ब्रेकिंग न्यूज़दिल्लीफ़्लैश न्यूज़भोपालमध्य प्रदेश

₹2,000 से अधिक के UPI भुगतान पर शुल्क का विरोध, पेट्रोल पंप डीलरों ने दी नकद भुगतान पर लौटने की चेतावनी

Screenshot 2022 03 30 at 8.36.20 AM

विंध्यभूमि,नई दिल्ली। पेट्रोल पंपों पर ₹2,000 या उससे अधिक के यूपीआई भुगतान पर प्रस्तावित ₹5 मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) को लेकर देशभर के पेट्रोलियम डीलरों में नाराजगी है। डीलरों ने चेतावनी दी है कि यदि उन्हें इस शुल्क से राहत नहीं मिली, तो वे बड़े यूपीआई लेनदेन स्वीकार करना बंद कर सकते हैं और ग्राहकों को नकद भुगतान की ओर लौटना पड़ सकता है। उनका तर्क है कि अतिरिक्त शुल्क से पहले से सीमित मुनाफे वाले पेट्रोलियम कारोबार पर आर्थिक दबाव और बढ़ेगा।

कम मार्जिन में कारोबार, अतिरिक्त शुल्क से बढ़ेगी परेशानी

दिल्ली-एनसीआर, पंजाब, उत्तर प्रदेश, मुंबई, कर्नाटक और राजस्थान के पेट्रोल पंप संचालकों ने हिंदुस्तान टाइम्स से बातचीत में कहा कि किसी भी प्रकार का एमडीआर उनके लिए अतिरिक्त खर्च है। डीलरों को पेट्रोल और डीजल की बिक्री पर लगभग ₹2.40 से ₹3.40 प्रति लीटर तक का मार्जिन मिलता है। यह मार्जिन सरकार की तेल विपणन कंपनियों के माध्यम से निर्धारित किया जाता है।

फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया पेट्रोलियम ट्रेडर्स (एफएआईपीटी) के प्रवक्ता मोंटी सहगल ने कहा कि यदि ईंधन विक्रेताओं को एमडीआर से छूट नहीं दी गई, तो उन्हें ₹2,000 या उससे अधिक के यूपीआई भुगतान स्वीकार करना बंद करने का विकल्प अपनाना पड़ सकता है।

देश में एक लाख से ज्यादा पेट्रोल पंप

अप्रैल 2026 तक देश में पेट्रोल पंपों की कुल संख्या 1,03,023 बताई गई है। इनमें 90 प्रतिशत से अधिक आउटलेट इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन (IOC), भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड (BPCL) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड (HPCL) जैसी सरकारी तेल कंपनियों से जुड़े हैं। शेष पेट्रोल पंप नायरा, जियो-बीपी और शेल जैसी निजी कंपनियों के हैं।

अखिल कर्नाटक फेडरेशन ऑफ पेट्रोलियम ट्रेडर्स (AKFPT) ने केंद्र सरकार और सरकारी तेल कंपनियों को पत्र भेजकर पेट्रोल पंपों को एमडीआर के दायरे से बाहर रखने की मांग की है। संगठन का कहना है कि पेट्रोलियम कारोबार की तुलना सामान्य खुदरा दुकानों से नहीं की जा सकती।

कीमतें तय करने का अधिकार डीलरों के पास नहीं

पेट्रोलियम डीलरों के संगठनों के मुताबिक, पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतें संबंधित तेल विपणन कंपनियों द्वारा तय की जाती हैं। डीलरों को निर्धारित कमीशन और मार्जिन के आधार पर कारोबार करना पड़ता है। ऐसे में डिजिटल भुगतान पर लगने वाले अतिरिक्त शुल्क की भरपाई के लिए वे अपनी मर्जी से ईंधन की कीमतें नहीं बढ़ा सकते।

डीलरों का कहना है कि भुगतान स्वीकार करने की लागत बढ़ने पर उसका सीधा असर उनके मुनाफे पर पड़ेगा।

