जांच में अनियमितता मिलने पर सचिव निलंबित, उपयंत्री पर संविदा समाप्ति की कार्रवाई; धारा 40 के नोटिस के बाद भी सरपंच पर अंतिम कार्रवाई नहीं
सिंगरौली। जिले के देवसर जनपद पंचायत अंतर्गत ग्राम पंचायत कठदहा में घघिया नाला पर करीब 16 लाख रुपये की लागत से बनाया गया चेकडैम पहली ही बारिश में क्षतिग्रस्त होकर बह गया। निर्माण कार्य की गुणवत्ता और उपयोगिता को लेकर सवाल उठने के बाद प्रशासनिक जांच कराई गई, जिसमें अनियमितताएं सामने आने की बात कही गई है।
जांच के बाद पंचायत सचिव बिहारीलाल साकेत को निलंबित कर दिया गया, जबकि उपयंत्री सतीश पटेल की संविदा समाप्ति की प्रक्रिया शुरू किए जाने की जानकारी सामने आई है। कार्रवाई के बावजूद इस मामले में ग्राम पंचायत के सरपंच दिलशरण सिंह पर अंतिम निर्णय अब तक नहीं होने को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
धारा 40 के नोटिस के बाद भी कार्रवाई का इंतजार

जानकारी के अनुसार सरपंच दिलशरण सिंह को मध्यप्रदेश पंचायत राज एवं ग्राम स्वराज अधिनियम, 1993 की धारा 40 के तहत पद से हटाने के संबंध में कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था। नोटिस में जवाब प्रस्तुत करने की अंतिम तिथि 13 जुलाई निर्धारित बताई गई थी। निर्धारित समय बीत जाने के बाद भी सरपंच के विरुद्ध अंतिम कार्रवाई नहीं होने से प्रशासनिक प्रक्रिया पर सवाल उठ रहे हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि जब निर्माण कार्य में अनियमितता को लेकर जांच और कार्रवाई हो चुकी है, तो जिम्मेदारी तय करने की प्रक्रिया सभी संबंधित लोगों पर समान रूप से लागू होनी चाहिए।
2011 से भ्रष्टाचार के आरोप
ग्रामीणों ने कठदहा पंचायत में वर्ष 2011 से विभिन्न निर्माण कार्यों में अनियमितता के आरोप लगाए हैं। ग्रामीणों का दावा है कि कई कार्य कागजों में पूर्ण दर्शाए गए, जबकि मौके पर उनकी स्थिति अलग है। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना अभी बाकी है।
ग्रामीणों के अनुसार करीब 10 लाख रुपये की लागत से बनाया गया पुलिया निर्माण भी सवालों के घेरे में रहा है। इसके अलावा मजदूरों की मजदूरी भुगतान में देरी को लेकर भी शिकायतें सामने आती रही हैं।
छोटे कर्मचारियों पर कार्रवाई, जिम्मेदारी किसकी?
ग्रामीणों का आरोप है कि पंचायत में शिकायत सामने आने के बाद अक्सर सचिव अथवा रोजगार सहायक जैसे कर्मचारियों पर कार्रवाई कर दी जाती है, लेकिन निर्वाचित जनप्रतिनिधियों की जवाबदेही तय करने में प्रशासनिक स्तर पर देरी होती है। कठदहा के चेकडैम मामले में भी ग्रामीण अब यही सवाल उठा रहे हैं।
बड़ा सवाल: आखिर कार्रवाई में देरी क्यों?
जब चेकडैम निर्माण को लेकर जांच के बाद कर्मचारियों पर कार्रवाई की जा चुकी है, तो सरपंच के मामले में अंतिम निर्णय अब तक क्यों नहीं हुआ? धारा 40 के तहत जारी नोटिस की प्रक्रिया किस स्तर पर लंबित है? क्या प्रशासन जल्द ही इस मामले में जिम्मेदारी तय करेगा?
अब ग्रामीणों की नजर जिला प्रशासन और जिला पंचायत स्तर की अगली कार्रवाई पर है।











































