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यूपी 2027 की तैयारी में BJP का योगी कार्ड, 115 विधानसभा सीटों पर खास फोकस

योगी आदित्यनाथ उत्तर प्रदेश में 2027 चुनाव की तैयारी

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर सियासी तैयारियां तेज हो गई हैं। सत्ता में वापसी की कोशिश कर रही भाजपा के सामने बेरोजगारी, युवाओं की नाराजगी और जातीय समीकरण जैसी कई चुनौतियां हैं। ऐसे माहौल में पार्टी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व और उनके चेहरे को अपनी चुनावी रणनीति के केंद्र में रखने की दिशा में आगे बढ़ती दिखाई दे रही है।

भाजपा के लिए उत्तर प्रदेश इसलिए भी बेहद महत्वपूर्ण है क्योंकि देश की राजनीति में मजबूत स्थिति बनाए रखने के लिए राज्य की सत्ता पर पकड़ अहम मानी जाती है। इसी को देखते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में अपने दौरे और जनसंपर्क गतिविधियां बढ़ा दी हैं।

कल्याणकारी योजनाओं के जरिए युवाओं और कर्मचारियों पर नजर

योगी सरकार की ओर से चुनाव से पहले ऐसे फैसलों पर जोर दिया जा रहा है जिनका सीधा प्रभाव अलग-अलग वर्गों पर पड़ सकता है। इनमें करीब 3.5 लाख आउटसोर्स कर्मचारियों और उनके परिवारों के हितों से जुड़े कदम शामिल हैं।

इसके अलावा सरकार ने छह महीने के भीतर एक लाख युवाओं को नियुक्ति पत्र देने का फैसला किया है। आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं की आय बढ़ाने से जुड़ा ऐलान भी सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल रहा है।

भाजपा को उम्मीद है कि इन फैसलों के जरिए युवाओं, कर्मचारियों और महिला वर्ग के बीच सरकार की पहुंच मजबूत की जा सकती है।

हिंदुत्व और कानून-व्यवस्था को बनाया जा सकता है चुनावी आधार

भाजपा के भीतर योगी आदित्यनाथ को लेकर अलग-अलग मत होने की चर्चा भले ही होती रही हो, लेकिन वह दो कार्यकाल पूरे करने वाले मुख्यमंत्री बन चुके हैं। ऐसे में 2027 के चुनाव में पार्टी एक बार फिर उनके नेतृत्व को आगे रखने की रणनीति अपना सकती है।

योगी आदित्यनाथ को भाजपा के हिंदुत्व के प्रमुख चेहरों में गिना जाता है। ऐसे में यदि विपक्ष की ओर से जातीय समीकरणों को चुनावी मुद्दा बनाया जाता है तो भाजपा उनके नेतृत्व के जरिए हिंदुत्व और कानून-व्यवस्था को प्रमुख मुद्दे के रूप में सामने रख सकती है।

कानून-व्यवस्था के मुद्दे पर योगी सरकार की छवि को भी पार्टी अपनी रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा मानती है। भाजपा को उम्मीद है कि इसका असर महिला मतदाताओं समेत दूसरे वर्गों पर भी पड़ सकता है।

115 विधानसभा क्षेत्रों पर मुख्यमंत्री के दौरों का फोकस

योगी आदित्यनाथ पिछले कुछ महीनों से लगातार प्रदेश के अलग-अलग जिलों का दौरा कर रहे हैं। इन दौरों में विकास परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास करने के साथ ही वह राजनीतिक संदेश भी देते नजर आ रहे हैं।

मई से अब तक मुख्यमंत्री प्रदेश के 75 में से 44 से अधिक जिलों का दौरा कर चुके हैं। इन दौरों के दौरान उन्होंने 115 विधानसभा क्षेत्रों से जुड़ी परियोजनाओं का उद्घाटन या शिलान्यास किया है।

इन 115 विधानसभा क्षेत्रों में करीब 58 प्रतिशत सीटें ऐसी हैं, जहां 2024 के लोकसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी और कांग्रेस गठबंधन को बढ़त मिली थी। यही वजह है कि भाजपा इन क्षेत्रों में अपनी पकड़ मजबूत करने पर विशेष ध्यान दे रही है।

2024 में गठबंधन को मिली थी 67 सीटों पर बढ़त

2024 के लोकसभा चुनाव के विधानसभा क्षेत्रवार आंकड़ों के मुताबिक, इन 115 विधानसभा क्षेत्रों में सपा-कांग्रेस गठबंधन को 67 सीटों पर बढ़त मिली थी। इनमें समाजवादी पार्टी 54 विधानसभा क्षेत्रों में आगे रही, जबकि कांग्रेस को 13 सीटों पर बढ़त मिली।

इसके मुकाबले भाजपा 47 विधानसभा क्षेत्रों में आगे रही थी। उसकी सहयोगी राष्ट्रीय लोकदल को एक विधानसभा क्षेत्र में बढ़त मिली थी।

हालांकि 2022 के विधानसभा चुनाव में तस्वीर अलग थी। उस समय इन 115 सीटों में भाजपा ने 71 पर जीत दर्ज की थी। अपना दल सोनेलाल ने तीन और निषाद पार्टी ने दो सीटों पर जीत हासिल की थी। समाजवादी पार्टी को 33 सीटें मिली थीं, जबकि आरएलडी और सुभासपा ने क्रमशः तीन और दो सीटें जीती थीं। कांग्रेस के खाते में एक सीट गई थी।

43 लोकसभा सीटों पर भी नजर

इन 115 विधानसभा क्षेत्रों के अंतर्गत 43 लोकसभा सीटें आती हैं। 2024 के लोकसभा चुनाव में इनमें से 21 सीटों पर समाजवादी पार्टी ने जीत दर्ज की थी, जबकि कांग्रेस ने तीन सीटें जीती थीं। भाजपा और उसके सहयोगी दलों को 19 लोकसभा सीटों पर सफलता मिली थी।

समाजवादी पार्टी ने मैनपुरी, इटावा, आजमगढ़, फिरोजाबाद, रामपुर, गाजीपुर, फतेहपुर, अंबेडकर नगर, श्रावस्ती, कैराना और जालौन जैसी सीटों पर जीत हासिल की थी।

वहीं भाजपा ने आगरा, गोरखपुर, अमरोहा, बुलंदशहर, गाजियाबाद, कुशीनगर, पीलीभीत, हाथरस, गौतम बुद्ध नगर, देवरिया, अलीगढ़, झांसी और महाराजगंज जैसी सीटों पर जीत दर्ज की थी। राष्ट्रीय लोकदल को बागपत और बिजनौर में सफलता मिली थी।

2027 के लिए अभी से सियासी जमीन तैयार करने की कोशिश

इन आंकड़ों से साफ है कि भाजपा के लिए 2024 में विपक्षी गठबंधन के मजबूत प्रदर्शन वाले विधानसभा क्षेत्रों को दोबारा अपने पक्ष में लाना बड़ी चुनौती होगी। यही कारण है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के लगातार दौरे, विकास परियोजनाओं के उद्घाटन और जनसंपर्क को चुनावी रणनीति से जोड़कर देखा जा रहा है।

अब देखना होगा कि 2027 के विधानसभा चुनाव तक भाजपा योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व, सरकार की योजनाओं और हिंदुत्व-कानून व्यवस्था के मुद्दों के सहारे विपक्ष की जातीय रणनीति और युवाओं से जुड़े सवालों का कितना प्रभावी मुकाबला कर पाती है।

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