भोपालमध्य प्रदेश

डिजिटल शिक्षा की राह में बिजली का अड़ंगा, प्रदेश के 7,500 सरकारी स्कूल अब भी बिना कनेक्शन।

मध्य प्रदेश के सरकारी स्कूलों में बिजली कनेक्शन की स्थिति।

भोपाल। मध्यप्रदेश में सरकारी स्कूलों को आधुनिक और डिजिटल शिक्षा से जोड़ने की तैयारी के बीच बड़ी संख्या में विद्यालय अभी भी बिजली जैसी बुनियादी सुविधा से वंचित हैं। नए शैक्षणिक सत्र के करीब दो महीने बीतने के बावजूद प्रदेश के लगभग 7,500 प्राथमिक और माध्यमिक स्कूलों में बिजली कनेक्शन नहीं हो सका है। इससे विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित होने के साथ प्रस्तावित स्मार्ट क्लास योजना की रफ्तार पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।
स्कूल शिक्षा विभाग ने शैक्षणिक सत्र शुरू होने से पहले करीब 10,800 सरकारी स्कूलों में बिजली कनेक्शन उपलब्ध कराने का लक्ष्य निर्धारित किया था। उपलब्ध जानकारी के अनुसार अब तक लगभग 2,532 स्कूलों में कनेक्शन दिए जा चुके हैं, जबकि शेष विद्यालयों में प्रक्रिया जारी है।
कई जिलों में स्थिति गंभीर
बिजली कनेक्शन से वंचित विद्यालयों में बड़ी संख्या प्राथमिक और माध्यमिक स्कूलों की बताई जा रही है। धार, रीवा, सतना, पन्ना, रायसेन और खरगोन सहित कई जिलों में ऐसे स्कूलों की संख्या अधिक होने की जानकारी सामने आई है। राजधानी भोपाल के कुछ ग्रामीण एवं बाहरी क्षेत्रों के सरकारी स्कूल भी अभी इस सुविधा का इंतजार कर रहे हैं।
96 करोड़ की स्मार्ट क्लास योजना पर असर
सरकार की डिजिटल शिक्षा योजना के तहत प्रदेश के 4,010 सरकारी स्कूलों में 8,020 नई स्मार्ट क्लास शुरू करने की योजना है। इसके लिए करीब 96.24 करोड़ रुपये का बजट प्रस्तावित है। लेकिन जिन विद्यालयों में बिजली उपलब्ध नहीं है, वहां डिजिटल बोर्ड, प्रोजेक्टर और अन्य इलेक्ट्रॉनिक संसाधनों का उपयोग मुश्किल है।
वर्तमान में प्रदेश के 908 स्कूलों में 9,401 स्मार्ट क्लास संचालित होने की जानकारी दी गई है। प्रस्तावित नई स्मार्ट क्लास शुरू होने के बाद बड़ी संख्या में सरकारी विद्यालय डिजिटल शिक्षा से जुड़ेंगे। ऐसे में बिजली कनेक्शन में देरी इस योजना के क्रियान्वयन को प्रभावित कर सकती है।
बिजली, वायरिंग और रोशनी के लिए बजट
स्कूल शिक्षा विभाग की ओर से विद्यालयों में बिजली कनेक्शन, वायरिंग और प्रकाश व्यवस्था के लिए स्थानीय स्तर पर राशि उपलब्ध कराई गई है। पिछले वर्ष शौचालय, पेयजल और बिजली जैसी मूलभूत सुविधाओं के लिए करीब 200 करोड़ रुपये स्वीकृत किए जाने की बात सामने आई थी।
विभाग का कहना है कि शेष स्कूलों में बिजली कनेक्शन उपलब्ध कराने के लिए बिजली वितरण कंपनियों के साथ समन्वय किया जा रहा है। सरकार का लक्ष्य अधिक से अधिक मिडिल स्कूलों में स्मार्ट क्लास शुरू करना है, जिसके लिए बिजली की उपलब्धता अनिवार्य है।
बुनियादी सुविधा के बिना डिजिटल शिक्षा की चुनौती
गर्मी के मौसम में बिजली नहीं होने से विद्यार्थियों और शिक्षकों को पंखे जैसी सामान्य सुविधाओं से भी वंचित रहना पड़ता है। वहीं स्मार्ट क्लास और डिजिटल उपकरणों के संचालन के लिए नियमित बिजली आवश्यक है। ऐसे में डिजिटल शिक्षा के विस्तार से पहले सभी सरकारी स्कूलों में बिजली जैसी मूलभूत सुविधा उपलब्ध कराना विभाग के सामने अहम चुनौती बनी हुई है।

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