पीएम आवास योजना में गड़बड़ी के आरोप, मजदूरी की राशि दूसरे खातों में पहुंचाने का दावा
देवसर जनपद की कई पंचायतें सवालों के घेरे में, कुंदवार, परसोहर, सरौधा, बंधा, कुरसा, करदा और कुसेणी सहित 8 से अधिक पंचायतों में अनियमितताओं की शिकायत

सिंगरौली। देवसर जनपद पंचायत की विभिन्न ग्राम पंचायतों में प्रधानमंत्री आवास योजना को लेकर गंभीर शिकायतें सामने आई हैं। स्थानीय लोगों और शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि योजना के तहत पात्र हितग्राहियों को मिलने वाली मजदूरी की राशि में गड़बड़ी की गई और कई मामलों में राशि कथित रूप से दूसरे व्यक्तियों के खातों में पहुंचाई गई। शिकायतों ने पंचायत स्तर से लेकर जिम्मेदार अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।
शिकायतकर्ताओं के अनुसार मामला केवल मजदूरी भुगतान तक सीमित नहीं है। आरोप है कि कुछ मामलों में आवास किसी अन्य पात्र व्यक्ति के नाम स्वीकृत होने के बावजूद आवास की राशि और दस्तावेजों में हेरफेर कर किसी दूसरे व्यक्ति के नाम पर पंजीयन अथवा भुगतान किए जाने की स्थिति सामने आई है। वहीं कुछ मामलों में बिना वास्तविक निर्माण कार्य पूर्ण हुए राशि के भुगतान का भी आरोप लगाया गया है।
गरीब के आवास की राशि पर किसका कब्जा?
प्रधानमंत्री आवास योजना का उद्देश्य गरीब और जरूरतमंद परिवारों को पक्का मकान उपलब्ध कराना है। लेकिन यदि शिकायतों में लगाए गए आरोप जांच में सही पाए जाते हैं तो यह बेहद गंभीर मामला होगा। सवाल यह है कि जिन हितग्राहियों के नाम पर आवास स्वीकृत हुए, उनके खाते में मिलने वाली राशि का वास्तविक लाभ किसे मिला?
विशेषकर मजदूरी भुगतान में यदि किसी पात्र हितग्राही के बजाय दूसरे व्यक्ति के खाते में राशि गई है तो इसकी जांच मस्टर रोल, जॉब कार्ड, बैंक भुगतान विवरण, आवास की जियो-टैगिंग और निर्माण की वास्तविक स्थिति के आधार पर आसानी से की जा सकती है।
आदिवासी बहुल पंचायतों में ज्यादा शिकायतें
शिकायतकर्ताओं का दावा है कि आदिवासी बहुल क्षेत्रों की पंचायतों में इस तरह की अनियमितताओं की शिकायतें अधिक सामने आई हैं। कुंदवार, परसोहर, सरौधा, बंधा, कुरसा, करदा, कुसेणी सहित 8 से अधिक पंचायतों के नाम शिकायतों में बताए जा रहे हैं।
यदि इतने बड़े क्षेत्र में पीएम आवास योजना के भुगतान और निर्माण में अनियमितताओं की शिकायतें सामने आ रही हैं तो इसे किसी एक हितग्राही की समस्या मानकर नजरअंदाज करना उचित नहीं होगा। पंचायतवार जांच होने पर ही स्पष्ट होगा कि मामला कितना व्यापक है।
कागजों से निकलकर जमीन पर हो जांच
पीएम आवास योजना में केवल ऑनलाइन रिकॉर्ड देखकर जांच पूरी नहीं हो सकती। जरूरत इस बात की है कि संबंधित अधिकारियों की टीम गांव-गांव पहुंचकर यह सत्यापित करे कि जिस हितग्राही के नाम आवास स्वीकृत है, वही व्यक्ति वास्तव में वहां रह रहा है या नहीं, आवास बना है या नहीं, निर्माण की स्थिति क्या है और भुगतान किस खाते में हुआ है।
इसके साथ ही मजदूरी के भुगतान का मस्टर रोल और बैंक खाते का मिलान किया जाए। यदि रिकॉर्ड में हितग्राही का नाम कुछ और है और भुगतान किसी अन्य व्यक्ति के खाते में गया है तो इसकी जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए।
11 सितंबर को गन्नई शिविर में उठी आवाज
मामले की गंभीरता को लेकर स्थानीय निवासियों ने जिला पंचायत के नवागत मुख्य कार्यपालन अधिकारी संघ प्रिय और सिंगरौली कलेक्टर गौरव बैनल से शिकायत कर निष्पक्ष जांच की मांग की है। शिकायतकर्ताओं ने 11 सितंबर को गन्नई में आयोजित मुख्यमंत्री जनसमस्या निवारण शिविर के दौरान भी अपनी समस्या अधिकारियों के सामने रखी और पीएम आवास योजना में कथित अनियमितताओं की जांच कराने की मांग की।
जांच हुई तो खुल सकता है भुगतान का पूरा खेल
अब जिला प्रशासन के सामने सबसे बड़ा सवाल यही है कि शिकायतों पर केवल कागजी जांच होगी या फिर मौके पर जाकर वास्तविक हितग्राहियों से भी पूछताछ की जाएगी।
यदि जांच में अपात्र व्यक्ति को भुगतान, दूसरे खाते में मजदूरी राशि का हस्तांतरण, बिना निर्माण के भुगतान, फर्जी दस्तावेज या रिकॉर्ड में हेरफेर जैसी अनियमितताएं सामने आती हैं तो संबंधित जिम्मेदारों से राशि की वसूली के साथ नियमानुसार दंडात्मक कार्रवाई की जानी चाहिए।
वहीं यदि शिकायतें गलत पाई जाती हैं तो प्रशासन को जांच के आधार पर वास्तविक स्थिति भी सार्वजनिक करनी चाहिए, ताकि योजना और पंचायत व्यवस्था को लेकर लोगों के बीच फैली शंकाओं का समाधान हो सके।
अब नवागत CEO और कलेक्टर की अग्निपरीक्षा
देवसर जनपद की पंचायतों में पीएम आवास योजना को लेकर सामने आई शिकायतों ने सरकारी योजनाओं की निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। गरीब परिवारों के लिए बनाई गई योजना में यदि वास्तव में किसी स्तर पर राशि का दुरुपयोग हुआ है तो यह केवल वित्तीय अनियमितता नहीं, बल्कि जरूरतमंद परिवार के अधिकार से खिलवाड़ का मामला होगा।
अब देखना यह है कि नवागत जिला पंचायत CEO संघ प्रिय और कलेक्टर गौरव बैनल इन शिकायतों को कितनी गंभीरता से लेते हैं। क्या पंचायतवार विशेष जांच कराकर वास्तविक हितग्राहियों तक पहुंच बनाई जाएगी, या फिर पीएम आवास से जुड़े ये गंभीर आरोप भी सरकारी फाइलों में दबकर रह जाएंगे?
फिलहाल मामला शिकायत और आरोपों के स्तर पर है। आरोपों की अंतिम पुष्टि प्रशासनिक जांच के बाद ही होगी।










































