने के लिए एक अलग कार्यकारी आदेश भी जारी किया है। इसमें श्रम, विदेश, गृह, वाणिज्य और शिक्षा विभागों के बीच बेहतर समन्वय तथा आवेदनों की अधिक गहन जांच के निर्देश दिए गए हैं।
1 लाख डॉलर की व्यवस्था क्या है?
यह व्यवस्था पहली बार सितंबर 2025 में लागू की गई थी। इसके तहत अमेरिका के बाहर मौजूद कुछ विदेशी कामगारों से जुड़े नए एच-1बी मामलों में 1 लाख डॉलर के भुगतान की शर्त रखी गई थी। अब 18 सितंबर 2026 की नई घोषणा के जरिए इस प्रतिबंध को अगले 12 महीनों के लिए जारी रखा गया है। हालांकि, घोषणा में राष्ट्रीय हित से जुड़े कुछ मामलों में अपवाद की व्यवस्था भी रखी गई है।
व्हाइट हाउस के अनुसार, 2025 में लागू की गई व्यवस्था के बाद अब तक 700 से अधिक एच-1बी याचिकाओं के साथ 1 लाख डॉलर का भुगतान किया जा चुका है।
भारतीय पेशेवरों पर क्यों पड़ेगा असर?
एच-1बी वीजा अमेरिका में विशेष योग्यता वाले विदेशी कर्मचारियों को काम करने की अनुमति देने वाली व्यवस्था है। भारतीय तकनीकी और अन्य पेशेवर लंबे समय से इस वीजा कार्यक्रम का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल करते रहे हैं।
नई व्यवस्था का असर खास तौर पर उन मामलों में महत्वपूर्ण हो सकता है, जहां अमेरिका के बाहर मौजूद कर्मचारी को एच-1बी के जरिए अमेरिका लाने की प्रक्रिया शुरू की जा रही है। हालांकि, हर एच-1बी धारक पर 1 लाख डॉलर का भुगतान लागू होने की बात नहीं कही गई है। घोषणा में इसके दायरे और अपवादों को अलग-अलग निर्धारित किया गया है।
कंपनियों की भी होगी ज्यादा जांच
नए कार्यकारी आदेश में एच-1बी आवेदनों की जांच के दौरान संबंधित कंपनियों के कर्मचारियों की स्थिति को भी ध्यान में रखने का निर्देश दिया गया है। प्रशासनिक एजेंसियों को यह देखने के लिए कहा गया है कि आवेदन करने वाली कंपनी ने पिछले एक साल में समान पदों पर काम करने वाले अमेरिकी कर्मचारियों की छंटनी की है या भविष्य में ऐसी छंटनी की योजना है।
इसके अलावा श्रम विभाग को पहले जमा किए गए श्रम प्रमाणन आवेदनों से जुड़े आंकड़ों की समीक्षा शुरू करने का निर्देश दिया गया है, ताकि नियमों के उल्लंघन की स्थिति में आगे की कार्रवाई की जा सके।
ट्रंप प्रशासन ने बताई ये वजह
व्हाइट हाउस का कहना है कि एच-1बी कार्यक्रम का इस्तेमाल कुछ नियोक्ताओं, ठेका कंपनियों और बाहरी सेवा कंपनियों द्वारा कम वेतन वाले विदेशी कर्मचारियों की नियुक्ति के लिए किया गया है। प्रशासन का दावा है कि इससे अमेरिकी कर्मचारियों के वेतन और रोजगार के अवसर प्रभावित होते हैं। इन दावों के आधार पर प्रशासन ने कार्यक्रम की निगरानी और नियमों के पालन को और सख्त करने का फैसला किया है।
व्हाइट हाउस के अनुसार, 2025 की व्यवस्था लागू होने के बाद बड़ी सूचना-प्रौद्योगिकी बाहरी सेवा कंपनियों की एच-1बी पंजीकरण संख्या में 92 प्रतिशत की कमी आई है। यह आंकड़ा अमेरिकी प्रशासन द्वारा जारी दस्तावेज में दिया गया है।
नई व्यवस्था कब से लागू होगी?
18 सितंबर 2026 की घोषणा के अनुसार, 1 लाख डॉलर भुगतान से जुड़ा प्रवेश प्रतिबंध 21 सितंबर 2026 से प्रभावी होगा और फिलहाल 12 महीने तक लागू रहेगा। इसके बाद प्रशासन इस व्यवस्था को आगे बढ़ाने या समाप्त करने को लेकर फिर समीक्षा कर सकता है।












































