सिंगरौली

जनप्रतिनिधियों की मौजूदगी पर आपत्ति नहीं बल्कि राजनीतिक कार्यकर्ताओं की भूमिका पर सवाल शिक्षा विभाग के आदेश पर उठा सवाल

सरकारी स्कूल के कार्यक्रम में राजनीतिक कार्यकर्ताओं की भूमिका पर उठे सवाल
सिंगरौली: जिले में 17 सितंबर से 17 अक्टूबर तक चल रहे ‘सेवा संकल्प अभियान’ के तहत सरकारी स्कूलों में आयोजित कार्यक्रमों में अतिथि चयन को लेकर सवाल उठने लगे हैं आपत्ति जनप्रतिनिधियों की मौजूदगी पर नहीं, बल्कि राजनीतिक दलों से जुड़े कार्यकर्ताओं को शासकीय शिक्षण संस्थानों के मंच पर प्रमुख अतिथि अथवा मुख्य भूमिका दिए जाने को लेकर है सरकारी स्कूलों में आयोजित कार्यक्रमों का उद्देश्य विद्यार्थियों की शैक्षणिक, रचनात्मक और सामाजिक गतिविधियों को बढ़ावा देना है ऐसे में सवाल यह है कि क्या अभियान के दिशा-निर्देशों में राजनीतिक दलों के कार्यकर्ताओं को अतिथि बनाने का प्रावधान है? यदि प्रावधान है तो उसकी स्पष्ट जानकारी सार्वजनिक की जानी चाहिए और यदि नहीं है तो स्थानीय स्तर पर ऐसे अतिथि चयन का आधार क्या रहा, यह स्पष्ट होना चाहिए जनप्रतिनिधि और पार्टी कार्यकर्ता में अंतर
जनप्रतिनिधि किसी निर्वाचित पद पर होने के कारण सरकारी कार्यक्रमों में निर्धारित प्रोटोकॉल के तहत शामिल हो सकते हैं लेकिन किसी राजनीतिक दल के पदाधिकारी या कार्यकर्ता की भूमिका अलग है इसलिए दोनों को एक ही श्रेणी में रखकर अतिथि चयन को उचित ठहराने के बजाय विभाग को यह स्पष्ट करना चाहिए कि राजनीतिक दल से जुड़े व्यक्ति को किस हैसियत से शासकीय स्कूल के कार्यक्रम में मंच दिया गया
डीईओ बोलीं- वरिष्ठ कार्यालयों के निर्देश पर आयोजन जिला शिक्षा अधिकारी कविता त्रिपाठी ने बताया कि सेवा संकल्प अभियान के तहत वरिष्ठ कार्यालयों के निर्देशानुसार जनप्रतिनिधियों एवं अधिकारियों की सामूहिक भागीदारी में कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। अभियान के तहत चित्रकला और भाषण प्रतियोगिताएं भी आयोजित की जा रही हैं।
डीईओ के इस बयान के बाद अब मुख्य सवाल वरिष्ठ कार्यालयों के निर्देशों को लेकर है यदि अतिथि चयन के संबंध में स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी हुए हैं तो उन्हें सार्वजनिक किए जाने से स्थिति स्पष्ट हो सकती है। वहीं, यदि राजनीतिक दल के कार्यकर्ताओं को आमंत्रित करने का निर्णय स्थानीय स्तर पर लिया गया है तो संबंधित स्कूल, आयोजन समिति या अधिकारी को इसकी प्रक्रिया और आधार स्पष्ट करना चाहिए सवाल कार्यक्रम की नीयत पर नहीं, प्रक्रिया पर सेवा संकल्प’ के तहत विद्यार्थियों के लिए आयोजित गतिविधियों पर सवाल नहीं है। सवाल शासकीय स्कूल के मंच की गरिमा और अतिथि चयन की पारदर्शी प्रक्रिया को लेकर है सरकारी शिक्षण संस्थानों में होने वाले आयोजनों में यह स्पष्ट रहना जरूरी है कि मंच किस प्रोटोकॉल के तहत साझा किया जा रहा है और किसे किस पद अथवा भूमिका के आधार पर आमंत्रित किया गया अतिथि चयन की प्रक्रिया स्पष्ट होने से न केवल वर्तमान विवाद पर स्थिति साफ होगी, बल्कि भविष्य में सरकारी स्कूलों के आयोजनों को लेकर राजनीतिक निष्पक्षता संबंधी सवालों की गुंजाइश भी कम होगी।

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