सीधी में 20 हजार टावर प्रभावित किसानों की चुप्पी पर सवाल
टावर लाइन मुआवजे को लेकर उमेश तिवारी ने उठाए सवाल

सीधी। टोंको-रोंको-ठोंको क्रांतिकारी मोर्चा के संयोजक उमेश तिवारी ने कहा है कि सीधी जिले में वर्ष 2015 से अब तक टावर लाइन और तार गलियारे से करीब 20 हजार किसान प्रभावित हुए हैं। उनका आरोप है कि पावर ग्रिड सहित संबंधित कंपनियों द्वारा शासन की निर्धारित गाइडलाइन के अनुरूप मुआवजा नहीं देकर मनमाने तरीके से नाममात्र की राशि का भुगतान किया जा रहा है। उन्होंने महान ट्रांसमिशन लिमिटेड पर भी किसानों के हितों की अनदेखी का आरोप लगाया है।
उमेश तिवारी ने कहा कि किसानों को निर्धारित मुआवजा दिलाने के लिए संघर्ष हेतु संगठित होने की अपील के बावजूद बड़ी संख्या में किसान सामने नहीं आ रहे हैं। उनका कहना है कि किसानों की चुप्पी का लाभ कंपनियों को मिल रहा है और कथित तौर पर मुआवजा भुगतान में मनमानी जारी है।
तिवारी के अनुसार भारत सरकार के विद्युत मंत्रालय, मध्य प्रदेश शासन के राजस्व विभाग तथा विद्युत मंत्रालय द्वारा जारी विभिन्न निर्देशों में टावर लाइन से प्रभावित भूमि के मुआवजे के निर्धारण और भुगतान की प्रक्रिया स्पष्ट की गई है। उन्होंने बताया कि 14 जून 2024 के केंद्रीय विद्युत मंत्रालय के पत्र, 17 नवंबर 2025 के मध्य प्रदेश शासन के राजस्व विभाग के पत्र तथा 15 दिसंबर 2025 के केंद्रीय विद्युत मंत्रालय के निर्देशों के अनुसार मुआवजा निर्धारण के लिए तीन सदस्यीय समिति का प्रावधान है।
उनका दावा है कि निर्धारित मुआवजा एकमुश्त और अग्रिम रूप से भुगतान किए जाने के बाद ही कंपनी द्वारा टावर निर्माण का कार्य किया जा सकता है। तिवारी के मुताबिक जिला प्रशासन से चर्चा के दौरान यह भी स्पष्ट किया गया कि मुआवजा किस्तों में दिए जाने का कोई प्रावधान नहीं है। ऐसे में किसानों को किसी भी प्रकार की जोर-जबरदस्ती या मुआवजा संबंधी अनियमितता होने पर जिला प्रशासन के समक्ष शिकायत करनी चाहिए।
किसानों ने अदालत में भी उठाई आवाज
उमेश तिवारी ने सतना जिले के टावर लाइन प्रभावित किसानों के संघर्ष का उदाहरण देते हुए बताया कि अमित गौतम वर्ष 2015 से किसानों के मुआवजे के लिए आंदोलन और न्यायालयीन लड़ाई लड़ रहे हैं। सतना, मैहर और उचेहरा क्षेत्र के किसानों के संघर्ष के बाद कलेक्टर सतना द्वारा वर्ष 2015 से टावर लाइन से प्रभावित किसानों को मुआवजा भुगतान के संबंध में आदेश जारी किया गया था। उन्होंने बताया कि कलेक्टर सतना के प्रकरण क्रमांक 19/अ74/2021-22 में 2 नवंबर 2021 को पारित आदेश के तहत 12 लाख रुपये प्रति टावर तथा 3 हजार रुपये प्रति रनिंग मीटर तार की दर से मुआवजा निर्धारण किया गया था। इस आदेश के विरुद्ध पावर ग्रिड कंपनी ने उच्च न्यायालय जबलपुर की एकल पीठ में रिट याचिका क्रमांक 9744/2022 दायर की, जिसे 2 अप्रैल 2025 को खारिज कर दिया गया। इसके बाद कंपनी द्वारा दायर रिट याचिका क्रमांक 1371/2025 को उच्च न्यायालय की द्वैध पीठ ने 1 सितंबर 2026 को खारिज कर दिया।
नई गाइडलाइन में 200 प्रतिशत मुआवजे का उल्लेख
तिवारी के अनुसार भारत सरकार के विद्युत मंत्रालय द्वारा 15 दिसंबर 2025 को जारी दिशा-निर्देशों में वर्ष 2015 की व्यवस्था में संशोधन करते हुए टावर लाइन से प्रभावित भूमि के लिए बाजार मूल्य के 200 प्रतिशत मुआवजे का प्रावधान किया गया है। उनका कहना है कि सीधी जिले के प्रभावित किसानों को भी निर्धारित प्रावधानों के अनुसार मुआवजा दिलाने के लिए प्रशासन को प्रभावी पहल करनी चाहिए। उन्होंने टावर लाइन से प्रभावित किसानों से अपील की कि वे अपनी भूमि, टावर और तार गलियारे से संबंधित मुआवजे के दस्तावेज सुरक्षित रखें तथा किसी भी तरह की कथित मनमानी होने पर जिला प्रशासन के समक्ष लिखित शिकायत प्रस्तुत करें।











































