कंप्यूटर ऑपरेटर और अन्य कर्मचारियों पर कार्रवाई का इंतजार
ए पी शर्मा, सीधी। नागरिक आपूर्ति निगम सीधी में सामने आए 27.68 करोड़ रुपये के कथित चावल घोटाले और 14 करोड़ रुपये की फर्जी एफडीआर के मामले में पहली बड़ी विभागीय कार्रवाई हुई है। मध्यप्रदेश स्टेट सिविल सप्लाईज कारपोरेशन के प्रबंध संचालक ने जिला कार्यालय सीधी में प्रभारी जिला प्रबंधक के पद पर पदस्थ मांगीलाल बढ़ेरा, प्रबंधक (वित्त) को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। निलंबन अवधि में उनका मुख्यालय क्षेत्रीय कार्यालय रीवा निर्धारित किया गया है।
कारपोरेशन के मुख्यालय भोपाल से जारी 22 सितंबर 2026 के आदेश में कहा गया है कि मेसर्स बजरंग इंडस्ट्रीज, ग्राम हटवा द्वारा 361 लॉट धान का अनुबंध किया गया था और इसके विरुद्ध करीब 14 करोड़ रुपये की बैंक गारंटी/एफडीआर जमा की गई थी। मिलर ने 285 लॉट धान का उठाव किया, जबकि उसके विरुद्ध मात्र 44 लॉट चावल जमा कराया गया। शेष 241 लॉट, करीब 69,916.5 क्विंटल चावल, 15 सितंबर तक जमा नहीं कराया गया।
जांच में संबंधित बैंक से सत्यापन कराने पर 14 करोड़ रुपये की एफडीआर को कूटरचित एवं फर्जी पाया गया। आदेश में प्रभारी जिला प्रबंधक बढ़ेरा पर आरोप लगाया गया है कि उन्होंने अनुबंध के समय एफडीआर का बैंक से सत्यापन नहीं कराया। साथ ही पिछले डीओ के विरुद्ध धान उठाव और चावल जमा होने की स्थिति की समीक्षा किए बिना लगातार डीओ जारी किए गए। आदेश में यह भी स्पष्ट किया गया है कि जारी डीओ के विरुद्ध धान उठाव की ऑनलाइन प्रविष्टि प्रदाय केंद्र कर्मी द्वारा नहीं की गई। इसके चलते मुख्यालय को प्राप्त रिपोर्ट में केवल 66 लॉट के विरुद्ध ऑनलाइन धान उठाव दर्ज होना पाया गया। मासिक उठाव पत्रक की भी प्रभारी जिला प्रबंधक द्वारा समय पर समीक्षा नहीं की गई। कारपोरेशन ने इन्हीं लापरवाहियों को आर्थिक क्षति का कारण मानते हुए बढ़ेरा को निलंबित किया है।
अब दूसरे जिम्मेदारों पर कार्रवाई का सवाल
जिला प्रबंधक पर कार्रवाई के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि इस पूरी प्रक्रिया में जिन अन्य कर्मचारियों की भूमिका सामने आ रही है, उनके खिलाफ क्या कार्रवाई होगी। आदेश में स्वयं धान उठाव की ऑनलाइन प्रविष्टि नहीं होने की बात दर्ज है। ऐसे में कंप्यूटर ऑपरेटर संदीप द्विवेदी की भूमिका की जांच और उन पर कार्रवाई होगी या नहीं, यह सवाल बना हुआ है। इसी तरह डीओ जारी करने और लॉट उपलब्ध कराने की प्रक्रिया से जुड़े शुभम पाठक की भूमिका भी जांच के दायरे में है। यदि पिछले उठाव और चावल जमा होने की स्थिति स्पष्ट हुए बिना आगे के लॉट के लिए डीओ जारी किए गए तो इसकी जिम्मेदारी तय होना आवश्यक है। वहीं सहायक एकाउंटेंट शिखा सिंह बघेल की भूमिका को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। फर्जी एफडीआर के सत्यापन और अभिलेखीय प्रक्रिया में उनकी भूमिका की जांच हुई या नहीं तथा जिला प्रबंधक पर कार्रवाई के बावजूद उन्हें अब तक कार्रवाई के दायरे में क्यों नहीं लिया गया, यह भी स्पष्ट होना बाकी है।
आदेश ने खोली लापरवाही की परत
कारपोरेशन के निलंबन आदेश में स्पष्ट किया गया है कि एफडीआर का बैंक सत्यापन समय पर नहीं कराया गया, पिछले डीओ के विरुद्ध धान उठाव और चावल प्राप्ति की स्थिति देखे बिना लगातार डीओ जारी हुए तथा ऑनलाइन पोर्टल पर धान उठाव की सही प्रविष्टि नहीं की गई। इन्हीं बिंदुओं को आर्थिक क्षति का कारण माना गया है। बजरंग इंडस्ट्रीज हटवा ने 285 लॉट धान उठाया, लेकिन उसके विरुद्ध केवल 44 लॉट चावल जमा हुआ। इस तरह 241 लॉट यानी करीब 69,916.5 क्विंटल चावल जमा नहीं हुआ। इतने बड़े अंतर के बावजूद लगातार डीओ जारी होने की प्रक्रिया अब जांच का प्रमुख विषय बन गई है।
एक पर कार्रवाई, बाकी पर कब?
जिला प्रबंधक के निलंबन के बाद अब सवाल है कि ऑनलाइन उठाव प्रविष्टि से जुड़े कंप्यूटर ऑपरेटर, डीओ एवं लॉट जारी करने की प्रक्रिया से जुड़े कर्मचारियों और एफडीआर प्रक्रिया से जुड़े अन्य जिम्मेदारों की भूमिका कब तय होगी। यदि जांच में सामूहिक स्तर पर लापरवाही या नियम उल्लंघन सामने आया है तो सभी संबंधितों पर कार्रवाई होना आवश्यक है, सभी दोषियों पर दंडात्मक कार्यवाही मामले की अगली महत्वपूर्ण कड़ी होगी।












































