
मुंबई। बाबा नीब करौरी के जीवन पर आधारित फिल्म ‘हनुमान अंश’ ने बॉक्स ऑफिस पर ऐसा प्रदर्शन किया है, जिसने फिल्म इंडस्ट्री को हैरान कर दिया है। महज 10 लाख रुपये की शुरुआती कमाई से आगे बढ़ी इस फिल्म ने अब 200 करोड़ रुपये का आंकड़ा पार कर लिया है।
डॉक्टर से फिल्म निर्देशक बने विशाल चतुर्वेदी के निर्देशन में बनी इस फिल्म में शोभिनव सत्या मुख्य भूमिका में हैं। 7 अगस्त को रिलीज के समय फिल्म को सिर्फ 250 स्क्रीन मिली थीं, लेकिन दर्शकों की बढ़ती दिलचस्पी के बाद इसकी स्क्रीन संख्या बढ़कर करीब 2,000 तक पहुंच गई।
तीसरे सप्ताह बदली फिल्म की किस्मत
फिल्म की शुरुआत बॉक्स ऑफिस पर काफी सामान्य रही थी। पहले सप्ताह के बाद इसकी कमाई में गिरावट भी दर्ज की गई। हालात ऐसे बन गए थे कि तीसरे सप्ताह में फिल्म को कई सिनेमाघरों से हटाने की स्थिति आ गई थी।
इसके बाद अचानक दर्शकों का रुझान फिल्म की ओर बढ़ने लगा और तीसरे सप्ताह से इसकी कमाई ने रफ्तार पकड़ ली। चौथे और पांचवें सप्ताह में फिल्म ने शानदार प्रदर्शन करते हुए 200 करोड़ रुपये का आंकड़ा पार कर लिया।
फिल्म के प्रदर्शन को लेकर पीवीआर आईनॉक्स के अधिकारी कमल ज्ञानचंदानी ने इसे एक असाधारण उदाहरण बताया। उनके मुताबिक, फिल्म से शुरुआत में ऐसी सफलता की उम्मीद नहीं थी।
बाबा नीब करौरी के जीवन पर आधारित है फिल्म
‘हनुमान अंश’ उत्तराखंड के प्रसिद्ध संत बाबा नीब करौरी के जीवन से प्रेरित है। उनके भक्तों में देश-विदेश की कई चर्चित हस्तियों के नाम भी शामिल रहे हैं। फिल्म में उनके जीवन और आध्यात्मिक प्रभाव को केंद्र में रखा गया है।
बाबा नीब करौरी का वास्तविक नाम लक्ष्मण नारायण शर्मा बताया जाता है। उनका जन्म उत्तर प्रदेश के फिरोजाबाद जिले में हुआ था और बाद में उन्होंने संन्यासी जीवन अपना लिया। उनके अनुयायी उन्हें भगवान हनुमान का भक्त और अवतार मानते हैं।
धार्मिक फिल्मों की बढ़ती लोकप्रियता पर चर्चा
‘हनुमान अंश’ की सफलता ने एक बार फिर धार्मिक और आध्यात्मिक विषयों पर बनी फिल्मों की लोकप्रियता को चर्चा में ला दिया है। इससे पहले ‘जय संतोषी मां’, ‘शिरडी के साईं बाबा’ और हाल के वर्षों में ‘महावतार नरसिंह’ जैसी फिल्मों ने भी दर्शकों के बीच मजबूत पकड़ बनाई है।
फिल्म इतिहासकारों का मानना है कि भारतीय सिनेमा में धार्मिक और पौराणिक फिल्मों का दर्शकों से जुड़ाव काफी पुराना है। ‘जय संतोषी मां’ ने भी 1975 में उस दौर में बड़ी सफलता हासिल की थी, जब ‘शोले’ जैसी चर्चित फिल्म सिनेमाघरों में मौजूद थी।
युवाओं से लेकर बुजुर्गों तक पहुंची फिल्म
फिल्म से जुड़े लोगों के मुताबिक, ‘हनुमान अंश’ की खास बात यह है कि इसे केवल बुजुर्ग दर्शकों ने ही नहीं, बल्कि युवाओं ने भी पसंद किया। फिल्म की सफलता के पीछे इसकी कहानी, सांस्कृतिक जुड़ाव और आध्यात्मिक विषय को अहम कारण माना जा रहा है।
कुछ सिनेमाघरों में फिल्म के प्रदर्शन के दौरान दर्शकों की धार्मिक भावनाओं को देखते हुए विशेष माहौल भी बनाया जा रहा है। कई जगह फिल्म शुरू होने से पहले हनुमान चालीसा बजाए जाने की जानकारी सामने आई है।
‘हनुमान अंश’ की सफलता ने यह सवाल भी खड़ा किया है कि क्या भारतीय दर्शकों के बीच धार्मिक और सांस्कृतिक विषयों पर आधारित फिल्मों के लिए एक नया दौर बन रहा है। हालांकि फिल्म उद्योग से जुड़े विशेषज्ञ इसे फिलहाल कोई नया ट्रेंड घोषित करने से बच रहे हैं।











































