फर्जी एफडीआर की जांच से लेकर धान उठाव और ऑनलाइन स्टॉक प्रविष्टि तक कई स्तरों पर उठ रहे सवाल

सीधी:नागरिक आपूर्ति निगम सीधी में सामने आए करीब 27.68 करोड़ रुपये के चावल घोटाले और 14 करोड़ रुपये के कथित फर्जी एफडीआर मामले में अब विभागीय स्तर पर कर्मचारियों की भूमिका को लेकर भी गंभीर सवाल उठने लगे हैं। विभागीय सूत्रों के अनुसार एफडीआर के परीक्षण और अभिलेखों की जांच की जिम्मेदारी एकाउंटेंट एमएल बडेरा, सहायक एकाउंटेंट शिखा सिंह बघेल तथा आउटसोर्स के माध्यम से अतिरिक्त एकाउंटेंट की जिम्मेदारी संभाल रहे नीलेश शुक्ला से जुड़ी थी। आरोप है कि कुछ कर्मचारियों ने सिहावल के हटवा में संचालित मिलर्स संचालक बजरंग इंडस्ट्रीज के प्रोपराइटर अमन यादव से मिलीभगत कर कथित रूप से फर्जी दस्तावेजों को अभिलेखों में शामिल किया। हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।
सूत्रों के अनुसार फर्जी एफडीआर के मामले में यह भी जांच का विषय है कि संबंधित दस्तावेजों का परीक्षण किस स्तर पर किया गया और यदि एफडीआर में गड़बड़ी थी तो वह जांच की प्रक्रिया से कैसे बची रही। आरोप यह भी लगाए जा रहे हैं कि सहायक एकाउंटेंट शिखा सिंह बघेल और नीलेश शुक्ला ने कथित तौर पर हटवा में संचालित मिलर्स संचालक बजरंग इंडस्ट्रीज के प्रोपराइटर अमन यादव के साथ सांठगांठ कर फर्जी एफडीआर को फाइल में लगाए रखा। हालांकि सुविधा शुल्क लेने संबंधी आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

वहीं, चावल घोटाले में शुभम पाठक की भूमिका को लेकर भी विभागीय सूत्र गंभीर सवाल उठा रहे हैं। बताया जा रहा है कि गोदाम से धान की डिलीवरी के लिए डिलीवरी चालान जारी करने की प्रक्रिया में शुभम पाठक की भूमिका थी और उनके द्वारा चालान उपलब्ध कराने के बाद ही गोदाम से धान का उठाव किया जाता था। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब हटवा में संचालित मिलर्स संचालक बजरंग इंडस्ट्रीज के प्रोपराइटर अमन यादव द्वारा 110 लॉट धान का चावल जमा नहीं कराया गया था, तब उसके बाद के लॉट का धान उठाने के लिए चालान किसके निर्देश पर जारी किए गए।110 लॉट के बाद भी
धान उठाव कैसे हुआ
चावल घोटाले की जांच में यह बिंदु अहम माना जा रहा है कि जब 110 लॉट धान का चावल हटवा में संचालित मिलर्स संचालक बजरंग इंडस्ट्रीज के प्रोपराइटर अमन यादव
द्वारा जमा नहीं किया गया था, तब आगे के लॉट के लिए धान उठाव की अनुमति किस स्तर से मिली। यदि पूर्व लॉट का हिसाब लंबित था तो अगले लॉट के लिए चालान जारी करने की प्रक्रिया किस नियम के तहत अपनाई गई, यह जांच का महत्वपूर्ण विषय है।
ऑनलाइन स्टॉक घटाने की प्रक्रिया पर भी सवाल
कार्यालय से जुड़े संदीप द्विवेदी पर भी धान उठाव और ऑनलाइन स्टॉक प्रविष्टि को लेकर गंभीर आरोप लगाए जा रहे हैं। सूत्रों का दावा है कि धान का उठाव होने के बाद कंप्यूटर में ऑनलाइन स्टॉक से धान की मात्रा कम करने की प्रक्रिया समय पर नहीं की जाती थी। यदि ऐसा हुआ है तो वास्तविक भौतिक स्टॉक और अभिलेखीय स्टॉक में अंतर की जानकारी वरिष्ठ अधिकारियों तक समय पर क्यों नहीं पहुंची, इसकी जांच आवश्यक है। आरोप है कि इनके द्वारा हटवा में संचालित मिलर्स संचालक बजरंग इंडस्ट्रीज के प्रोपराइटर अमन यादव से मिलकर इस तरह का खेल जानबूझकर खेला गया था।
जांच के बाद ही तय होगी जिम्मेदारी
हटवा में संचालित मिलर्स संचालक बजरंग इंडस्ट्रीज के प्रोपराइटर अमन यादव द्वारा नागरिक आपूर्ति निगम सीधी को उपलब्ध कराई गई फर्जी एफडीआर मामले में वास्तविक दोषी कौन है और चावल घोटाले में किस कर्मचारी की कितनी भूमिका रही, यह जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा। फिलहाल विभागीय सूत्रों के आरोपों ने नागरिक आपूर्ति निगम के कई कर्मचारियों की भूमिका को जांच के दायरे में ला दिया है। अब निगाहें वरिष्ठ अधिकारियों और कलेक्टर विकास मिश्रा की कार्रवाई पर हैं कि पूरे मामले में दस्तावेजों और प्रक्रिया की जांच कर जिम्मेदार पाए जाने वाले अधिकारियों-कर्मचारियों के विरुद्ध क्या कदम उठाया जाता है।











































