शिक्षा के साथ संस्कार और संस्कृति का संदेश देंगे लीला के राजा

सीधी। गणेश चतुर्थी के पावन अवसर पर लीला इंटरनेशनल स्कूल में भगवान श्री गणेश जी की भव्य स्थापना “लीला के राजा” के रूप में की जा रही है। इस विशेष आयोजन को लेकर विद्यालय परिवार के साथ-साथ क्षेत्रवासियों में भी उत्साह का वातावरण है। विद्यालय परिसर में भगवान गणेश जी की स्थापना के साथ विशेष पूजा-अर्चना, आरती एवं भजन संध्या का आयोजन किया जाएगा। स्थापना समारोह में क्षेत्रीय विधायक की गरिमामयी उपस्थिति भी रहेगी।
लीला इंटरनेशनल स्कूल के प्रबंधक पुनीत डी. ने समस्त क्षेत्रवासियों, अभिभावकों, विद्यार्थियों एवं गणेश भक्तों से आत्मीय अपील करते हुए कहा कि सभी परिवार सहित विद्यालय परिसर में पधारकर “लीला के राजा” के दर्शन करें और भगवान श्री गणेश जी का आशीर्वाद प्राप्त करें। उन्होंने कहा कि यह आयोजन केवल धार्मिक आस्था का पर्व नहीं, बल्कि नई पीढ़ी को भारतीय संस्कृति, संस्कार और हमारी गौरवशाली परंपराओं से जोड़ने का एक सार्थक प्रयास है।
पुनीत डी. ने कहा कि भगवान श्री गणेश जी ज्ञान, बुद्धि और विवेक के प्रतीक हैं। विद्यालय में उनके विराजमान होने का उद्देश्य विद्यार्थियों को यह संदेश देना है कि जीवन में सफलता के लिए शिक्षा के साथ अच्छे संस्कार, अनुशासन, विनम्रता और नैतिक मूल्यों का होना भी आवश्यक है। लीला इंटरनेशनल स्कूल का प्रयास है कि विद्यार्थी आधुनिक शिक्षा के क्षेत्र में निरंतर आगे बढ़ें, लेकिन अपनी संस्कृति और संस्कारों से कभी दूर न हों।
उन्होंने कहा कि “संस्कार और संस्कृत के साथ शिक्षा को शिखर तक पहुंचाना” विद्यालय की सोच का महत्वपूर्ण हिस्सा है। बच्चों को पुस्तकीय ज्ञान के साथ भारतीय संस्कृति, परंपरा, नैतिकता और जीवन-मूल्यों की शिक्षा मिले, ताकि वे भविष्य में ज्ञानवान होने के साथ-साथ जिम्मेदार और संस्कारी नागरिक बन सकें।
“लीला के राजा” की स्थापना दिवस पर विद्यालय परिसर में विशेष आरती और भजन संध्या का आयोजन श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र रहेगा। भक्तिमय वातावरण में गणेश वंदना और भजनों की प्रस्तुति से पूरा विद्यालय परिसर आध्यात्मिक ऊर्जा से भर उठेगा। इस अवसर पर विद्यार्थी, शिक्षक, अभिभावक और क्षेत्र के गणमान्य नागरिक एक साथ भगवान श्री गणेश जी की आराधना में सहभागी बनेंगे।
विद्यालय प्रबंधन का मानना है कि आज के आधुनिक दौर में बच्चों को तकनीकी और शैक्षणिक रूप से मजबूत बनाने के साथ उन्हें अपनी जड़ों से जोड़ना भी अत्यंत आवश्यक है। इसी उद्देश्य से लीला इंटरनेशनल स्कूल में धार्मिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रमों को शिक्षा का हिस्सा बनाते हुए विद्यार्थियों को भारतीय परंपराओं की जानकारी दी जा रही है। “लीला के राजा” इसी सोच और संकल्प का प्रतीक हैं।
पुनीत डी. ने क्षेत्रवासियों से आग्रह किया कि इस पावन अवसर को केवल विद्यालय का कार्यक्रम न मानते हुए इसे पूरे क्षेत्र का उत्सव बनाएं। उन्होंने कहा कि “लीला के राजा” सभी के हैं और उनके दर्शन का अवसर हर श्रद्धालु के लिए सौभाग्य का विषय है। उन्होंने सभी से अधिक से अधिक संख्या में पहुंचकर भगवान श्री गणेश जी के दर्शन करने और विशेष आरती एवं भजन संध्या में सहभागी बनने की अपील की।
लीला इंटरनेशनल स्कूल में “लीला के राजा” की स्थापना आस्था के साथ-साथ शिक्षा, संस्कार और संस्कृति के सुंदर संगम का संदेश देगी। विद्यालय परिवार की मंगलकामना है कि भगवान श्री गणेश जी सभी के जीवन में सुख, शांति, समृद्धि और सफलता प्रदान करें तथा विद्यार्थियों को ज्ञान और संस्कार के मार्ग पर निरंतर आगे बढ़ने की शक्ति दें।
गणपति बप्पा मोरया…
लीला के राजा मोरया!










































