महाकवि बाणभट्ट की प्रतिमा उपेक्षित, धरोहर के सम्मान पर उठे सवाल

सीधी:- संस्कृत साहित्य के महान रचनाकार एवं महाकवि बाणभट्ट की जन्मस्थली चदरेह की ऐतिहासिक और साहित्यिक पहचान संरक्षण एवं विकास की बाट जोह रही है। बाणभट्ट की स्मृति में वर्षों पूर्व सीधी लाई गई प्रतिमा आज भी अपने सम्मानजनक स्थापना स्थल की प्रतीक्षा कर रही है। उचित देखरेख के अभाव में प्रतिमा के क्षतिग्रस्त होने की बात भी सामने आई है। ऐसे में अब यह सवाल उठने लगा है कि जिले की गौरवशाली साहित्यिक विरासत को लेकर जिम्मेदार तंत्र कितना गंभीर है। बीरबल सामाजिक विकास समिति के संस्थापक एवं अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के पूर्व जिला संयोजक अभिषेक मिश्रा ने कहा कि महाकवि बाणभट्ट की प्रतिमा की स्थापना महज एक प्रतिमा स्थापित करने का विषय नहीं है, बल्कि यह सीधी की साहित्यिक चेतना और ऐतिहासिक- सांस्कृतिक विरासत के सम्मान से जुड़ा मामला है। उन्होंने मांग की कि प्रतिमा को सीधी लाए जाने से संबंधित अभिलेख एवं पत्राचार सार्वजनिक किए जाएं तथा चदरेह को साहित्यिक एवं सांस्कृतिक धरोहर के रूप में विकसित करने की दिशा में ठोस पहल की जाए।
2017 में उठा था प्रतिमा स्थापना का प्रस्ताव
विंध्य के युवा रंगकर्मी एवं नाटककार रोशनी प्रसाद मिश्र ने बताया कि वर्ष 2017 में कालिदास संस्कृत अकादमी, उज्जैन द्वारा आयोजित बाणभट्ट महोत्सव में इन्द्रवती नाट्य समिति भी सहयोगी संस्था के रूप में शामिल हुई थी। इसी दौरान जिले के साहित्यकारों और कलाकारों ने सीधी से महाकवि बाणभट्ट के ऐतिहासिक एवं साहित्यिक संबंध को रेखांकित करते हुए उनकी स्मृति में प्रतिमा स्थापित किए जाने का प्रस्ताव रखा था। कार्यक्रम में तत्कालीन सीधी विधायक भी मौजूद रहे और प्रस्ताव पर सहमति जताई गई थी। रोशनी प्रसाद मिश्र के अनुसार प्रस्ताव के बाद कालिदास संस्कृत अकादमी की ओर से पत्राचार किया गया और महाकवि बाणभट्ट की प्रतिमा सीधी भेजी गई। उस समय उम्मीद थी कि प्रतिमा को शीघ्र ही उपयुक्त स्थान देकर विधिवत स्थापित किया जाएगा, लेकिन वर्षों बीत जाने के बाद भी यह कार्य पूरा नहीं हो सका।
चदरेह को विकसित करने की जरूरत
अभिषेक मिश्रा ने कहा कि महाकवि बाणभट्ट की जन्मस्थली चदरेह सीधी की महत्वपूर्ण साहित्यिक पहचान है। यदि इस क्षेत्र को योजनाबद्ध तरीके से साहित्यिक एवं सांस्कृतिक धरोहर के रूप में विकसित किया जाए तो यह आने वाली पीढ़ियों को जिले के गौरवशाली इतिहास से जोड़ने के साथ ही क्षेत्र की पहचान को भी नई ऊंचाई दे सकता है। उन्होंने जिला प्रशासन एवं जनप्रतिनिधियों से मांग की कि महाकवि बाणभट्ट की प्रतिमा को शीघ्र सम्मानजनक स्थान प्रदान किया जाए। साथ ही चदरेह की ऐतिहासिक, साहित्यिक एवं सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण और विकास के लिए ठोस कार्ययोजना तैयार कर उसे धरातल पर उतारा जाए।










































