27.68 करोड़ के चावल जमा नहीं होने और 14 करोड़ की फर्जी एफडीआर का मामला
कलेक्टर के आदेश से प्रिया पाठक को मिला था नागरिक आपूर्ति निगम का अतिरिक्त प्रभार

सीधी। ए पी शर्मा ,नागरिक आपूर्ति निगम सीधी में सामने आए 27.68 करोड़ रुपये मूल्य के चावल जमा नहीं होने और 14 करोड़ रुपये की एफडीआर कूट रचित पाए जाने के मामले में जिम्मेदारी तय करने की कार्रवाई को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं। कलेक्टर एवं जिला दण्डाधिकारी द्वारा 5 मई 2026 को जारी आदेश में डिप्टी कलेक्टर सुश्री प्रिया पाठक को उनके मूल कार्य के साथ-साथ जिला प्रबंधक, नागरिक आपूर्ति निगम सीधी का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया था। आदेश में उन्हें आहरण एवं संवितरण अधिकारी भी बनाया गया था। इसके पालन में प्रिया पाठक ने 5 मई को ही नागरिक आपूर्ति निगम के जिला प्रबंधक का पदभार ग्रहण करने की सूचना प्रबंध संचालक को भेजी थी।
अब चावल मिलिंग में हुई गंभीर अनियमितता के मामले में जिला प्रबंधक को कारण बताओ सूचना जारी किए जाने की जानकारी सामने आई है, जबकि उपलब्ध दस्तावेजों के अनुसार उस अवधि में जिला प्रबंधक का अतिरिक्त प्रभार डिप्टी कलेक्टर प्रिया पाठक के पास था। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि जब निगम की निगरानी और प्रबंधन की जिम्मेदारी प्रभारी जिला प्रबंधक के पास थी, तो जिम्मेदारी तय करने की कार्रवाई में उस स्तर की भूमिका की भी जांच क्यों नहीं की गई। मामले के अनुसार ग्राम हटवा, तहसील सिहावल स्थित बजरंग इण्डस्ट्रीज के प्रोपराइटर अमन यादव द्वारा वर्ष 2025-26 में धान मिलिंग के लिए 361 लॉट का अनुबंध किया गया था। इसके विरुद्ध 285 लॉट के लिए डिलेवरी ऑर्डर जारी हुआ और मिलर्स ने निर्धारित धान का उठाव कर लिया। लेकिन 15 सितंबर 2026 तक केवल 44 लॉट चावल ही निगम में जमा कराया गया। इस तरह 241 लॉट चावल, जिसकी आर्थिक लागत 27.68 करोड़ रुपये बताई गई है, जमा नहीं कराया गया। मामले में सबसे गंभीर तथ्य 14 करोड़ रुपये की एफडीआर से जुड़ा है। निगम के समक्ष प्रस्तुत एफडीआर की भारतीय स्टेट बैंक शाखा सीधी से जांच कराई गई, जिसमें उसे कूट रचित एवं फर्जी पाया गया। इसके बाद मिलर्स के विरुद्ध संबंधित थाने में प्राथमिकी दर्ज कराने के निर्देश दिए गए हैं। हालांकि एफडीआर की जांच से संबंधित कार्य लेखापाल एम.एल. बड़ेरा के स्तर पर होना बताया जा रहा है, लेकिन सवाल यह है कि उनके ऊपर बैठे अधिकारियों और प्रभारी जिला प्रबंधक द्वारा दस्तावेजों एवं पूरी प्रक्रिया की निगरानी किस स्तर पर की जा रही थी। यदि समय रहते एफडीआर और धान-चावल के हिसाब की जांच होती तो इतनी बड़ी राशि का चावल लंबित रहने की स्थिति बनने से पहले ही मामला सामने आ सकता था। मामले में यह भी महत्वपूर्ण है कि 5 मई 2026 के कलेक्टर के आदेश में एम.एल. बड़ेरा को प्रभारी जिला प्रबंधक से सहायक समन्वय के रूप में कार्य करने की जिम्मेदारी दी गई थी, जबकि प्रिया पाठक को जिला प्रबंधक का अतिरिक्त प्रभार और आहरण एवं संवितरण अधिकारी बनाया गया था। ऐसे में कार्रवाई में जिम्मेदारी के पूरे प्रशासनिक क्रम की जांच किए जाने की मांग उठ रही है।
कलेक्टर के आदेश में प्रिया पाठक को मिला था प्रभार
कलेक्टर एवं जिला दण्डाधिकारी सीधी द्वारा 5 मई 2026 को जारी आदेश में डिप्टी कलेक्टर सुश्री प्रिया पाठक को उनके मूल कार्य के साथ-साथ जिला प्रबंधक नागरिक आपूर्ति निगम सीधी का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया था। आदेश में उन्हें आहरण एवं संवितरण अधिकारी भी बनाया गया था। वहीं लेखापाल एम.एल. बड़ेरा को उनके सहायक समन्वय के रूप में कार्य करने के निर्देश दिए गए थे।
5 मई को ही पदभार ग्रहण करने की सूचना
प्रभार मिलने के बाद सुश्री प्रिया पाठक ने 5 मई 2026 को मध्यप्रदेश स्टेट सिविल सप्लाईज कार्पोरेशन के प्रबंध संचालक को पत्र भेजकर पदभार ग्रहण करने की सूचना दी थी। पत्र में स्पष्ट उल्लेख था कि कलेक्टर के आदेश के पालन में उन्होंने नागरिक आपूर्ति निगम के जिला प्रबंधक का अतिरिक्त प्रभार संभाल लिया है। पत्र की प्रतिलिपि कलेक्टर सहित विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों को भी भेजी गई थी।
27.68 करोड़ का चावल और 14 करोड़ की एफडीआर
बजरंग इण्डस्ट्रीज को जारी डिलेवरी ऑर्डर के अनुपात में धान का पूरा उठाव किया गया, लेकिन 15 सितंबर तक 241 लॉट चावल जमा नहीं कराया गया। इसकी आर्थिक लागत 27.68 करोड़ रुपये बताई गई है। वहीं निगम के समक्ष प्रस्तुत 14 करोड़ रुपये की एफडीआर की बैंक से जांच कराने पर उसे कूट रचित एवं फर्जी पाया गया। प्रशासन ने मिलर्स के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज कराने के निर्देश दिए हैं।











































