सीधी

कलेक्टर के निर्देश पर भी एफआईआर नहीं, दस दिन से फाइलों में घूम रही कार्रवाई

बजरंग राइस मिलर्स पर 27.30 करोड़ की चावल राशि बकाया
जांच में पाई गई थी 14 करोड़ की फर्जी एफडीआर

कलेक्टर के निर्देश के बाद भी बजरंग इंडस्ट्रीज के खिलाफ एफआईआर लंबित

सीधी। बजरंग इंडस्ट्री
ज ग्राम हटवा तहसील सिहावल के प्रोपराइटर अमन यादव के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज कराने के लिए कलेक्टर के स्पष्ट निर्देश के बावजूद अब तक एफआईआर दर्ज नहीं हो सकी है। कलेक्टर कार्यालय (खाद्य) द्वारा 15 सितंबर 2026 को जिला प्रबंधक, मध्यप्रदेश स्टेट सिविल सप्लाइज कॉरपोरेशन को पत्र जारी कर संबंधित थाने में प्राथमिकी दर्ज कराने तथा उसकी प्रति कार्यालय में प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए थे। इसके बावजूद दस दिन बीत जाने के बाद भी कार्रवाई लंबित है। प्राप्त पत्र के अनुसार खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 में बजरंग इंडस्ट्रीज के प्रोपराइटर अमन यादव द्वारा धान की कस्टम मिलिंग के लिए 361 लाट का अनुबंध किया गया था। इसके विरुद्ध जिला प्रबंधक कार्यालय से 285 लाट का डिलीवरी आदेश जारी किया गया। मिलर्स द्वारा डिलीवरी आदेश के अनुपात में पूरी धान का उठाव किया गया, लेकिन इसके एवज में केवल 44 लाट चावल ही जमा कराया गया।
पत्र में यह भी बताया गया है कि शेष 241 लाट चावल, जिसकी मात्रा 69,916.5 क्विंटल बताई गई है, 15 सितंबर 2026 तक जमा नहीं कराया गया। इसकी आर्थिक लागत करीब 27.30 करोड़ रुपये बताई गई है। अनुबंध की शर्तों के अनुसार कम पाई गई धान अथवा चावल की मात्रा की आर्थिक लागत के पांच गुना के आधार पर वसूली का प्रावधान है। इस आधार पर संबंधित मिलर्स से करीब 136.5 करोड़ रुपये की वसूली अनुमानित की गई है।
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14 करोड़ की एफडीआर फर्जी

मामले को और गंभीर बनाने वाला तथ्य यह है कि जिला प्रबंधक द्वारा 14 सितंबर को जारी पत्र के आधार पर निगम के समक्ष प्रस्तुत 14 करोड़ रुपये की एफडीआर की जांच भारतीय स्टेट बैंक सीधी से कराई गई। कलेक्टर कार्यालय के पत्र में बैंक द्वारा उक्त एफडीआर को कूट रचित एवं फर्जी बताए जाने का उल्लेख किया गया है। कलेक्टर के पत्र में कहा गया है कि मिलर्स द्वारा खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 में समर्थन मूल्य पर उपार्जित धान की कस्टम मिलिंग के लिए जारी नीति की कंडिका 18 का जानबूझकर उल्लंघन किया गया। इसी आधार पर अमन यादव के विरुद्ध संबंधित थाने में प्राथमिकी दर्ज कराने के निर्देश दिए गए हैं।
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आदेश के बाद भी कार्रवाई पर सवाल

कलेक्टर स्तर से 15 सितंबर को प्राथमिकी दर्ज कराने का लिखित निर्देश जारी होने के बावजूद 24 सितंबर तक एफआईआर दर्ज नहीं होना प्रशासनिक कार्रवाई की गति पर सवाल खड़े कर रहा है। खास तौर पर तब, जब प्रकरण में करोड़ों रुपये मूल्य के चावल की लंबित मात्रा और 14 करोड़ रुपये की एफडीआर के फर्जी पाए जाने का उल्लेख सरकारी पत्र में किया गया है। अब सवाल यह है कि कलेक्टर के स्पष्ट निर्देश के बाद भी प्राथमिकी दर्ज कराने की प्रक्रिया दस दिनों से आगे क्यों नहीं बढ़ सकी।

पांच गुना वसूली का प्रावधान

कलेक्टर कार्यालय के पत्र के अनुसार बजरंग इंडस्ट्रीज द्वारा 285 लाट धान का उठाव किया गया था। इसके विरुद्ध केवल 44 लाट चावल जमा कराया गया। शेष 241 लाट यानी 69,916.5 क्विंटल चावल जमा नहीं कराया गया, जिसकी आर्थिक लागत 27.30 करोड़ रुपये बताई गई है। अनुबंध की कंडिका 9 के अनुसार कम पाई गई धान अथवा चावल की मात्रा की आर्थिक लागत के पांच गुना राशि की वसूली का प्रावधान बताया गया है। उपलब्ध पत्र के अनुसार इस आधार पर मिलर्स से करीब 136.5 करोड़ रुपये की वसूली अनुमानित है।

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