सीधी

जिला अस्पताल में बेड न मिलने पर प्रायवेट अस्पताल में मरीज को ले गए परिजन

हांथ में ड्रिप लगाकर अस्पताल में भटकती रही महिला

सामु.स्वास्थ्य केंद्र सेमरिया से रेफर हुई थी मरीज

जिला अस्पताल सीधी में ड्रिप लगी महिला को परिजन सहारा देकर ले जाते हुए

सीधी:ने को मिली। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र सेमरिया से रेफर होकर जिला अस्पताल लाई गई गोड़ाही निवासी राजकली कुशवाहा के हांथ में बाटल लगी हुई थी और परिजन उसे सहारा देकर जिला अस्पताल लेकर पहुचे। जिला अस्पताल में ड्रिप लगी महिला को पकडक़र ले जा रहे परिजनों की परेशानी देखकर वीडियो भी बनाया गया जो सोशल मीडिया में काफी तेजी से वायरल हो रहा है। यहां काफी भटकने के बाद यह बताया गया कि नए भवन में भर्ती करने के लिए मरीज को ले जाएं। महिला मरीज को स्टे्रचर तक न मिलने से करीब 100 मीटर हांथ में ड्रिप लगी होने के बाद परिजन पकडक़र नए अस्पताल भवन में ले गए। यहां भी बताया गया कि बेड नहीं है। मजबूरी में महिला मरीज कमजोरी के चलते फर्श में ही लेट गई।

मरीज राजकली ने बताया कि गुरुवार सुबह अचानक उसकी तबियत खराब हुई थी इसके बाद परिजन उपचार के लिए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र सेमरिया ले गए। वहां तबियत ज्यादा बिगडऩे पर जिला अस्पताल सीधी भेजा गया। जिला अस्पताल के नए भवन में स्थित महिला वार्ड भर्ती होने के लिए भेजा गया लेकिन वहां बेड नहीं मिला। अस्पताल का कोई कर्मचारी भी कमजोरी हालत में लाई गई महिला की मदद के लिए नजर नहीं आया। मजबूरी में परिजन निजी अस्पताल लेकर रवाना हुए। दरअसल जिला अस्पताल सीधी में करीब एक माह से मरीजों की संख्या काफी ज्यादा बढऩे के कारण यहां बेड का भारी अभाव बना हुआ है। हालात यह है कि गंभीर मरीजों को भी अस्पताल में बेड देने की कोई व्यवस्था नहीं है।

मौसमी बीमारियों के चलते सबसे ज्यादा व्यस्त जिला अस्पताल का मेडिकल वार्ड है। यहां की स्थिति यह है कि मरीजों को फर्श में ही भर्ती कर इंजेक्शन एवं बाटल चढ़ाए जा रहे हैं। मरीज एवं उनके परिजन मजबूरी के चलते जैसे भी हो उपचार कराने में जुटे हुए हैं। चर्चा के दौरान जिला अस्पताल के कुछ मरीज एवं उनके परिजनों का कहना था कि यहां की अव्यवस्था कभी दूर नहीं होगी। जिम्मेदार लोग कभी निरीक्षण करने भी नहीं आते

मरीजों के प्रति नहीं दिखती सहानुभूति

जिला अस्पताल में पदस्थ डॉक्टर एवं स्वास्थ्य कर्मियों का कार्य व्यवहार अधिकांश मरीजों एवं उनके परिजनों के प्रति सही नहीं रहता। स्थिति यह रहती है कि दूर-दूर से आने वाले मरीज एवं उनके परिजन छोटी-छोटी स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए भटकते रहते हैं लेकिन यहां पदस्थ जिम्मेदार स्वास्थ्य अमला पूरी तरह से अपनी मनमानी में मस्त रहता है। छोटे कर्मचारी भी मरीजों एवं उनके परिजनों के प्रति सहानुभूति नहीं रखते। वरिष्ट डॉक्टरों की मनमानी तो और भी ज्यादा है। वह अस्पताल केवल ऑनलाईन अपनी उपस्थिति दर्ज करने के लिए आते हैं।

इसके बाद ड्यूटी कहां करते हैं इसकी जानकारी लोगों को नहीं मिलती। कुछ नए डॉक्टर अवश्य आउटडोर में बैठकर मरीजों को देखने की औपचारिकताएं निभाते हैं। वर्तमान में मौसमी बीमारियों का कहर बरपने के कारण मरीजों की काफी भीड़ जिला अस्पताल में उमड़ रही है। यहां आउटडोर में डॉक्टर को दिखाने से पहले पर्ची कटवाने में ही लोगों की काफी फजीहत हो जाती है। पर्ची काटने की जिम्मेदारी ऐसे कर्मचारियों को सौंपी गई है जो कि जानबूझकर मरीजों एवं उनके परिजनों को परेशान करते हैं. काउंटर में कम से कम 3 जगह से सुबह के समय पर्ची काटने की व्यवस्था होनी चाहिए लेकिन दो जगह से भी पर्ची मनमानी तौर पर कटती है.

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