निजी नर्सिंग होम भेजने के मामले में ईसी का सख्त फैसला, तीन वेतनवृद्धियां असंचयी प्रभाव से रोकीं

रीवा: श्याम शाह मेडिकल कॉलेज एवं संबद्ध अस्पताल में डॉक्टरों से जुड़े मामलों पर कार्यकारी परिषद (ईसी) ने कड़ा अनुशासनात्मक रुख अपनाया है। कार्यकारी परिषद की बैठक में लिए गए निर्णय के अनुसार डॉ. सोनम अग्रवाल की सेवाएं तत्काल प्रभाव से समाप्त करने का फैसला किया गया है। वहीं, प्रशासनिक आदेशों की अवहेलना से जुड़े मामले में डॉ. बीनू सिंह की तीन वार्षिक वेतनवृद्धियां असंचयी प्रभाव से रोकने की कार्रवाई की गई है।
सरकारी अस्पताल से निजी नर्सिंग होम भेजने का मामला
डॉ. सोनम अग्रवाल के खिलाफ शिकायत थी कि शासकीय अस्पताल में उपचार के लिए पहुंचे मरीज को निजी नर्सिंग होम में इलाज कराने की सलाह दी गई। मामले की शिकायत और जांच के बाद जांच समिति गठित की गई थी। उपलब्ध जानकारी के अनुसार समिति ने आरोपों की जांच कर अपनी रिपोर्ट में कार्रवाई की अनुशंसा की थी।
मामला गंभीर होने के कारण इसकी गूंज मध्यप्रदेश विधानसभा तक पहुंची थी। जांच पूरी होने के बाद भी कार्रवाई की प्रक्रिया लंबित रहने को लेकर सवाल उठते रहे। अब कार्यकारी परिषद के निर्णय के बाद मामले में विभागीय स्तर पर बड़ा कदम सामने आया है।
कल्पना मिश्रा प्रकरण से भी जुड़ा नाम
डॉ. सोनम अग्रवाल का नाम रीवा के चर्चित कल्पना मिश्रा प्रसूता मृत्यु प्रकरण में भी सामने आया था। इस मामले में उन्हें पहले ही निलंबित किए जाने की जानकारी सामने आई थी। प्रसूता और गर्भस्थ शिशु की मौत के बाद उपचार व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल उठे थे और मामले की जांच के लिए समिति गठित की गई थी।
एक ही डॉक्टर से जुड़े अलग-अलग मामलों में कार्रवाई सामने आने के बाद मेडिकल कॉलेज प्रशासन की कार्यप्रणाली और चिकित्सकीय जवाबदेही को लेकर भी चर्चा तेज हो गई है।
डॉ. बीनू सिंह की तीन इंक्रीमेंट रोकी गईं
कार्यकारी परिषद ने डॉ. बीनू सिंह के खिलाफ भी अनुशासनात्मक कार्रवाई की है। उन पर वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देशों और प्रशासनिक आदेशों की अवहेलना से संबंधित मामला था। परिषद ने तीन वार्षिक वेतनवृद्धियां असंचयी प्रभाव से रोकने का निर्णय लिया है। इसका अर्थ है कि रोकी गई वेतनवृद्धियों का लाभ भविष्य के वेतन में स्थायी रूप से नहीं जुड़ता।
ईसी के फैसले से डॉक्टरों में हलचल
मेडिकल कॉलेज में एक साथ दो डॉक्टरों के खिलाफ कार्रवाई से चिकित्सा एवं प्रशासनिक व्यवस्था में हलचल है। कार्यकारी परिषद के फैसले को अस्पताल में अनुशासन, सरकारी संसाधनों के उपयोग और मरीजों के उपचार से जुड़े नियमों के पालन के संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अब इन फैसलों के बाद कॉलेज प्रशासन की आगामी कार्रवाई पर भी नजर रहेगी.











