रोजाना ₹230 से ₹250 तक अतिरिक्त खर्च का दावा

उत्तर प्रदेश के पेट्रोल पंप डीलर और एम्पावरिंग पेट्रोलियम डीलर्स फाउंडेशन (EPDF) के सदस्य हेमंत सिरोही ने यूपीआई लेनदेन के उपलब्ध आंकड़ों के आधार पर अनुमान जताया कि देशभर के पेट्रोल पंपों पर प्रतिदिन लगभग 2.39 करोड़ यूपीआई भुगतान होते हैं। इन लेनदेन की कुल राशि करीब ₹1,573 करोड़ बताई गई है।

उनके अनुसार, इनमें लगभग 20 प्रतिशत भुगतान ₹2,000 से अधिक के हो सकते हैं। इस आधार पर एक पेट्रोल पंप संचालक पर रोजाना करीब ₹230 से ₹250 तक का अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ने का अनुमान है। डीलरों का कहना है कि पहले से बढ़ती परिचालन लागत के बीच यह शुल्क उनके लिए मुश्किलें बढ़ा सकता है।

एमडीआर की जिम्मेदारी तेल कंपनियों पर डालने का भी विरोध

मुंबई और नई दिल्ली के कुछ पेट्रोल पंप संचालकों ने ईंधन कारोबार के लिए एमडीआर पूरी तरह समाप्त करने की मांग की है। उनका कहना है कि इस शुल्क का भार तेल विपणन कंपनियों पर डालना भी स्थायी समाधान नहीं होगा, क्योंकि तेल कंपनियां भुगतान सेवा उपलब्ध कराने वाली कंपनियों के साथ काम करती हैं।

कुछ डीलरों ने आरोप लगाया कि उन्हें पहले भी भुगतान सेवा प्रदाताओं से जुड़ी परेशानियों का सामना करना पड़ा है। उनका दावा है कि कुछ मौकों पर सप्ताहांत में भुगतान जमा होने में देरी हुई, जिससे कारोबार प्रभावित हुआ।

एनपीसीआई ने यूपीआई शुल्क को लेकर स्थिति स्पष्ट की

भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम (NPCI) ने मंगलवार को जारी अक्सर पूछे जाने वाले सवालों में पेट्रोल पंपों पर यूपीआई के माध्यम से ईंधन खरीदने पर लागू एमडीआर व्यवस्था की जानकारी दी।

एनपीसीआई के अनुसार, पेट्रोल पंपों पर ₹2,000 से अधिक के यूपीआई भुगतान के लिए ₹5 का रियायती शुल्क लागू होगा। संस्था का कहना है कि यह निर्धारित शुल्क ईंधन खरीद जैसे लेनदेन पर लगने वाले अधिक प्रोसेसिंग शुल्क की तुलना में कम है।

वहीं, ₹2,000 से कम के ईंधन भुगतानों पर एमडीआर शून्य रहेगा। इसका मतलब है कि इस सीमा से कम के यूपीआई भुगतान पर ग्राहकों और पेट्रोल पंप संचालकों से कोई एमडीआर नहीं लिया जाएगा।

पेट्रोलियम डीलरों ने मांगी पूरी तरह शुल्कमुक्त व्यवस्था

ऑल इंडिया पेट्रोलियम डीलर्स एसोसिएशन ने 16 सितंबर को सरकार को पत्र भेजकर ₹2,000 से अधिक के यूपीआई लेनदेन पर पेट्रोल पंप संचालकों को पूरी तरह एमडीआर से मुक्त करने की मांग की।

एसोसिएशन का कहना है कि पेट्रोल और डीजल आवश्यक वस्तुओं में शामिल हैं तथा इनकी खरीदारी में अक्सर बड़ी राशि का भुगतान किया जाता है। पेट्रोल पंपों पर ₹2,000 से अधिक के लेनदेन आम हैं और ग्राहक बड़ी संख्या में यूपीआई का इस्तेमाल करते हैं। ऐसे में डीलरों पर अतिरिक्त शुल्क लगाना उनके कारोबार के लिए नुकसानदायक हो सकता है।

What's your reaction?

Related Posts

Epaper