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जबलपुर : पत्नी की मौत के बाद बेबस था मजदूर, अंतिम संस्कार के लिए भी नहीं थे पैसे; नर्स ने दिखाई इंसानियत

जबलपुर में पत्नी के अंतिम संस्कार के लिए मदद करती नर्स और सामाजिक कार्यकर्ता

जबलपुर। आर्थिक तंगी किस तरह इंसान को मजबूरी के ऐसे मोड़ पर ला सकती है, जहां उसके पास अपनों के अंतिम संस्कार तक के लिए पैसे न हों, इसका मार्मिक मामला जबलपुर में सामने आया है। पत्नी की मौत के बाद एक मजदूर पति अंतिम संस्कार की व्यवस्था नहीं कर पा रहा था। हालात से परेशान होकर वह शव को नर्मदा में प्रवाहित करने की तैयारी में था, लेकिन अस्पताल की एक नर्स की नजर उस पर पड़ गई और समय रहते उसकी मदद की गई।
जानकारी के मुताबिक, मगरमुहा गांव निवासी 51 वर्षीय श्याम विश्वकर्मा मजदूरी कर परिवार का भरण-पोषण करते हैं। उनकी पत्नी आरती विश्वकर्मा करीब छह महीने पहले सड़क हादसे में घायल हुई थीं। इसके बाद उनका लंबे समय तक इलाज चला। इलाज में परिवार की जमा पूंजी खर्च हो गई और आर्थिक स्थिति लगातार कमजोर होती चली गई।
पत्नी की मौत के बाद सामने आया सबसे बड़ा संकट
इलाज के दौरान जिला अस्पताल में आरती की मौत हो गई। पत्नी के निधन के बाद श्याम के सामने अंतिम संस्कार की व्यवस्था का संकट खड़ा हो गया। आर्थिक स्थिति इतनी खराब थी कि उनके पास अंतिम संस्कार के लिए आवश्यक खर्च तक नहीं था।
बताया गया कि इसी मजबूरी में वह पत्नी के शव को लेकर अस्पताल से निकलने की तैयारी कर रहे थे। इसी दौरान एक नर्स ने उन्हें रोककर स्थिति के बारे में जानकारी ली। बातचीत में आर्थिक परेशानी सामने आने के बाद नर्स ने मदद के लिए सामाजिक संस्था से जुड़े लोगों से संपर्क किया।

सामाजिक कार्यकर्ता ने संभाली जिम्मेदारी

नर्स ने मामले की जानकारी गरीब नवाज कमेटी से जुड़े इनायत अली को दी। सूचना मिलते ही उन्होंने अस्पताल पहुंचकर श्याम से बातचीत की और परिवार की स्थिति को समझा। इसके बाद पत्नी के अंतिम संस्कार की व्यवस्था में सहायता की गई।

ग्वारीघाट में हुआ अंतिम संस्कार

मदद मिलने के बाद आरती विश्वकर्मा का ग्वारीघाट में अंतिम संस्कार कराया गया। आर्थिक मजबूरी के कारण जिस परिवार के सामने पत्नी के शव की अंतिम विदाई तक का संकट खड़ा हो गया था, उसे समय पर मिली मदद से अंतिम संस्कार संभव हो सका।
यह घटना एक ओर गरीबी और महंगे इलाज के कारण कमजोर परिवारों के सामने खड़ी मुश्किलों को सामने लाती है, वहीं दूसरी ओर अस्पताल की नर्स और मदद के लिए आगे आए लोगों की संवेदनशील पहल भी चर्चा में है।

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